हिन्दू राष्ट्रवाद:भाजपा के लिए 'अवसरवाद'

अंग्रेज़ी अख़बार हिंदू में छपे विकीलीक्स के ताज़ा दस्तावेज़ो के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली मानते हैं कि हिंदू राष्ट्रवाद उनकी पार्टी के लिए अवसरवादिता का मुद्दा है.
हालांकि अरूण जेटली ने इसपर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी बातचीत में अवसरवादिता शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था.
भाजपा ने कहा है कि हो सकता है कि इस शब्द का इस्तेमाल अमरीकी राजनयिक ने किया हो.
विकीलीक्स के मुताबिक जेटली ने ये बयान अमरीका के दिल्ली दूतावास के कुछ अधिकारियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान कहा था.
लेख में ये भी कहा गया है कि पार्टी नेता ने ये भी कहा था कि “हिन्दू राष्ट्रवाद भारतीय जनता पार्टी के हमेशा एक मुद्दा बना रहेगा.”
ये दस्तावेज़ छह मई 2005 को अरुण जेटली की अमरीकी राजनयिक रॉबर्ट ब्लेक के साथ को हुई बातचीत पर आधारित है.
दस्तावेज़ के मुताबिक़ अरुण जेटली ने इस संबंध में उहादरण भी दिए थे जिसमें उन्होंने कहा था कि “उदाहरण के तौर पर पूर्वोत्तर भारत में हिन्दूत्व का मुद्दा काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योकि वहाँ के लोग बांग्लादेशी मुसलमान घूसपैठियों को लेकर चिंतित हैं.”
अरुण जेटली ने माना कि भारत-पाक के सुधरे रिश्तों की बदौलत हिन्दू राष्ट्रवाद का मूद्दा कुछ धीमा पड़ा है लेकिन साथ ही उनका कहना था कि ये स्थिति सीमा पार से एक आतंकवादी हमले के साथ ही बदल सकती है.
अरुण जेटली से बातचीत के बाद अमरीकी राजनयिक रॉबर्ट ब्लेक अपने आंकलन मे लिखते है, “इससे लगता है कि जेटली के आर एस एस के साथ संबंध बहुत गहरे नहीं हैं और उनके लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को संगठित कर पाना आसान नहीं होगा.”
अरुण जेटली ने बड़े शांत स्वभाव से कहा कि लाल कृष्ण आड़वाणी अगले दो-तीन साल तक पार्टी का नेतृत्व करेगें और उसके बाद अगली पीढी के पाँच नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा शुरू होगी.
माना जाता है कि पार्टी के इन नए नेताओं में एक वो ख़ुद भी हैं.
नरेन्द्र मोदी को अमरीकी वीज़ा ना दिए जाने के मुद्दे पर शिकायत करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि जिस पार्टी ने अमरीका- भारत के रिश्ते को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाई उसके एक नेता के खिलाफ़ अमरीका का रवैया उनकी समझ से परे है.
जब रोबर्ट ब्लेक ने इस फ़ैसले के पीछे की वजहो और क़ानूनी तर्कों का हवाला दिया तो अरुण जेटली ने माना कि नरेन्द्र मोदी की छवि ध्रुर्वीकरण करने वाली है.
अरुण जेटली की सलाह थी कि नरेन्द्र मोदी को वीज़ा दे दिया जाना चाहिए था. ऐसा करने पर कुछ लोग अमरीका में नरेन्द्र मोदी का विरोध करते और बात खत्म हो जाती.
इस संदेश के अंत में आंकलन करते हुए राबर्ट ब्लेक लिखते है “अरुण जेटली नरेन्द्र मोदी को वीज़ा ना दिए जाने से आहत है लेकिन उन्होंने काफ़ी खुले मन से बातचीत की. वो अमरीका के साथ व्यापारिक और निजी रिश्तों का सम्मान करते हैं. आगे जैसे भी भाजपा में नेतृत्व के लिए होड़ होगी तो अरुण जेटली के टेलीवीज़न पर सुंदर दिखनेवाले चेहरे और दिल्ली की राजनीति पर मज़बूत पकड़ का उन्हें फायदा होगा.”
































