येदियुरप्पा इस्तीफ़ा दें: कांग्रेस, सीपीएम

यदियुरप्पा सरकार विवादों में घिरी हुई है
इमेज कैप्शन, यदियुरप्पा सरकार विवादों में घिरी हुई है

कर्नाटक के राज्यपाल को वापस बुलाने की भारतीय जनता पार्टी की मांग के बाद पलटवार करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि 'कर्नाटक में भाजपा आपत्तिजनक तरीके से बनाई गई बहुमत के आधार पर अवैध सरकार चला रही है.'

पिछले साल अक्तूबर में कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के विश्वास मत हासिल करने के समय मतदान से पहले सोलह विधायकों को मतदान के अयोग्य ठहराया गया था. इसी मामले में हाल में सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत ठहराया था.

इसके बाद राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजी थी और माना जाता है कि इसमें राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफ़ारिश की गई है.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के कुछ अंश पढ़कर सुनाते हुए सोमवार को कांग्रेस प्रवक्ता मुनीष तिवारी ने भाजपा पर तीखे प्रहार किए हैं.

उन्होंने कहा, "जो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, उसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर को एक क्षण भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.भाजपा एक अवैध सरकार चला रही है..."

उधर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी कहा है कि इस फ़ैसले से विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए अपनाए गए ग़ैर-क़ानूनी और राजनीतिक जोड़तोड़ के तरीके स्पष्ट हो गए हैं. पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत, "येदियुरप्पा सरकार को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."

इस तरह से कर्नाटक में राजनीतिक संकट गहरा गया है.

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज की ओर से केंद्र को भेजी रिपोर्ट को अलोकतांत्रिक बताया था और राज्यपाल को वापस बुलाने की मांग की थी.

मुख्यमंत्री यदियुरप्पा कह चुके हैं कि वे सभी भाजपा विधायकों, सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमत्री मनमोहन सिंह से दिल्ली में मिलेंगे.

क्या है मुद्दा?

ये मामला पिछले साल अक्तूबर में कर्नाटक में भाजपा की सरकार के विश्वास मत से संबंधित है. विश्वास मत से पहले ही विधानसभा स्पीकर ने भाजपा के 11 विधायकों और पाँच निर्दलीय विधायकों को मतदान के आयोग्य ठहराया था.

इस घटना के बाद हुए विश्वास मत में भाजपा ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया था. उधर मतदान के लिए अयोग्य ठहराए गए विधायकों का मामला हाई कोर्ट में चला गया था जिसने स्पीकर के फ़ैसले को उचित ठहराया था.

लेकिन हाल में सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत ठहराते हुए इन विधायकों की सदस्यता और मतदान में भाग लेने की योग्यता को बरक़रार रखा था.

इसके बाद राज्यपाल ने केंद्र को रिपोर्ट भेजी और वर्तमान घटनाक्रम शुरु हो गया.

'पद पर बने रहने के लायक नहीं'

सोमवार सुबह भाजपा नेता अरुण जेटली ने राज्यपाल की आलोचना करते हुए कहा, "भाजपा के उन 11 विधायकों ने पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की है. इस तरह से भाजपा सरकार को 121 विधायकों का समर्थन हासिल है. तर्कसंगत ये होता कि राज्यपाल भाजपा मुख्यमंत्री से सदन के पटल पर बहुमत साबित करने को कहते."

उधर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा, "ये लोकतंत्र और संविधान को कलंकित करने वाली बात है. जिन विधायकों को बहाल किया गया है वे भाजपा के साथ हैं. बहुमत हमारे साथ है. ये राज्यपाल नहीं कर रहे बल्कि कांग्रेस और यूपीए सरकार के इशारे पर राज्यपाल से कराया जा रहा है. वे अपने पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं."

कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने राज्पाल की विशेष रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि वे 'लोकतंत्र की हत्या बर्दाश्त नहीं करेंगे.'

उनका कहना था, ''दिल्ली में बैठे कांग्रेस के आका राज्यपाल का इस्तेमाल कर के संविधान विरोधी कार्रवाई कर रहे हैं. मैं लोकतंत्र की हत्या बर्दाश्त नहीं करुंगा.''

उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हुई है.