यति नरसिंहानंद को किया गया गिरफ़्तार, महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने का मामला

यति नरसिंहानंद

इमेज स्रोत, SAMEERATMAJ MISHRA/BBC

इमेज कैप्शन, यति नरसिंहानंद
पढ़ने का समय: 6 मिनट

हरिद्वार पुलिस ने हिंदूवादी नेता यति नरसिंहानंद को शनिवार देर रात महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में गिरफ़्तार किया है.

हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र सिंह रावत ने बीबीसी से यति नरसिंहानंद को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की है.

हरिद्वार पुलिस के प्रवक्ता इंस्पेक्टर विपिन पाठक ने बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को बताया, "स्वामी यति नरसिंहानंद पर हरिद्वार पुलिस में कई मुक़दमे दर्ज़ हैं. अभी उन्हें मुक़दमा संख्या 18/22 में गिरफ़्तार किया गया है. ये रुचिका नाम की एक लड़की की शिक़ायत पर दर्ज़ किया गया था."

विपिन पाठक के मुताबिक़, "स्वामी यति नरसिंहानंद को महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है. उन पर 'धर्म संसद' के दौरान भड़काऊ भाषण देने का मामला भी दर्ज़ है."

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने भी हरिद्वार के सर्किल ऑफ़िसर के हवाले से बताया है कि महिलाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए दर्ज़ मुक़दमे में यति नरसिंहानंद की गिरफ़्तारी हुई है. उन्होंने बताया कि उनके ख़िलाफ़ दो-तीन मामले दर्ज़ हैं.

हरिद्वार पुलिस ने दो दिन पहले धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के लिए जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ वसीम रिज़वी को गिरफ़्तार किया था. ये इस मामले में हुई पहली गिरफ्तारी थी. धर्म संसद बीते साल दिसंबर 17 से लेकर 19 तक आयोजित की गई थी.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

वसीम रिज़वी उत्तर प्रदेश शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन हैं. उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया. इसके बाद उन्हें तुरंत ज़मानत दिए जाने की मांग करते हुए यति नरसिंहानंद हरिद्वार में धरने पर बैठ गए.

जब वसीम रिज़वी उर्फ जितेंद्र नारायण त्यागी को रुड़की के नारसन बॉर्डर से हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करते वक़्त गिरफ़्तार किया गया तो यति नरसिंहानंद गिरि भी उनके साथ थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया.

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

धर्म संसद में दिए बयान के वायरल होने के बाद से उनकी गिरफ़्तारी न होने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जाने लगे थे.

इस मामले को लेकर कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख़ भी किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार और दिल्ली में धर्म में हेट स्पीच देने वालों के ख़िलाफ़ जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करने वाली याचिका पर 12 जनवरी को केंद्र सरकार से जवाब मांगा.

ये याचिकाएं पत्रकार कुर्बान अली और पटना हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ वक़ील अंजना प्रकाश ने दायर की थी. उन्होंने इस मामले में एसआईटी की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की मांग की थी.

वहीं सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर यति नरसिंहानंद की टिप्पणियों को लेकर भी उन पर अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी.

दिसंबर के आख़िरी महीने में 76 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर कोर्ट का ध्यान हरिद्वार में हेट स्पीच मामले की ओर खींचा था.

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

पत्र लिखने वाले वकीलों में से एक ने बीबीसी को बताया कि जिस तरह की भाषा का नरसिंहानंद इस्तेमाल कर रहे हैं, "पुलिस तो उन्हें एक तरह की छूट दे रही है."

उनका कहना था, "उन पर डकैती, हत्या की कोशिश जैसी धाराएँ लगाई गई हैं. मुझे समझ नहीं आता कि इन सब मामलों में, जिनमें इन्होंने अपराधों को दोहराया है, इनको ज़मानत कैसे मिल रही है. इनकी तो ज़मानत रद्द हो जानी चाहिए थी."

एक कार्यकर्ता शची नेल्ली ने यति नरसिंहानंद की टिपण्णियों को लेकर उन पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए एटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी. उनका आरोप था कि यति नरसिंहानंद ने एक इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट और संविधान की अवमानना की है.

यह इंटरव्यू 14 जनवरी को ट्विटर पर वायरल हुआ था. इसमें यति नरसिंहानंद ने कहा था, "हमारा सुप्रीम कोर्ट और संविधान पर कोई भरोसा नहीं है. ये संविधान 100 करोड़ हिंदुओं को मार देगा. जो इस सिस्टम, नेताओं, पुलिस और सेना पर भरोसा करेंगे, वो मारे जाएंगे."

इस मामले में क़ानून के एक छात्र गुलबहार कुरैशी ने 23 दिसंबर को हरिद्वार कोतवाली में एफ़आईआर दर्ज कराई.

बीए एलएलबी अंतिम सेमेस्टर के छात्र गुलबहार कुरैशी का कहना है कि वो देश में नफ़रत फैलाने की कोशिश करने वाले हर शख़्स के ख़िलाफ़ खड़े होकर क़ानून के अंतर्गत लड़ाई लड़ेंगे.

