सरकार पर 'लोकतंत्र की हत्या' का आरोप

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अन्ना हज़ारे की टीम का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने उनसे कहा है वो पहले ये वचन दें कि जेपी पार्क में वे अपना अनशन ढाई दिनों में ख़त्म कर देंगे.
इसके अलावा पुलिस ने अन्ना हज़ारे की टीम के सामने 22 और शर्तें रखी हैं और कहा है कि इनका पालन होने पर ही वे जेपी पार्क में अनशन कर सकेंगे.
दिल्ली पुलिस के इस रवैये पर अब अन्ना की टीम विचार कर रही है. हालांकि अन्ना हज़ारे के सहयोगी और वकील प्रशांत भूषण ने दिल्ली पुलिस के रवैये को 'असंवैधानिक' बताया है.
जबकि अन्ना हज़ारे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सिर्फ़ तीन दिनों के लिए जेपी पार्क दिए जाने के दिल्ली पुलिस के फ़ैसले पर नाराज़गी व्यक्त की है और कहा है कि सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों को कुचल रही है और लोकतंत्र की हत्या कर रही है.
उल्लेखनीय है कि अन्ना हज़ारे ने संसद में सरकार की ओर से पेश किए गए लोकपाल विधेयक के ख़िलाफ़ आमरण अनशन करने की घोषणा की है.
अनशन के लिए अन्ना हज़ारे की टीम ने जिन जगहों की मांग की थी, दिल्ली पुलिस ने उन्हें देने से मना कर दिया था.
अन्ना ने अनशन के लिए पहले जंतर-मंतर में जगह देने की अनुमति मांगी थी, लेकिन दिल्ली पुलिस के मना करने पर उन्होंने चार नई जगहों – राजघाट, बोट क्लब, रामलीला मैदान औऱ शहीद पार्क – में जगह देने का प्रस्ताव किया था. लेकिन पुलिस ने इन अर्जियों को भी विभिन्न कारण देते हुए रद्द कर दिया था.
अन्ना ने शनिवार को लिखे अपने पत्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उन्हें दिल्ली में किसी और जगह को दिलाने की दरख़्वास्त की. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जेपी पार्क का सुझाव दिया था जिसे टीम अन्ना ने स्वीकार कर लिया था.
लेकिन अब दिल्ली पुलिस ने समय सीमा तय कर दी और ढेर सारी शर्तें रख दी हैं.
'किस मुंह से झंडा फ़हराएँगे'
अन्ना ने कहा, “क्या भारत का प्रधानमंत्री दिल्ली के बीच अनशन के लिए हमें कोई जगह दिला सकता है? आज यह सवाल मैं आपके सामने खड़ा करता हूँ? आपकी उम्र 79 साल की है. देश के सर्वोच्च पद पर आप आसीन हैं. ज़िंदगी ने आपको सब कुछ दिया है. अब आपको क्या चाहिए. हिम्मत कीजिए और कुछ ठोस कदम उठाईए.”
अन्ना ने कहा, “बड़े खेद की बात है कि आपके इन गलत कदमों की वजह से ही अमेरिका को हमारे लोकतंत्र के आंतरिक मामलों में दखल देने की हिम्मत हुई. भारत अपने जनतांत्रिक मूल्यों की वजह से जाना जाता रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज उन मूल्यों को ठेस पहुँची है.”
अन्ना ने आगे कहा, “हम आपको संविधान की आहृति नहीं देने देंगे. हम आपको लोकतंत्र का गला नहीं घोंटने देंगे. यह हमारा भारत है. इस देश के लोगों का भारत. आपकी सरकार तो आज है. कल हो न हो.”
उन्होंने लिखा है, "मैं सोच रहा हूँ 65वें स्वतंत्रता दिवस पर आप क्या मुँह लेकर लाल क़िले पर ध्वज फ़हराएँगे."
अन्ना ने कड़े लहज़े में कहा, “क्या इन सबसे तानाशाह की गंध नहीं आती? संविधान के परखच्चे उड़ाकर, जनतंत्र की हत्या कर, जनता के मौलिक अधिकारों को रौंदना क्या आपको शोभा देता है?”
टीम अन्ना हज़ारे की मांग है कि सरकार जनलोकपाल बिल के तमाम प्रावधानों को डालकर “एक सख्त और स्वतंत्र लोकपाल बिल” संसद में लाए.
अन्ना लोकपाल बिल में प्रधानमंत्री को और न्यायपालिका के वरिष्ठ जजों को जाँच के दायरे में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा भी उनकी कई और मांगे हैं.
































