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कोरोना वायरस: भारत में दक्षिण कोरिया और अमरीका के मुकाबले टेस्टिंग कम क्यों?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
कोरोना वायरस का पहला मामला भारत में आए दो महीने हो गए हैं. सरकार का दावा है कि अब भी भारत संक्रमण के तीसरे चरण में नहीं पहुंचा है.
लेकिन ये भी सच है कि कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अभी तक कम लोगों की जाँच के लिए भारत की आलोचना हो रही है.
भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने वाले टेस्ट बेहद कम हुए हैं.
यहां प्रति 10 लाख लोगों में महज़ 6.8 लोगों के टेस्ट किए गए हैं, जो दुनिया भर के देशों में सबसे निम्नतम दर है.
शुरुआत में, भारत में केवल उन लोगों के टेस्ट किए गए जो हाई रिस्क वाले देशों की यात्रा से लौटे थे या फिर किसी संक्रमित मरीज़ या मरीज़ का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मी के संपर्क में आए थे.
बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के चलते अस्पताल में भर्ती मरीज़ों की भी जांच होगी.
कोरोना वायरस टेस्टिंग किट
लेकिन संक्रमण का दायरा हर दिन बढ़ता जा रहा है, आशंका जताई जा रही है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले आने वाले दिनों में और तेज़ी से बढ़ेंगे.
इन सबको देखते हुए बीते गुरुवार को, भारत में दो प्राइवेट लैब्स को कोरोना वायरस टेस्टिंग किट बनाने की मंज़ूरी आईसीएमआर ने दी है.
पुणे की मायलैब डिस्कवरी भारत की पहली ऐसी फ़र्म है जिसे टेस्टिंग किट तैयार करने और उसकी बिक्री करने की अनुमति मिली है.
मायलैब की प्रत्येक किट से 100 सैंपलों की जांच हो सकती है.
इस किट की क़ीमत 1200 रुपये है, जो विदेश से मंगाए जाने वाली टेस्टिंग किट के 4,500 रुपये की तुलना में बेहद कम है.
मायलैब डिस्कवरी की रिसर्च और डेवलपमेंट प्रमुख वायरोलॉजिस्ट मीनल दखावे भोसले ने बीबीसी को बताया, "हमारी किट कोरोना वायरस संक्रमण की जांच ढाई घंटे में कर लेती है, जबकि विदेश से आने वाले किट से जांच में छह-सात घंटे लगते हैं."
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कैसे होती है कोविड19 की जांच
कोविड19 की जांच के लिए अब तक दो स्तर जांच होती है. इसके लिए नाक और मुंह से पहले स्वैब लिया जाता है.
पहले टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद ही दूसरा टेस्ट किया जाता है. दोनों टेस्ट पॉजिटिव पाए जाने पर ही मरीज़ को कोरोना पॉजिटिव माना जाता है.
फ़िलहाल भारत में इस टेस्ट को पूरा करने में छह घंटे का वक़्त लगता है.
लेकिन भारत में जिन प्राइवेट कंपनियों को अब नए टेस्ट किट बनाने की इज़ाजत दी गई है, उनको नए किट बनाने में महज़ ढाई घंटे का वक़्त लगेगा और वो भी बिना दो टेस्ट किए.
मायलैब के मैनेजिंग डायरेक्टर हसमुख रावल ने बीबीसी से बताया कि उनकी टेस्टिंग किट में दोनों टेस्ट एक साथ ही किए जा सकेंगे और वो भी ढाई घंटे के भीतर.
टेस्टिंग किट कितने तरह के होते हैं
कोरोना संक्रमण के जांच के लिए दो तरह के किट आते हैं. एक किट एंटीजीन बेस्ड होता है और दूसरा एंटी बॉडी बेस्ड.
डॉक्टर एसके सरीन इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलिनरी साइंस, दिल्ली के निदेशक हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि दुनिया के तमाम देश कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए फ़िलहाल एंटी जीन बेस्ड टेस्ट का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.
