अन्ना पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

भाजपा नेता

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इमेज कैप्शन, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने मनमोहन सिंह की आलोचना की

अन्ना हज़ारे के मामले पर संसद में दिए बयान पर विपक्षी पार्टियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

राज्य सभा ने जहाँ अरुण जेटली ने मोर्चा संभाला तो लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मनमोहन सिंह के बयान को ख़ारिज कर दिया.

अपने लंबे और विस्तृत भाषण में अरुण जेटली ने एक-एक करके प्रधानमंत्री के बयान पर चोट की और कहा कि सरकार पर से लोगों का भरोसा उठ गया है.

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री के बयान से निराश हैं. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने में लगी है.

अरुण जेटली ने कहा, "देश के लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. इसलिए देश का युवा सड़कों पर उतर आया है."

उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या आपकी सरकार के पास भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति है? उन्होंने कहा कि सत्ता के मद में चूर सरकार भ्रष्टाचार से नहीं लड़ सकती.

ग़लत शर्त

अरुण जेटली ने कहा कि देश की जनता को प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकार ने उसे कुचलने का काम किया है.

उन्होंने सरकारी लोकपाल की भी आलोचना की और कहा कि सरकारी लोकपाल विधेयक सरकार नियंत्रित है.

अरुण जेटली ने कहा कि अन्ना हज़ारे के अनशन पर जो शर्तें लगाई गईं थी, वो ग़लत थी.

बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि अन्ना हज़ारे की गिरफ़्तारी को किसी भी तरह जायज़ नही ठहराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि लोकपाल पर बनी स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष रोज़ाना टीवी चैनलों पर अन्ना और उनके सहयोगियों के ख़िलाफ़ बयान देते रहते हैं तो फिर स्टैंडिंग कमेटी में लोकपाल पर निष्पक्ष तरीक़े से विचार विमर्श कैसे हो सकता है.

भाजपा के राम जेठमलानी ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि काश प्रधानमंत्री ने सुबह अख़बार पढ़ा होता. जेठमलानी के अनुसार सरकार को पता ही नहीं है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हवा किस ओर बह रही है.

शिरोमणि अकाली दल के एसएस ढ़ींडसा ने कहा लोग इसलिए सड़कों पर हैं क्योंकि स्वतंत्र भारत में सबसे ज़्यादा स्कैंडल इसी सरकार के कार्यकाल में हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रवैया नहीं अपनाया होता तो आज कोई भी मंत्री या अधिकारी जेल में नहीं होता.

सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामबिलास पासवान ने कहा कि अन्ना की तुलना जयप्रकाश नारायण से नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि दस सदस्यों वाले लोकपाल ड्राफ़्टिंग कमेटी में एक भी अनुसूचित जाति का क्यों नहीं था.

दूसरी ओर लोकसभा में भारी शोर-शराबे के बीच विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सरकार पर आरोप लगया कि वो असंतुलित व्यवहार कर रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने संसदीय प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का काम किया है. सुषमा ने पूछा कि अन्ना की टीम से बात करने की पहल किसने की.

सुषमा स्वराज ने कहा, " सरकार कहती है कि वो नागरिक अधिकारों के रक्षक हैं. लेकिन इससे ज़्यादा असत्य क्या हो सकता है. चार जून की रात को स्वामी रामदेव के समर्थकों पर सोते हुए लोगों पर लाठियाँ चलाईं गई, और आप कहते हैं कि आप नागरिक अधिकारों के रक्षक हैं."

सुषमा स्वराज ने कहा कि ये सरकार भ्रष्टाचारी और अत्याचारी है. उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को असत्य का पुलिंदा बताया.

जनता दल(यू) के अध्यक्ष शरद यादव ने गृह मंत्री पी चिदंबरम पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा गृह मंत्री नहीं देखा जो हर चीज़ के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार ठहरा दे. शरद यादव ने सवाल उठाया कि अगर सारे फ़ैसले पुलिस को ही लेने हैं तो फिर गृह मंत्री बैठे हुए क्या कर रहें हैं.