दूसरी शादी से जा सकती है नौकरी

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पुलिस के एक कर्मचारी लियाक़त अली को पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह करने पर नौकरी से निकालने के सरकार के फैसले को उचित ठहराया है.
अदालत ने इस बारे में लियाक़त अली की विशेष अनुमति याचिका को ख़ारिज कर दिया है.
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट भी सरकार के इस निर्णय को उचित ठहरा चुका है.
अदालत में लियाक़त अली ने कहा कि उन्होंने पहली पत्नी फ़रीदा ख़ातून से मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक़ लेने के बाद मक़सूद ख़ातून से दूसरा निकाह किया था.
लेकिन सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में जाँच समिति ने पाया कि लियाक़त अली ने पहली पत्नी से बिना तलाक़ लिए ही दूसरा विवाह कर लिया और ऐसा करके सरकारी कर्मचारियों के लिए बने नियमों का उल्लंघन किया है.
सरकारी वकील अमित भंडारी ने अदालत को बताया कि राजस्थान सर्विस नियम में कोई कर्मचारी बिना सरकार की अनुमति के दूसरा विवाह नहीं कर सकता.
उनका कहना था कि लियाक़त अली ने पहली पत्नी के रहते हुए दूसरा विवाह कर इन नियमों का उल्लंघन किया है.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस वीएस सिरपुरकर और आफ़ताब आलम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद लियाक़त अली की अनुमति याचिका को ख़ारिज कर दिया.
लियाक़त अली ने इस मामले में एक लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ी, उन्होंने जगह-जगह अपील की मगर सरकारी जाँच समिति ने उनके परिजनों, रिश्तेदारों और पहली पत्नी के घर वालों के बयान लिए और पाया कि लियाक़त अली ने दूसरी शादी करने से पहले फ़रीदा ख़ातून से तलाक़ नहीं लिया था.
लियाक़त अली के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर एक नई बहस छिड़ सकती है.
































