कांग्रेस चाहे तो गठबंधन तोड़ सकती है: ममता

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि वो हमेशा से ही अकेले काम करते आई है और अगर कांग्रेस चाहे तो वो तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ सकती है.
ममता बनर्जी का कहना है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों में भाग ले रही है इसलिए कांग्रेस उनसे डरी हुई है.
इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस किसी चुनौती से डरती नहीं है.
उन्होंने दिल्ली में पत्रकार वार्ता में कहा, “सवा सौ वर्ष से अधिक पुरानी कांग्रेस न तो कभी किसी राजनीतिक चुनौती से डरी है न डरेगी. ये कांग्रेस के विषय में सभी पार्टियो पर लागू होता है.”
इससे पहले कोलकाता में एक पत्रकार वार्ता में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस वामपंथ दलों के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी के खिलाफ़ काम कर रही है.
ममता का कहना है कि उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस के रूख का विरोध किया था इसलिए कांग्रेस छोटे छोटे मुद्दों को बड़ा करके दिखाने की कोशिश कर रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने वॉलमार्ट का पैसा रिटेल में लगाने से मना किया, कोयले और पेट्रोल का दाम बढ़ाए जाने का विरोध किया और लोकायुक्त को लोकपाल के दायरे में रखने आपत्ती जताई थी. इसलिए कांग्रेस तृणमूल को छोटे मुद्दों के ज़रिए बदनाम करने की कोशिश कर रही है.”
'कांग्रेस डरी'
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल के बीच तल्खियां और बढ़ गई जब कोलकाता के इंदिरा भवन का नाम बदल कर चर्चित कवि काज़ी नज़रूल इस्लाम के नाम पर रखे जाने की खबर आई. कांग्रेस और लेफ़्ट दोनों ने इस पेशकश का विरोध किया था.
हालांकि बाद में तृणमूल सांसद सुदीप बंधोपाध्याय ने खबरों को खारिज करते हुए कहा कि इंदिरा भवन का नाम नही बदला जाएगा.
ममता बनर्जी के तल्ख रवैये के बीच कांग्रेस हाई कमान ने तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी प्रकार के मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया.
कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी कह चुके हैं कि कांग्रेस और वामदलों के साथ में काम करने की खबरें निराधार है. वहीं लेफ्ट का कहना है कि अगले आम चुनाव से पहले तृणमूल अपने विकल्पों को परख रही है.
































