'अपना घर संभाले भाजपा'

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अंदरुनी संकट से संघ का कोई लेना-देना नहीं है.
उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा, "हम सिर्फ़ पार्टी को सलाह दे सकते हैं, वो भी बिन माँगी सलाह नहीं. बाकी क्या फ़ैसला करना है उन पर निर्भर करता है."
सर संघचालक ने भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से हुई मुलाक़ातों का ब्यौरा देने से इनकार करते हुए भरोसा जताया कि भाजपा का संकट ख़त्म हो जाएगा.
उनका कहना था, "चुनावों में बुरी हार के बाद भाजपा को एक झटका लगा है. किसी का ये कहना कि वह कटी पतंग हो गई है, ठीक नहीं है. मुझे लगता है कि पार्टी संतुलित हो जाएगी."
उबरेगी भाजपा
मोहन भागवत का कहना था कि संघ भाजप के संकट से कतई चिंतित नहीं है.
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर वरिष्ठ नेता अरुण शौरी के आरोपों पर उनका कहना था, "वो बहुत वरिष्ठ और आदरणीय हैं. संघ का अपना काम है. अगर पार्टी कोई मदद चाहती है तो हम देंगे."
ग़ौरतलब है कि अरुण शौरी ने ही भाजपा को कटी पतंग बताते हुए पार्टी में व्यापक बदलाव की माँग की थी.
ये पूछे जाने पर कि भाजपा अपने संकट से कैसे उबरेगी, उनका कहना था, "भाजपा में लाखों कार्यकर्ता हैं. इतने नीचे तक काम गया है. एक गाँव में एक व्यक्ति ने हमसे कहा कि भाजपा को आपको बचाना चाहिए. तो अगर गाँव में कोई व्यक्ति आँसू लिए खड़ा है ऐसे संगठन का पतन नहीं हो सकता."
हालाँकि उन्होंने माना कि भाजपा में जो कुछ हो रहा है वो ठीक नहीं है.
जिन्ना प्रकरण
मोहन भागवत ने मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर भाजपा में जारी बहस और अंतर्कलह पर कहा कि संघ की राय जिन्ना के बारे में स्पष्ट है.
उनका कहना था, "सबको पता है कि उन्होंने जिन्ना ने ही डाईरेक्ट एक्शन (सीधी कार्रवाई) का नारा बुलंद किया और कहा कि हिंदू और मुसलमान साथ-साथ नहीं रह सकते. भारतीय इतिहास में उनका यही स्वरुप रहा है और हम यही मानते हैं."
उन्होंने पूर्व सर संघचालक के सुदर्शन के जिन्ना को राष्ट्रवादी कहे जाने पर कहा, "उनके व्यक्तव्य को ग़लत तरीके से पेश किया गया है. जो समझा गया वो उन्होंने नहीं कहा."
जिन्ना पर लिखी जसवंत सिंह की किताब पर उनका कहना था, "मैंने ये किताब नहीं पढ़ी है. जब पढ़ लूंगा तब मैं इस पर कोई राय व्यक्त करूंगा."
