उनके मुताबिक़ एंटी जीन बेस्ड टेस्ट दरअसल वायरस का पता लगाने के लिए किया जाता है जबकि एंटी बॉडी बेस्ड टेस्ट कोरोना संक्रमण के रिकवरी के बाद के स्टेज का पता लगाने के लिए किया जाता है.
डॉक्टर सरीन के मुताबिक़, "जो आदमी कोरोना संक्रमण से रिकवर कर गए वो ठीक होने के बाद काम पर जा सकते हैं. उनके लिए एंटी बॉडी टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है."
पहले स्टेज के मरीज़ों के लिए दुनिया के तमाम देश एंटी जीन बेस्ड टेस्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए भारत में भी यही टेस्ट इस्तेमाल किया जा रहा है.
भारत में देरी क्यों?
डॉक्टर सरीन का दावा है कि कोरोना के लिए एंडी बॉडी टेस्ट किट पांच-सात दिन पहले ही बने है. उनके मुताबिक़ भारत में उन टेस्ट किट की जरूरत है जो 100 फीसदी नेगेटिव केस को 100 फीसदी नेगेटिव बता सके और 100 फीसदी पॉजिटिव केस को 100 फीसदी पॉजिटिव बता सकें.
किसी भी सैंपल के टेस्ट रिपोर्ट आने में कितना वक़्त लगता है वो इस बात से पता लगाया जा सकता है कि कितनी जल्दी डीएनए एक्सट्रैक्ट निकाल पाता है, उसका टेस्ट रिजल्ट आने का रन टाइम कितना है, टेस्ट रिजल्ट को रीड और रिपोर्ट करने में कितना वक़्त लगता है.
दक्षिण कोरिया ने टेस्ट किट विकसित किए हैं जिनमें रिजल्ट 45 मिनट से एक घंटे में आ जाता है. लेकिन भारत में देरी क्यों?
इस सवाल पर डॉक्टर सरीन कहते हैं, "ये वायरस अभी बहुत नया है. दक्षिण कोरिया, अमरीका और चीन में पहले आया, भारत में बाद आया. विदेश के जिन देशों से भारत की हम तुलना करना चाह रहे हैं, वो तकनीक के मामले में हमसे ज्यादा विकसित हैं. हर देश की अपनी अलग प्रथामिकताएं हैं. फिलहाल हमारी प्रथामिकता है कि ये देश में ज्यादा ना फैले."
जानकारों के मुताबिक़ टेस्टिंग किस देश को कितनी करनी है इसका फैसला लेने के कई पैमाने हैं. मसलन एक पैमाना ये हो सकता है कि संक्रमण उस देश में किस स्तर पर है, दूसरा ये की वहां की जनसंख्या कितनी है तीसरा देश की प्रथामिकता क्या है और चौथा देश में सुविधाएं कैसी है और निपटने की तैयारी कितनी है.
बाक़ी देशों मेंटेस्टिंग
आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव के मुताबिक़ फ़्रांस हर सप्ताह 10 हज़ार लोगों के टेस्ट कर रहा है, ब्रिटेन में 16 हज़ार लोगों की टेस्टिंग हर हफ़्ते हो रही है जबकि अमरीका में तकरीबन 26 हज़ार लोगों की टेस्टिंग प्रति सप्ताह हो रही है.
जो देश प्रति सप्ताह ज़्यादा लोगों की टेस्टिंग कर रहे हैं उनमें शामिल हैं दक्षिण कोरिया जो तकरीबन 80 हज़ार लोगों की टेस्टिंग एक हफ़्ते में कर रहा है.
वैसे ही जर्मनी में तकरीबन 42 हज़ार और इटली में हर हफ़्ते तकरीबन 52 हज़ार लोगों की टेस्टिंग की जा रही है.
