छत्तीसगढ़: नौ पुलिसकर्मियों के शव मिले

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता,रायपुर
छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले में हुए एक माओवादी हमले में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित 10 पुलिसकर्मी मारे गए हैं. यह घटना गरियाबंद इलाक़े के आममोरा की है जो उड़ीसा की सीमा पर घने जंगल में स्थित है.
गरियाबंद के पुलिस प्रमुख कमल लोचन कश्यप का कहना है, "पुलिस दल माओवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में फँस गया. पहले से छिपे बैठे नक्सलियों नें चारों तरफ़ से पुलिसकर्मियों को घेर कर गोलियां चलानी शुरु कर दीं...मारे गए दस पुलिसकर्मियों में से नौ के शव बरामद कर लिए गए हैं. एक पुलिसकर्मी के शव का अभी तक कोई अता पता नहीं है."
पुलिस अधीक्षक कमल लोचन के अनुसार लाशों को देखकर ऐसा लगता है कि गोलियों से मारने के बाद माओवादियों नें पुलिसकर्मियों के शवों पर कुल्हाड़ियों से भी वार किया है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के साथ इस दल में तीन एसपीओ यानी विशेष पुलिस अधिकारी भी थे.
खोज सुबह ही शुरु हो पाई
इससे पहले सोमवार की सुबह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में निकले पुलिस के इस छापामार दल का कई घंटों तक कोई सुराग नहीं मिला था और पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मचा हुआ था. यह दल गरियाबंद इलाक़े के जंगलों में गश्त पर निकला हुआ था. गरियाबंद पुलिस ज़िले के अधीक्षक कहना है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश पवार के नेतृत्व में 10 पुलिसकर्मियों का दल सोमवार सुबह ही सोनाबेड़ा के लिए रवाना हुआ था. दोपहर होते होते ज़िला मुख्यालय से इस दल का संपर्क टूट गया. आशंका व्यक्त की जा रही है ये वही समय था जब माओवादियों नें छापामार दल पर हमला किया होगा. यह इलाक़ा उड़ीसा की सीमा से लगा हुआ बताया जाता है जो घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है. ऐसी खबरें थीं की माओवादियों नें इस इलाके में अपना बड़ा 'बेस कंप' बना रखा है.
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस इलाक़े के एक बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगों का जाल बिछा हुआ है. ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि केवल दस जवान इस ख़तरनाक इलाक़े में गश्त करने क्यों गए थे जबकि नक्सली अभियान के तहत इन इलाक़े में बिना पर्याप्त बलों के नहीं जाया जाता है.
देर रात राजधानी रायपुर से पुलिस महानिरीक्षक राकेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को रात में ही गरियाबंद भेजा गया लेकिन ये इलाक़ा इतना दुर्गम है कि शवों को ढूँढने की कार्रवाई सुबह में ही शुरु हो पाई.




























