ये है तीसरा लोकपाल...

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लोकपाल की लड़ाई में अब तीसरा पक्ष भी सक्रिय हो गया है. इस तीसरे पक्ष का कहना है कि अन्ना हज़ारे के जन लोकपाल बिल और सरकारी लोकपाल बिल दोनों में कमियां हैं.

नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्‍स राइट फॉर इन्‍फॉर्मेशन के मंच तले तीसरे लोकपाल बिल को लाई हैं देश की मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा राय, जिन्हें भारत में सूचना के अधिकार आंदोलन में अभिन्न योगदान के लिए जाना जाता है.

<link type="page"><caption> 'दोनों बिलों में कमियां हैं'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2011/08/110818_anjali_hardwaj_akd.shtml" platform="highweb"/></link>

अरुणा राय ने न्यायाधीश एपी शाह, पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर समेत कई सहयोगियों के साथ मिल कर राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण लोकपाल का जो प्रारूप तैयार किया है इसमें पांच लोकपाल का प्रावधान है.

अरूणा के पाँच लोकपाल

राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण लोकपाल- इसके दायरे में प्रधानमंत्री को कुछ शर्तो के साथ लाया जाए. प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलाने का फैसला लोकपाल की पूर्ण पीठ करे और सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ अनुमोदन करे. सांसद और वरिष्ठ मंत्री लोकपाल के दायरे में रहें.

पृथक न्यायपालिका लोकपाल- न्यायपालिका के लिए अलग से.

केंद्रीय सतर्कता लोकपाल- दूसरी व तीसरी श्रेणी के अफसरों के भ्रष्टाचार के लिए सतर्कता आयोग को ही और अधिक ताकतवर बनाया जाए.

लोकरक्षक कानून लोकपाल- भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोगों की सुरक्षा मुहैया कराने के लिए.

शिकायत निवारण लोकपाल-जन शिकायतों के जल्द निपटारे लिए है.

मतभेद

अरूणा राय की टीम ने जो लोकपाल बिल तैयार किया है इसमें प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की बात तो है लेकिन उनका मसौदा न्यायपालिका को इस दायरे में रखने के समर्थन नहीं करता है.

जबकि अन्ना के जनलोकपाल बिल में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका दोनों को दायरे में रखने की बात कही गयी है जबकि सरकारी बिल प्रधानमंत्री और न्यायपालिका दोनों का विरोध कर रहा है.

अरूणा ने कहा है कि प्रधानमंत्री को कुछ शर्तो के साथ लोकपाल में होना चाहिए लेकिन उसकी भी होनी चाहिए.

टीम अन्ना चाहती है कि लोकपाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले को देखे जबकि एनसीपीआरआई का मानना कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के मामलों को लोकायुक्त देखे. इसी तरह टीम अन्ना का मानना है कि शिकायतों को सुनने के लिए लोकपाल के अधीन एक अधिकारी होना चाहिए जबकि एनसीपीआरआई एक अलग शिकायत निवारण तंत्र चाहता है.

शक्तियों का विकेंद्रीकरण

प्रशांत भूषण

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इमेज कैप्शन, प्रशांत भूषण ने कहा है कि अरूणा राय के साथ उनकी टीम के मतभेद ज़रूर हैं, लेकिन ये बहुत मामूली हैं.

एनसीपीआरआई ने टीम अन्ना के जन लोकपाल बिल को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि पटवारी से लेकर प्रधानमंत्री सबको लोकपाल के दायरे में लाने से सारी शक्तियां एक संस्था में निहित हो जाएंगी इससे शक्तियों का विकेंद्रीकरण नही हो पाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था मे ऐसा नहीं होना चाहिए.

अन्ना टीम के सदस्य प्रशांत भूषण का कहना है कि एनसीपीआरआई की अरूणा राय के साथ उनके कुछ मतभेद ज़रूर हैं, लेकिन ये बहुत मामूली हैं.

अरूणा राय का कहना है कि वो संसद की स्थाई समिति के पास अपने विधेयक का मसौदा रखेंगी. समिति को तीनों मसौदों को मिलाकर एक नया ड्राफ्ट बना देना चाहिए ताकि जो भी कानून बनें वो स्पष्ट और सही हो.

महत्वपूर्ण है स्‍थायी संसदीय समिति ने लोकसभा में पेश हो चुके लोकपाल बिल पर बाकायदा अख़बारों में विज्ञापन जारी कर सभी को अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया है.

अरूणा राय ने कहा है कि उन्होंने सूचना के अधिकार क़ानून यानि आरटीआई एक्ट के दौरान भी स्टैडिंग कमेटी में बहुत सारे परिवर्तन कराये थे.