उल्फ़ा नेता राजखोवा रिहा

अरबिंद राजखोवा
इमेज कैप्शन, उल्फ़ा अब सरकार से बातचीत की तैयारी कर रही है

उल्फ़ा के अध्यक्ष अरबिंद राजखोवा को शनिवार को गुवाहाटी की जेल से रिहा कर दिया गया.

अपनी रिहाई के तुरंत बाद राजखोवा ने कहा कि वे चाहते हैं कि बंग्लादेश में बंदी अन्य उल्फ़ा नेताओं को भी रिहा किया जाए.

अरबिंद राजखोवा ने कहा, "असम की जनता शांति चाहती है और हम भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं."

सरकार के मुख्य वार्ताकार पीसी हलदार उल्फ़ा नेतृत्व से बातचीत करेंगे.

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने आशा व्यक्त की है कि उल्फ़ा के सभी नेता बातचीत के लिए तैयार होंगे और असम के लिए नया साल शांति ले कर आएगा.

मतभेद

उल्फ़ा के सैन्य प्रमुख परेश बरुआ अभी भी भारत सरकार से बातचीत के लिए तैयार नहीं है.

उल्फ़ा के महासचिव अनूप चेटिया भी बांग्लादेश में जेल में है.

राजखोवा को बांग्लादेश में सुरक्षाबलों मे गिरफ्तार किया था और भारत को सौंपा था.

उनके साथ उल्फ़ा के डिप्टी कमांडर राजू बरुआ को भी बांग्लादेश सुरक्षा बलों से गिरफ्तार किया था.

उनकी ज़मानत की सुनवाई तीन बार टालने के बाद विशेष टाडा अदालत ने गुरुवार को ज़मानत को मंज़ूरी दे दी थी. अदालत ने असम के गृह और राजनीतिक विभागों से रिपोर्टे मंगवाई थी जिसके बाद उनकी ज़मानत हुई.

सरकार ने उनकी ज़मानत याचिका का विरोध नहीं किया.

राजखोवा पर राजद्रोह का आरोप है.

विश्लेषकों का कहना है कि सरकार उल्फ़ा के साथ शांति वार्ताएं करना चाहती है इसलिए उसने राजखोवा की रिहाई का विरोध नहीं किया. उल्फ़ा तीस साल से एक भारत से स्वतंत्रता की मांग को लेकर भारतीय प्रशासन से लड़ रहा है और उसका आरोप है कि भारत सरकार असम की प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रही है और वहां की जनता के उत्थान के लिए कुछ नहीं कर रही है.