हमले ध्यान भटकाने के लिए: केजरीवाल

इमेज स्रोत, BBC World Service
टीम अन्ना के प्रमुख सदस्यों में से एक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दो दिनों से टीम अन्ना के सदस्यों पर होने वाले हमलों के पीछे कोई साज़िश है.
उन्होंने कहा है, "ऐसा लगता है कि इन हमलों के पीछे प्रशांत का कश्मीर वाला बयान शायद नहीं है, ऐसा लगता है कि जो भ्रष्टाचार कर रहे हैं वो ताक़तें इकट्ठी हो गई हैं. यह उनकी ही साज़िश है."
उनका कहना है कि अभी ये कहना संभव नहीं है कि इन हमलों के पीछे कौन है लेकिन घटनाक्रम से साफ़ दिखता है कि ये हमले पूर्व नियोजित थे और मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए किए गए हैं.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हालांकि टीम अन्ना मानती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन प्रशांत भूषण को कोर कमेटी से निकाले जाने की बातें ग़लत हैं.
हालांकि इससे पहले अन्ना हज़ारे ने टीम अन्ना को प्रशांत भूषण के कश्मीर संबंधी बयान से अलग कर लिया था और कहा है कि वे व्यक्तिगत तौर पर मानते हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.
सवाल
अरविंद केजरीवाल का कहना है कि गुरुवार को हुए हमलों के बाद पुलिस जिस तरह से मूक दर्शक बनी रही उससे भी सवाल उठता है कि वह उनकी अपनी ग़लती थी या उन्हें ऊपर से आदेश थे कि कोई कार्रवाई नहीं करनी है.
उन्होंने कहा कि पुलिस को इसका जवाब देना होगा.
केजरीवाल का कहना है कि जो लोग आए थे वे बाक़ायदा बसों पर सवार होकर आए थे, तो उन्हें किसने भेजा था.
बुधवार को प्रशांत भूषण के कार्यालय जाकर उन पर हमला करने वालों में से एक तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के बारे में पुलिस कहती रही कि उनकी तलाश की जा रही है और वे मिल नहीं रहे हैं.
उनका कहना था कि हमले के बाद टीम अन्ना के एक सदस्य ने उनसे फ़ोन पर दो घंटे बात की थी और पूछा था कि उन्हें प्रशांत भूषण से क्या समस्या है, क्यों उन पर हमला हुआ, लेकिन उन्हें तो कुछ पता ही नहीं था.
उनका कहना था, "ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में ऐसे हमले होंगे, इसलिए हमारा अपने लोगों से कहना है कि वे किसी भी सूरत में प्रतिवाद न करें."
लोकपाल को संवैधानिक दर्जा
केजरीवाल ने बताया कि टीम अन्ना की एक बैठक में सरकार के इस बयान पर भी चर्चा हुई कि लोकपाल को संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया जा रहा है.
उनका कहना था कि सरकार ये ग़लतफ़हमी फ़ैला रही है कि ऐसा करके लोकपाल को ताक़तवर बनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी संवैधानिक संस्था है, लेकिन केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) सिर्फ़ क़ानून के ज़रिए बनी संस्था है लेकिन तकनीकी रूप से देखें तो सीआईसी की ताक़त सीएजी की तुलना में ज़्यादा ताक़तवर है."
केजरीवाल का कहना था कि ज़रुरत एक ताक़तवर लोकपाल की है और सरकार को संवैधानिक दर्जा देने के फ़ेर में देर नहीं करनी चाहिए.
उनका कहना था कि अगर सरकार क़ानून बनाने की प्रक्रिया और लोकपाल को संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया जाने की प्रक्रिया एक साथ चलाती है तो टीम अन्ना को कोई आपत्ति नहीं है.
'प्रशांत भूषण टीम के सदस्य'

इमेज स्रोत, PTI
अन्ना हज़ारे के बयान के बाद आई इन ख़बरों का अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि ये कहना ग़लत है कि प्रशांत भूषण को टीम अन्ना की कोई टीम से हटाया जा रहा है.
उनका कहना था कि प्रशांत भूषण हमारे बहुत महत्वपूर्ण सदस्य हैं. वे कई तरह के आंदोलनों से जुड़े रहे हैं, पर्यावरण के, मानवाधिकार के और भ्रष्टाचार के और लोकपाल के आंदोलन में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है.
उनका कहना था कि अन्ना हज़ारे से ये पूछा गया था कि क्या प्रशांत भूषण को टीम अन्ना की कोर टीम से हटाया जा रहा है, तो अन्ना ने कहा था कि कोर टीम में कोई रहता या नहीं ये कोर टीम तय करती है.
केजरीवाल ने कहा कि कोर टीम के सदस्यों ने इस पर चर्चा की है और सबकी राय है कि प्रशांत भूषण कोर टीम में रहेंगे.
































