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कर्नाटक विधानसभा में गो-हत्या रोधी बिल पास
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक विधानसभा में भारी हंगामे के बीच बुधवार को गो-हत्या रोधी बिल पास हो गया. कांग्रेस ने पहले विरोध किया और फिर उसके विधायक सदन की कार्यवाही छोड़कर चले गए.
उत्तर प्रदेश के क़ानून की ही तर्ज़ पर बने 'कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण विधेयक 2020' को कर्नाटक विधानसभा में पशुपालन मंत्री प्रभु चाव्हाण ने पेश किया.
नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बिल पेश किए जाने का यह कहकर विरोध किया कि बिल बिना किसी नोटिस और प्रस्तावित विधेयक की कॉपी मुहैया कराए बिना पेश किया गया है.
विपक्ष के कई विधायक सदन के वेल में दाख़िल हो गए.
कांग्रेस के विधायकों ने सदन का वाकआउट कर दिया और सिर्फ़ बीजेपी विधायकों की मौजूदगी में बिल पास हो गया.
सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सिद्दारमैया ने कहा, "बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी (बीएसी) में भी इस बिल के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई थी."
लेकिन पशुपालन मंत्री प्रभु चाव्हाण ने बीबीसी हिंदी से कहा, "स्पीकर ने बीएसी में बिल्कुल साफ़ कर दिया था कि एक महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किया जाएगा. और मैं भी इस बारे में कई दिनों से मीडिया को बता रहा था कि मौजूदा सेशन में यह बिल पास हो जाएगा."
मौजूदा सेशन पहले एक हफ़्ते तक चलने की बात थी था लेकिन मंगलवार को फ़ैसला किया गया कि गुरुवार को सदन को स्थगित कर दिया जाएगा क्योंकि कोरोना के कारण बहुत सारे विधायक नहीं आ रहे हैं.
बिल में क्या है ख़ास?
बिल में मवेशी (गाय और भैंस और उनके बछड़े) की हत्या, राज्य के अंदर और राज्य के बाहर उनकी ढुलाई और तस्करी पर पाबंदी लगा दी गई है. मवेशी का वध करने या ख़रीद-फ़रोख़्त करने का दोषी पाए जाने पर एसडीओ मवेशी को ज़ब्त कर सकता है, साथ ही में इसको लेकर जा रही गाड़ी और इससे जुड़े दूसरे सामानों को भी ज़ब्त किया जा सकता है.
एसडीओ को बिल के तहत यह अधिकार भी दिया गया है कि वो ज़ब्त किए गए सामान की नीलामी कर सकता है.
दोषी पाए जाने पर तीन से सात साल तक की सज़ा हो सकती है और प्रत्येक जानवर पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लग सकता है. फ़ाइन बढ़ाकर पाँच लाख भी किया जा सकता है.
दूसरी बार दोषी पाए जाने पर सज़ा पाँच साल की होगी और फ़ाइन प्रत्येक जानवर एक लाख रुपए हो सकता है.
मवेशियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान अगर इस क़ानून से बचना है तो उसके लिए पुशपालन विभाग के अधिकारी से एक सर्टिफ़िकेट लेना होगा.
इस बिल के ड्राफ़्ट से पहले कर्नाटक के अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश और गुजरात का दौरा किया था. इस बिल ने कर्नाटक गो-हत्या विरोधी क़ानून (1964) को रद्द कर दिया है.
बिल का विरोध
दलित संघर्ष समिति के नेता हुलिकल राजशेखर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "यह तो हमारे खाने के अधिकार को छीनने जैसा है. बहुत सारे दलित और आर्थिक रूप से कमज़ोर समाज के दूसरे लोग बीफ़ खाते हैं क्योंकि यह प्रोटीन का सबसे सस्ता साधन है.''
बीएसपी के एक पूर्व नेता एन महेश ने कहा, ''मैं बीफ़ खाता हूं और मैं आगे भी खाता रहूंगा. जैसे ही इसे विधानसभा में पेश किया गया, मैं सदन से बाहर आ गया और सोचा था कि इसके बारे में कल बात करूंगा. लेकिन अब तो बिल पास हो गया."
पिछले साल बीएसपी ने महेश को पार्टी से निकाल दिया था जब उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया था. महेश ने कहा कि उन्होंने बीजेपी की सदस्यता नहीं ली है और वो एक निर्दलीय विधायक हैं.
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