अग्निपथ के ख़िलाफ़ बिहार और राजस्थान में युवाओं का प्रदर्शन

मुजफ्फरपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए छात्र

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केंद्र सरकार ने मंगलवार सेना में भर्ती के लिए 'अग्निपथ योजना' लॉन्च की थी.

इसके तहत 17.5 साल से लेकर 21 साल की उम्र सीमा वाले युवाओं को चार सालों के लिए सेना में काम करने का मौक़ा मिलेगा.

इसके बाद 25 फ़ीसद युवाओं को रिटेन किया जाएगा.

सरल शब्दों में इसका मतलब ये है कि 100 में से 25 लोगों को पूर्णकालिक सेवा का मौक़ा मिलेगा.

लेकिन राजस्थान, बिहार और असम आदि में युवाओं के बीच इस योजना को लेकर असंतोष नज़र आ रहा है.

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अग्निपथ योजना की ख़ास बातें

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  • भर्ती होने की उम्र 17.5 साल से 21 साल के बीच होनी चाहिए
  • शैक्षणिक योग्यता 10वीं या 12वीं पास
  • भर्ती चार सालों के लिए होगी
  • पहले साल की सैलरी प्रति महीने 30 हज़ार रुपये होगी
  • चौथे साल 40 हज़ार रुपये प्रति महीने मिलेंगे
  • चार साल बाद सेवाकाल में प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन होगा और 25 प्रतिशत लोगों को नियमित किया जाएगा
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राजस्थान में युवाओं ने की सड़क जाम

राजस्थान की राजधानी जयपुर में युवाओं ने केंद्र सरकार की इस स्कीम का विरोध करते हुए सड़क और हाइवे जाम कर दिया.

बीबीसी हिंदी के सहयोगी मोहर सिंह मीणा ने बताया है कि सड़क जाम करने वाले युवा लंबे समय से भर्ती नहीं आने की वजह से निराश थे. इसके साथ ही युवा इस स्कीम के तहत मिलने वाली नौकरी की सेवा अवधि से भी असंतुष्ट हैं.

युवाओं की मांग है कि केंद्र सरकार की 'अग्निपथ योजना' को वापस लिया जाना चाहिए. उनका कहना है कि इस योजना से देश सेवा का जज़्बा पाले युवाओं का भविष्य अंधकार में चला जाएगा.

युवाओं का कहना है कि सेना में यदि इस तरह संविदा आधार पर भर्ती की जाएगी तो इससे देश की रक्षा के साथ भी खिलवाड़ होगा.

करधनी पुलिस थाना अध्यक्ष बनवारी लाल मीणा ने बीबीसी से कहा, "सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने सड़क जाम कर दिया था. उनको समझाकर जाम खुलवाया गया है. इस संबंध में न ही कोई गिरफ़्तारी की है और न ही किसी को हिरासत में लिया है."

बक्सर में ट्रेन रोकते युवा

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बिहार में युवाओं के विरोध प्रदर्शन में क्या हुआ?

बीबीसी हिंदी की सहयोगी सीटू तिवारी के मुताबिक़, इस मामले में बिहार की राजधानी पटना से लेकर बेगूसराय, बक्सर और मुज़फ़्फ़रपुर में विरोध प्रदर्शन देखे गए.

इस योजना का विरोध कर रहे तत्वीर सिंह कहते हैं, "दो साल पहले मेडिकल और फ़िज़िकल क्वॉलीफाई कर चुके हैं. एग्जाम को पेंडिंग मे डाल रखा है. दो-तीन बार एडमिट कार्ड जारी हो चुका है, उसके बाद अब एग्जाम रद्द करके चार साल की बहाली ला रहे हैं. पेंशन वगैरह सब बंद कर देंगे जबकि एक नेता तीन पेंशन लेता है."

मुजफ्फरपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए छात्र

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एक अन्य युवा रंजन तिवारी कहते हैं, "इतने लड़के तैयारी कर रहे हैं, कोई वैकेंसी नहीं आ रही है. चारों तरफ़ बहाली पर प्रतिबंध लगा है. बेरोज़गार आदमी सड़क पर नहीं जाएगा तो कहाँ जाएगा."

