अयोध्या में सावन की मनभावन छटा

झूला मेला
इमेज कैप्शन, इन दिनो अयोध्या में सावन झूला मेला की धूम है
    • Author, रामदत्त त्रिपाठी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अयोध्या से.

अयोध्या इन दिनों कुछ अलग ही दिख रही है क्योंकि वहाँ सावन झूला मेला चल रहा है.

अयोध्या में सावन झूला मेले के लिए बिजली की सजावट दूर से ही दिखाई देती है.

आसमान में घने काले बादल छाए हुए हैं. चाँद तारे कुछ भी नही दिख रहे. ऐसा लगता है सारे तारे अयोध्या की इमारतों में आकर सिमट गए हैं.

सरयू पुल से भी बड़ा मोहक दृश्य दिखाई देता है. एक किलोमीटर से ज़्यादा लंबे घाटों के किनारे मंदिरों और खंभों पर लगी बिजली की झिलमिल रौशनी बाढ़ के पानी से उफनाई सरयू के पानी पर प्रतिबिंबित हो रही है.

मंदिरों में झूले

अयोध्या के हर घर में मंदिर है और हर मंदिर में भगवान राम-सीता की मूर्तियां झूला झूल रही हैं. गायक और नर्तक कलाकार मूर्तियों के सामने भक्ति में भाव विभोर होकर भगवान के मोहक रूप का वर्णन कर रहे हैं.

मनीराम छावनी मंदिर में एक ओर महिला साध्वी दल बैठा है तो दूसरी तरफ श्वेत वस्त्रों में मुख्य महंत नृत्य गोपाल दास और उनके साथी.

पैरों में घुंघरू बांधे गायक अभिनय के साथ तुलसीदास की विनय पत्रिका के गीत गा रहा है.

महंत नृत्य गोपाल दास बताते हैं, "सगुण भक्ति मार्ग के राम भक्तों का यह श्रावण झूला मेला आनंद रस से सराबोर करने वाला है. इसमें सारा नृत्य-संगीत सात्विक भाव ही पेश करता है. यहाँ सारे गीत-संगीत परंपरागत होते हैं."

वे कहते हैं, "यह श्रावण झूला उत्सव भगवान की लीलाओं में विशेषकर मधुर रस की उपासना का विशेष उत्सव है. देश विदेश से गायक गीतावली, कवितावली, विनय पत्रिका वगैरह का गान करते हैं, और उसी भाव में विभोर होते हैं, जैसे सतयुग में भगवान राम की लीलाओं का दर्शन कर रहे हों."

श्रद्धालु उमड़े

मंदिर

इस मेले के दौरान हज़ारों की तादाद में श्रद्धालु घूम घूम कर एक मंदिर से दूसरे मंदिर जाते हैं. मेले के लिए आस पास के ज़िलों से लाखों भक्तों का रेला अयोध्या आता है.

यहां कई मंदिरों की झांकियां और हिंडोला सोने-चांदी के बने हैं और उन पर रंग बिरंगे रत्न जड़े हैं. इन भक्तों की भारी भीड़ के चलते अयोध्या की हर गली खचाखच भरी है.

गलियों के किनारे धार्मिक पुस्तकों,पूजा सामग्री,मूर्तियों,माला और प्रसाद आदि की बिक्री ज़ोरों पर है.

मुसलमान भी हुए शामिल

इनमें कई दुकानें मुस्लिम समुदाय के लोगों की भी हैं जो मंदिरों की सजावट, रंगाई- पुताई और मूर्तियां बनाने से लेकर बेचने तक का काम करते हैं.

ये लोग भक्तों को टैक्सियों में घुमाने का काम भी करते हैं.

सावन झूला मेला बारह दिन चलता है जो पूर्णमासी के दिन, यानि इस बार 24 अगस्त को समाप्त हो जाएगा.

भक्तों की इसी भीड़ के बीच से एक हाथ में राइफल, दूसरे हाथ में टिफिन और कंधे पर बुलेट प्रूफ जैकेट लिए अर्द्ध सैनिक बलों के जवान गुज़रते हैं, जो यहाँ विवादित राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद परिसर की सुरक्षा के लिए तैनात हैं.

यह सुरक्षा आने वाले दिनों में और बढ़ने वाली है , क्योंकि अगले महीने साठ साल से चल रहे मुक़दमे में हाईकोर्ट का फैसला आने वाला है.

लोगों को डर है कि हिंदुओं और मुसलमानों की भावनाओं से जुड़े इस मामले में अदालत का फै़सला आते ही दुनिया का फ़ोकस अयोध्या पर आ जाएगा.

इसलिए दोनों समुदायों के स्थानीय लोग इस कोशिश में लगे हैं कि फ़ैसला जो भी आए, अयोध्या की शांति और सद्भाव पर असर न पड़े.