भारत सरकार का पक्ष
बीते रविवार को केंद्र सरकार के संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉक्टर भार्गव ने कहा था कि भारत में प्रति सप्ताह 60 से 70 हज़ार लोगों की टेस्टिंग करने की क्षमता है.
इसी कड़ी में सरकार ने सोमवार को 25 प्राइवेट लैब को कोविड19 के मरीज़ो को टेस्ट करने की इजाज़त दे दी है. इनके लैब्स के पास देश भर में हज़ारों कलेक्शन सेंटर भी हैं.
भारत में आज की तारीख में 113 लैब्स ऐसे हैं जिसमें टेस्टिंग हो रही है. अब तक दो महीने में 35 हजार लोगों का सैंपल गया है. आरसीएसआर के डॉक्टर रमन आर गंगाखेड़कर के मुताबिक़ भारत फिलहाल अपनी टेस्टिंग क्षमता का 30 फीसदी ही टेस्ट किट का उपयोग कर रहा है. और टेस्टिंग किट की किसी तरह की कोई कमी नहीं है.
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजयरघवन के मुताबिक भारत के लैब्स में भी एन्टी बॉडी बेस्ड टेस्ट पर काम चल रहा है. विश्व स्तर पर ऐसे टेस्ट की सफलता को देख कर भारत भी अपने टेस्टिंग क्षमता को बढ़ने पर आने वाले दिनों में विचार कर सकता है.
अमरीका में कोरोना टेस्ट
दुनिया की जानी-मानी फ़ार्मा और हेल्थकेयर कंपनी ऐबॉट भारत में वो टेस्टिंग किट ला सकती है जिससे पांच मिनट में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता चल जाता है. ये रिपोर्ट अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी है.
अमरीका का फ़ूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) पहले ही इस टेस्टिंग किट को मंज़ूरी दे चुका है. ये टेस्टिंग किट पोर्टेबल है यानी इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है. फ़िलहाल यह किट अभी सिर्फ़ अमरीका में उपलब्ध है. भारत में ये नहीं आई है.
हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में एबॉट के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी 24 घंटे काम करके ज़्यादा से ज़्यादा किट बनाने की कोशिश कर रही है ताकि इसे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा सके.
अमरीकी अस्पतालों में अगले हफ़्ते से इस किट के ज़रिए कोरोना संक्रमण के टेस्ट होने शुरू हो जाएंगे. कंपनी ने कहा कि इससे रोज़ 50 हज़ार टेस्ट किए जाने की उम्मीद है. हालांकि आईसीएमआर के मुताबिक ये एंटी बॉडी बेस्ट टेस्ट हैं.
दक्षिण कोरिया में कोरोना टेस्ट
शुरू में दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े. लेकिन इसने संक्रमण की पुष्टि के लिए टेस्ट विकसित किया. पहले जहां दक्षिण कोरिया में रोज़ क़रीब 10 हज़ार लोगों का मुफ्त परीक्षण हो रहा है, अब ये संख्या बढ़ कर 20 हज़ार हो गई है.
दक्षिण कोरिया में दर्जनों ऐसे केंद्र बनाए गए हैं जहां आप गाड़ी में बैठे-बैठे टेस्ट करा सकते हैं. यहां आपके नाक और मुंह का स्वैब लिया जाता है. और आप घर जा सकते हैं. टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर आपको कॉल करके बताया जाता है, जबकि नेगेटिव आने पर आपको फोन पर सिर्फ़ एक मैसेज भेजा जाता है.
दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस टेस्ट के लिए बनाए गए ये लैब्स 24x7 काम कर रहे हैं. यहां कोरोना वायरस टेस्ट के लिए 96 पब्लिक और प्राइवेट लैब का निर्माण किया है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि इस तरह से लोगों की ज़िंदगियां बचाई जा सकती हैं. दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस से मौत की दर 0.7 फ़ीसदी है. अगर वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर जारी की गई दर की बात करें तो यह 3.4 फ़ीसदी है. दक्षिण कोरिया की आबादी पांच करोड़ है.
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