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस योजना का विरोध करते हुए कहा, "अगर देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं "भारतीय रेलवे और भारतीय सेना" में भी नौकरियाँ ठेके एवं सिविल सेवा में लेटरल एंट्री के नाम पर दी जाने लगेंगीं तो शिक्षित युवा क्या करेंगे? क्या युवा पढ़ाई और चार सालों की संविदा नौकरी, भविष्य में बीजेपी सरकार के पूँजीपति मित्रों के व्यावसायिक ठिकानों की रखवाली के लिए करेंगे? हम बेरोज़गार युवाओं के संघर्ष में साथ है. बेरोज़गारी हटाना हमारा मुख्य उद्देश्य है. जब युवाओं के हाथ में नियमित नौकरी होगी तभी देश ख़ुशहाल होगा."

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असम में भी युवा नाराज़

असम के जोरहाट से बीबीसी के सहयोगी दिलीप शर्मा ने स्थानीय युवाओं से बात करके उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की है.

भारतीय सेना में छोटी अवधि की नियुक्तियों को लेकर 'अग्निपथ' योजना की घोषणा के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे असम के कई युवाओं ने निराशा व्यक्त की है.

देबोजित बोरा

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पिछले दो साल से मरियानी में रहकर सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे 20 साल के देबोजित बोरा ने बीबीसी से कहा, "सेना में भर्ती होने के लिए पिछले दो साल से बहुत मेहनत कर रहा हूं. लेकिन अचानक न्यूज़ में 'अग्निपथ' योजना की घोषणा देखकर थोड़ी निराशा हुई है."

असल में मेरे पिता सीआरपीएफ़ में थे लेकिन उनके निधन के बाद से घर में जो माहौल बना उसके बाद मैंने ठान लिया कि मैं भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करूंगा. मेरे पास अब केवल एक साल का समय बचा है और मैं हर हाल में सेना में भर्ती होने की कोशिश करूंगा.

लेकिन 'अग्निपथ' योजना में केवल चार साल ही काम करने का मौका मिलेगा. इस बारे में सोचकर चिंता हो रही है. अगर मेरा चयन हो जाता है तो चार साल में मुझे नौकरी से रिटायर्ड कर दिया जाएगा, उसके बाद मैं क्या करूंगा.

मेरे साथ कई लड़के बड़ी उम्मीद के साथ ग्राउंड पर मेहनत करने आते हैं लेकिन कल से हम सभी लोग चार साल की नौकरी के बारे में सोचकर परेशान हैं. पिछले दो साल से सेना में कोई भर्ती नहीं निकली थी और अब जो भर्ती आई है उसमें केवल चार साल की नौकरी की बात कही गई है. हम सब चाहते कि सरकार इस बारे में फिर से विचार करें."

माइना हुसैन

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सेना में जाने की तैयारी करने वाले मरियानी के माइना हुसैन भी 'अग्निपथ' योजना के तहत चार साल की सेना की नौकरी के बारे में सुनकर परेशान है.

वे कहते हैं, "मैंने साल 2019 में सेना की जो भर्ती निकली थी उसमें कोशिश की थी लेकिन मेरा चयन नहीं हुआ. लेकिन मैंने हार नहीं मानी और मैं सेना में जाने के लिए लगातार ट्रेनिंग कर रहा हूं. लेकिन 'अग्निपथ' योजना के बारे में सुनकर अच्छा नहीं लगा. एक तो सरकार ने दो साल के बाद सेना में भर्ती निकाली है और अब इस योजना के तहत केवल चार साल की सर्विस होगी."

"हम अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगाना चाहते हैं. परंतु इस तरह की योजना से लग रहा है कि हमें चार साल बाद निकाल दिया जाएगा. केवल मुझे ही नहीं इस बात से सेना में जाने की तैयारी कर रहे काफी युवाओं को निराशा हुई है. हम कल से केवल इसी विषय पर बात कर रहे हैं."

"हमारी सरकार को हमें पूरा मौका देना चाहिए ताकि हम देश के लिए कुछ कर सकें. आप सोचिए 25 साल की उम्र में अगर रिटायर कर दिया जाएगा तो उस युवा के मन में क्या गुज़रेगी जो अपने स्कूली दिनों से भारतीय सेना में जाने का सपना देख रहा है."

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