'पहले कर लिया था अलग होने का फ़ैसला'

- Author, सुधींद्र कुलकर्णी
- पदनाम, लालकृष्ण आडवाणी के निकट सहयोगी
मैं वैचारिक मतभेदों के कारण भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा से अलग हो रहा हूँ. मुझे लगा कि अब मैं सार्थक योगदान नहीं दे पाऊँगा इसलिए अपने आपको भाजपा से अलग कर लिया.
इससे आगे और कुछ नहीं कहना चाहता. मैं पार्टी का शुभचिंतक रहा हूँ और रहूँगा क्योंकि ये एक महान पार्टी है.
पार्टी में मतभेद होना स्वाभाविक है. सभी एकराय के नहीं हो सकते. मुझे लगा कि यदि विचारों को प्रकट करने की आज़ादी मुझे चाहिए तो पार्टी से अलग हो जाना चाहिए क्योंकि पार्टी व्यक्ति से बड़ी होती है.
अब मैं एक स्वतंत्र कार्यकर्ता के रूप में सभी पार्टियों के अच्छे लोगों के साथ मिल कर काम करूंगा. ऐसे लोगों के साथ जो सुशासन में विश्वास रखते हैं.
मैं न तो कोई नई पार्टी बनाने जा रहा हूँ और न ही किसी दूसरे दल में शामिल हो रहा हूँ.
पार्टी से निकाले गए नेता जसवंत सिंह का मेरे फ़ैसले से कोई संबंध नहीं है. मैंनें पार्टी नेतृत्व को कई सप्ताह पहले ही इस बारे में बता दिया था.
जहाँ तक टाइमिंग का सवाल है तो ये सिर्फ एक संयोग है. लालकृष्ण आडवाणी भारत के महान नेताओं में से एक हैं और उनके प्रति मेरे मन में भारी सम्मान है.
राजनाथ सिंह, आडवाणी जैसे खेमों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस वक़्त संकट के दौर से गुजर रही है. उम्मीद है कि पार्टी इससे जल्द ही उबर जाएगी.
हालाँकि तमाम बड़े नेता या तो पार्टी से निकाले जा चुके हैं या पार्टी से अलग हो चुके हैं पर पार्टी का भविष्य ठीक है. हज़ारों अच्छे लोग अभी भी पार्टी में है जो भारतीय जनता पार्टी को आगे ले जाएँगें.
(बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से बातचीत पर आधारित)
































