राज्यपाल ने भेजी 'विशेष रिपोर्ट'

कर्नाटक राज भवन से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि 16 विधायकों की अयोग्यता पर 13 मई के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को देखते हुए स्थिति की समीक्षा के बाद राज्यपाल की ओर से केंद्र को एक विशेष रिपोर्ट भेजी गई है.
ऐसा माना जा रहा है कि राज्यपाल ने केंद्र को भेजी इस विशेष रिपोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफ़ारिश की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस रिपोर्ट में राज्यपाल ने कहा है कि राज्य में संवैधानिक संकट है और मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने वोटिंग के दौरान संवैधानिक अधिकार का दुरुपयोग किया था.
जानकारों का मानना है कि राज्यपाल हंसराज भारद्वाज की राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफ़ारिश के साथ कर्नाटक का राजनीतिक संकट और गहरा जाएगा.
महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई को अपने फ़ैसले में भाजपा के 11 बागी और पांच निर्दलीय विधायकों को अयोग्य करार देने के विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपैया के फैसले को निरस्त कर दिया था.
राज्यपाल राजनीति न करें

इस सारे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने देर रात अपने घर पर संवाददाताओं से कहा कि सदन में उनकी सरकार को पूर्ण बहुमत हासिल है और राज्यपाल राजनीति कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होनें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर कहा है कि वो राज्यपाल की रिपोर्ट को स्वीकार न करें.
उधर, दिल्ली में भाजपा नेता अरूण जेटली ने राज्यपाल की विशेष रिपोर्ट को असंवैधानिक करार दिया.
उन्होने दावा किया कि बाग़ी विधायकों की पार्टी में वापसी के साथ ही सरकार को 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 121 विधायकों का समर्थन हासिल है.
सरकार पर संकट टला
इससे पहले, कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 11 बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को समर्थन देने की घोषणा की जिससे लग रहा था कि उनकी सरकार पर मंडरा रहा ख़तरा समाप्त हो गया था.
ये 11 विधायक उन 16 विधायकों में शामिल हैं जिनकी सदस्यता समाप्त करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने 13 मई को रद्द कर दिया था.
इन विधायकों ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को पत्र लिखकर येदियुरप्पा को समर्थन देने की इच्छा जताई .
राज्यपाल को लिखे पत्र में इन विधायकों ने कहा कि वो भाजपा में बने रहेंगे और येदियुरप्पा को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं.
दूसरा मौका
ये दूसरा मौका है जब राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की है.
पिछले साल अक्टूबर में भाजपा के 11 बागी और पांच निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस लिया था, तब भी हंसराज भारद्वाज ने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी.
हालांकि उस समय केन्द्र ने राज्यपाल की रिपोर्ट को ठुकरा कर सरकार से सदन में बहुमत साबित करने को कहा था.
































