जामिया मुठभेड़: पुलिस को राहत

बाटला हाउस मुठभेड़
इमेज कैप्शन, मुठभेड़ में कथित तौर पर दो चरमपंथी मारे गए थे

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने विवादास्पद बाटला हाउस मुठभेड़ मामले में दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दे दी है.

पिछले साल 19 सितंबर को दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में हुई मुठभेड़ में दो कथित चरमपंथी और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा मारे गए थे.

पुलिस का कहना था कि मारे गए युवकों के संबंध चरमपंथी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से थे. हालांकि स्थानीय लोगों और कई ग़ैर सरकारी संगठनों ने इस मुठभेड़ को फ़र्ज़ी बताया था.

इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने अपनी जाँच रिपोर्ट बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में पेश कर दी.

हाईकोर्ट ने 21 मई को आयोग से दो महीने के भीतर जाँच पूरी करने के लिए कहा था.

अदालत ने एनजीओ 'एक्ट नाउ फॉर हार्मोनी एंड डेमोक्रेसी' की याचिका पर जाँच का आदेश दिया था. एनजीओ ने मुठभेड़ में पुलिस की भूमिका पर भी संदेह जताया था.

प्रतिक्रिया

सितंबर में दिल्ली में सिलसिलेवार बम धमाकों के ठीक एक हफ़्ते बाद ही ये मुठभेड़ हुई थी. पुलिस का कहना था कि मारे गए युवकों का हाथ इन धमाकों में भी था.

दोनों युवकों की पहचान आतिफ़ अमीन और मोहम्मद साजिद के रुप में की गई थी. बाद में बटला हाउस इलाके से ही दो और संदिग्धों मोहम्मद सैफ़ और जीशान को गिरफ्तार किया गया था.

मुठभेड़ की जाँच के लिए कोर्ट में याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर कहा है, "वे पुलिस को क्लीन चिट कैसे दे सकते हैं. अगर पुलिस को पता था कि वहां आतंकवादी बैठे हुए हैं तो सुरक्षाकर्मी बिना बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहने क्यों गए."

उधर दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा, "इससे न खुशी है न गम. जो भी हुआ वो दुखद था. पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही हम औपचारिक प्रतिक्रिया दे पाएंगे."