कांग्रेस-एनसीपी में सत्ता का संघर्ष

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के 10 दिन बाद भी मंत्रिपदों के बँटवारे के मतभेद के कारण कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सत्ता गठित नहीं हो सकी है.
सत्ता में भागीदारी के बारे में अब दोनों सहयोगी दलों के नेता दिल्ली में बातचीत कर रहे हैं और समझा जा रहा है कि ये बातचीत मंगलवार को भी जारी रहेगी.
महाराष्ट्र में पिछली सरकारों में दोनों दलों के बीच मंत्रालयों का आधा-आधा बँटवारा हुआ था मगर इस बार चुनाव में कांग्रेस के पास राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से 20 सीटें अधिक आने के कारण मंत्रालयों को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं.
इस बार 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस को 82 और एनसीपी को 62 सीटें मिली हैं.
एनसीपी इस बात पर ज़ोर दे रही है कि 1999 में पहली बार सरकार बनाने के बाद से ही दोनों दलों के बीच आधे-आधे मंत्रिपद रखने का फ़ॉर्मूला चल रहा है और इस बार भी यही होना चाहिए.
मगर बताया जा रहा है कि कांग्रेस इस बार ना केवल अधिक मंत्रिपद बल्कि महत्वपूर्ण समझे जानेवाले गृह, वित्त और ऊर्जा मंत्रालयों को भी अपने पास रखना चाह रही है.
वैसे गठबंधन के बीच मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के पद को लेकर कोई मतभेद नहीं है.
ऐसी स्थिति में ऐसा भी कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस की ओर से अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री पद की और एनसीपी की ओर से छगन भुजबल उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले लेंगे और मंत्रियों को शपथ बाद मे दिलवाई जाएगी.
वैसे महाराष्ट्र में मंत्रालयों के बँटवारे पर मतभेद के कारण कांग्रेस और एनसीपी की पिछली सरकारों के गठन में भी देर हुई थी.
1999 में परिणाम घोषित होने के 12 दिन बाद और 2004 में परिणाम आने के नौ दिन बाद सरकार गठित हो पाई थी.
































