नक्सलियों के ख़िलाफ़ एकीकृत कमान

नक्सली हिंसा से सबसे ज़्यादा प्रभावित चार राज्य नक्सलियों से निपटने के लिए एक एकीकृत कमान के गठन के लिए सहमत हो गए हैं.
एकीकृत कमान के गठन के केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर सहमति जताने वाले राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल हैं.
रा्ज्यों के मुख्य सचिव इस कमान का नेतृत्व करेंगे और इसका उद्देश्य नक्सली या माओवादी हिंसा से निपटने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बल और ख़ुफ़िया तंत्र का साझा और बेहतर इस्तेमाल होगा.
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने राज्यों को और अधिक हेलीकॉप्टर और अन्य साजो सामान उपलब्ध का आश्वासन दिया है.
नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रतिनिधियों की बैठक में ये फ़ैसले लिए गए हैं. ये बैठक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुलाई थी और इसमें गृहमंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी और वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी भी उपस्थित थे.
थानों को सहायता
बैठक के बाद गृहमंत्री पी चिदंबरम ने संवाददाताओं को बताया, "छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल में एकीकृत कमान का गठन किया जाएगा जबकि नक्सल प्रभावित इलाक़ों में आपूर्ति और बचाव कार्यों के लिए और हेलीकॉप्टर तैनात किए जाएंगे."
चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, "चारों राज्य उनके मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एकीकृत कमान बनाने पर सहमत हो गये हैं. सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल इसके सदस्य होंगे."
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों से भी कहा गया है कि यदि वे चाहें तो एकीकृत कमान का गठन कर सकते हैं लेकिन उन्हें लगता है कि फिलहाल नक्सल प्रभावित अन्य राज्यों में एकीकृत कमान की आवश्यकता नहीं है. ये राज्य बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश हैं.
इस समय एकीकृत कमान जम्मू कश्मीर और असम में कार्यरत हैं लेकिन इसमें सेना को भी शामिल किया गया है.
एकीकृत कमान के गठन का फ़ैसला ऐसे समय में किया गया है जब नक्सली हिंसा से निपटने के लिए सेना को तैनात करने की मांग की जा रही है और सरकार ने भी इस मांग पर गंभीरता के साथ विचार करने के बाद सेना तैनात न करने का फ़ैसला किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार बैठक के दौरान नक्सल प्रभावित ज़िलों में 400 पुलिस थानों की स्थापना और सशक्तिकरण के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई है.
इसके तहत हर थाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच 80:20 के अनुपात से दो करोड़ रुपये मुहैया कराया जायेगा जो दो वर्षों के लिए होगा.
विकास पर ज़ोर

बैठक में प्रधानमंत्री ने विकास के कार्यों की ज़रुरत पर बल दिया और कहा कि ज़रुरी है कि नक्सली समस्या से निपटने के लिए राज्य आपसी मतभेद को दूर करें.
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशासन और पुलिस के संदर्भ में आदिवासियों को मुहैया कराई जा रही सेवाएँ दोस्ताना नहीं हैं.
मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, "प्रत्येक राज्य की अपनी समस्याएँ हैं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के मज़बूत और कमजोर पक्ष हैं, इस संदर्भ में राज्यों को ख़ुद क़दम उठाने होंगे."
सिंह ने कहा कि 'वामपंथी चरमपंथ' से निपटने के लिए आपसी मुद्दों को बाधा नहीं बनने देना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें इस समस्या का एकजुट होकर मुकाबला करना है और अपनी रणनीति को अंजाम देना है."
गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि नक्सल प्रभावित राज्यों में विकास से जुडे कार्यक्रमों की एकीकृत योजना तैयार की जा रही है, जिसे 24 जुलाई को होने वाली राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में पेश किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि केन्द्र की ओर से नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए आठ योजनाएं पेश की गयीं थीं और सातों राज्यों ने इन सभी पर अपनी मुहर लगा दी है.
