वसीम रिज़वी ने दिसंबर, 2021 में ही इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वसीम रिज़वी ने दिसंबर, 2021 में ही इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया था

यति नरसिंहानंद की वकील और डासना देवी मंदिर की महंत माँ चेतनानंद सरस्वती के मुताबिक़ यति पर क़रीब दो दर्जन मामले अलग-अलग चरणों में हैं, कुछ में चार्जशीट दाखिल है, कुछ मामलों में हाईकोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है और कुछ मामलों में जाँच चल रही है.

उत्तराखंड में यति नरसिंहानंद पर दो धाराओं 153-ए और 295-ए के अंतर्गत मामला चलेगा. 153-ए यानी समुदायों के बीच धर्म, भाषा आदि के आधार पर दुश्मनी फैलाना, और धारा 295-ए यानी धार्मिक भावनाओं को आहत करना या उसकी कोशिश करना.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस के मुताबिक़ यति नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के अलावा आईपीसी की धाराओं जैसे 306, 307, 395 आदि में मुक़दमे दर्ज हैं. धारा 306 यानी किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना. धारा 307 यानी हत्या का प्रयास, धारा 395 यानी डकैती.

डासना का देवी मंदिर
इमेज कैप्शन, डासना का देवी मंदिर

कौन हैं यति नरसिंहानंद?

यति नरसिंहानंद सरस्वती ग़ाज़ियाबाद ज़िले के डासना क़स्बे में देवी मंदिर के 'पीठाधीश' हैं और अब जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर भी हैं.

ये वही देवी मंदिर है, जिसके गेट के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है- यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है.

हरिद्वार में हुई धर्म संसद के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यक मुसलमानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण दिए गए थे. उन्होंने कहा था, ".... मुसलमानों को मारने के लिए तलवार की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि तलवार से आपसे वो मरेंगे भी नहीं. आपको टेकनीक में उनसे आगे जाना होगा."

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

यति नरसिंहानंद पहले भी अपने बयानों और कामों के चलते विवादों में रहे हैं.

उन पर पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपमानजक भाषा का इस्तेमाल करने और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का भी आरोप लग चुका है.

बीते साल अप्रैल में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान ने यति नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि महंत ने पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपमानजक भाषा का इस्तेमाल किया है और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है.

शिकायत करने के एक दिन बाद दिल्ली पुलिस में अमानतुल्लाह ख़ान के ख़िलाफ़ कथित तौर पर यति नरसिंहानंद को धमकाने के मामले में शिकायत दर्ज हुई. हालांकि, पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए यति नरसिंहानंद के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज की.

12 मार्च को इसी मंदिर में नल से पानी पीने गए एक मुसलमान बच्चे को बेरहमी से पीटा गया. इसका वीडियो वायरल हो गया था. बाद में यति नरसिंहानंद ने बच्चे पर किए गए हमले को सही ठहराया और कहा कि बच्चा मंदिर का अपमान कर रहा था.

देवी मंदिर को अलग-अलग ट्रस्ट में विभाजित कर दिया गया और सभी ट्रस्टों के प्रमुख यति नरसिंहानंद सरस्वती हैं.
इमेज कैप्शन, देवी मंदिर को अलग-अलग ट्रस्ट में विभाजित कर दिया गया और सभी ट्रस्टों के प्रमुख यति नरसिंहानंद सरस्वती हैं.

डासना और मसूरी के स्थानीय निवासी क्या कहते हैं?

डासना और मसूरी के मुसलमानों का कहना है कि एक समय यहाँ सांप्रदायिक सौहार्द का माहौल था और इस मंदिर के निर्माण में मुसलमानों ने भी मदद की थी.

मुसलमानों का कहना है कि 80 के दशक में मंदिर के निर्माण में मुसलमानों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया था और डासना नगर पंचायत ने भी मंदिर के लिए 6 एकड़ ज़मीन दी थी.

मंदिर के पास स्थित तालाब के बारे में मान्यता है कि उसमें नहाने से चर्म रोग ठीक हो जाता है.
इमेज कैप्शन, मंदिर के पास स्थित तालाब के बारे में मान्यता है कि उसमें नहाने से चर्म रोग ठीक हो जाता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यति नरसिंहानंद सरस्वती के मंदिर का प्रमुख बनने के बाद माहौल बदल गया. पहले उन्होंने दशहरा मेले में मुसलमानों को आने से रोका और फिर मंदिर के बाहर मुसलमानों का प्रवेश वर्जित करने का बोर्ड लगा दिया.

स्थानीय मुसलमानों के मुताबिक़ कुछ साल पहले तक मुसलमान भी मंदिर परिसर में बने तालाब में डुबकी लगाने जाया करते थे. यहां ये मान्यता है कि तालाब के पानी में डुबकी लगाने से बीमारियां ठीक हो जाती हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)