डरे हुए हैं कोया कमांडो

छत्तीसगढ़ में कोया कमांडो नाम से मशहूर एसपीओ यानि विशेष पुलिस अधिकारियों ने माओवादियों से अपनी और अपने परिवार की जान को ख़तरा बताया है.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने माओवादियों से मुकाबला कर रहे विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति को असवैंधानिक क़रार दे दिया था. अदालत ने सरकार से इन अधिकारियों के हथियार और गोलाबारूद भी वापस लेने को कहा था.
अदालत का कहना था कि कम पढ़े-लिखे, बिना सही प्रशिक्षण और हथियार के माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान में लगाए गए जनजातीय युवकों के इस्तेमाल को रोका जाना चाहिए क्योंकि ये संविधान के प्रावधानों के ख़िलाफ़ है.
हथियार सौंपने के बाद डर
कोया कमांडो के नाम से मशहूर विशेष पुलिस अधिकारी के दंतेवाड़ा ज़िला ईकाई के एक प्रमुख ने बीबीसी संवाददाता सुबोजीत बागची से एक ख़ास बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद उनके साथियों ने अपने हथियार सरकार को सौंप दिए हैं लेकिन ऐसा करने के बाद वे काफ़ी डरे हुए हैं.
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फ़ैसले के अनुसार इस समय छत्तीसगढ़ में कुल 6500 विशेष पुलिस अधिकारी या कोया कमांडो हैं.
दंतेवाड़ा ज़िले के एक समूह के प्रमुख ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''हमारे सभी साथियों ने अपने हथियार जमा करा दिए हैं.हमारे पास अब हथियार नहीं है. हमलोगों पर कभी भी कुछ भी हो सकता है. हमलोग माओवादियो के निशाने पर हैं.''
कोया कमांडो प्रमुख ने कहा कि माओवादियों से भी हथियार वापस करने को कहा जाए तभी वे शांति वार्ता के लिए तैयार होंगे.
उन्होंने कहा कि अगर सरकार कोया कमांडो को सैन्य बल के अलावा दूसरी कोई नौकरी भी देगी तब पर भी उनकी जान सुरक्षित नहीं रहेगी.
'किसी आम आदमी को नहीं मारा'
कोया कमांडो प्रमुख का कहना है कि राज्य पुलिस उन लोगों को सुरक्षा दे रही है लेकिन उनके अनुसार राज्य पुलिस इतने लोगों को कैसे और कब तक सुरक्षा प्रदान कर सकेगी.
उनके अनुसार वे लोग अपने कैंपों में रह रहें हैं और बाहर निकलने में डर रहे हैं.
उन्होंने दावा किया कि माओवादी उनलोगों के नाम से डरते थे इसलिए माओवादियों ने मानवाधिकार संगठनों का सहारा लिया.
उन्होंने ये भी दावा किया कि उनके संगठन ने कभी किसी आम आदमी को नही मारा है.
उनके अनुसार कोया कमांडो ने केवल माओवादियों या फिर उनसे ज़ुड़े हुए और उनका साथ देने वालों को ही मारा है.
































