केरल में 'तैरता मॉल'

भारत में मॉल तेज़ी से अपने पांव पसार रहा है लेकिन दक्षिणी राज्य केरल में 'तैरता मॉल' लोगों में काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है.
केरल के कु्ट्टनाड के तटीय इलाक़ों में अपनी तरह का यह पहला मॉल है. त्रिवेणी नामक इस सुपरबाज़ार में किराने की दो हज़ार क़िस्म की चीज़ें मिलती हैं जिनमें अनाज, काग़ज़ क़लम और साबुन-तेल सभी शामिल हैं.
इस मॉल में किसी भी समय 20 ग्राहकों और चालक दल के आठ लोगों के लिए जगह होती है. ये मॉल एक बड़ी नाव पर बनाया गया है.
मॉल सुबह आठ बजे निकलता है, विभिन्न तटीय इलाक़ों पर सामान बेचने के बाद रात में इस पर सामान भरने का काम किया जाता है.
अनोखी सेवा
इस अनोखी सेवा की शुरुआत केरल राज्य उपभोक्ता सहकारी महासंघ (केएससीसीएफ़) ने सात जून को की.
ये तैरता मॉल पानी के रास्ते कुट्टनाड के तटीय इलाक़ों से होकर गुज़रता है. पहले यहाँ के वासियों को सामान ख़रीदने के लिए काफ़ी मशक़्क़त करनी पड़ती थी.
इस मॉल की अधिकतर ग्राहक महिलाएं हैं और सामान ख़रीदने के मामले में इनकी निर्भरता पुरुषों पर कम हुई है.
गृहणी यशोदा कहती है, “एक बड़ी नाव जो ज़रूरी सामानों से भरा हुआ है, मेरे दरवाज़े पर आ रही है, यह बहुत ही सुखद विचार है.”
वो कहती हैं, “ग्राहक के बाज़ार जाने के बजाए बड़ा बज़ार ही घर पर आ रहा है. साथ ही बहुत छूट भी मिल रही है.”
'महिलाएं रोमांचित'

मॉल के मैनेजर एके अनूप का कहना हैं, “महिलाएं इससे रोमांचित हैं, यह हम लोगों के लिए एक सुखद अनुभव है, रोज़ाना 30 हज़ार रुपए तक का सामान बिक रहा है. पीछे मुड़कर देखने का मतलब नहीं है.”
केरल राज्य उपभोक्ता सहकारी महासंघ के प्रबंध निदेशक रिजी आर नायर का कहना है, "अगर हम त्रिवेणी को नहीं विकसित करते तो कोट्टानाड के हर द्वीप पर दुकानें खोलनी पड़तीं."
हालाँकि इस तैरते मॉल के शुरू करने से पहले इसकी कामयाबी और दूसरी चीज़ों के लेकर काफ़ी संदेह भी व्यक्त किया जा रहा था.
































