सामूहिक बलात्कार की 'शिकार' दलित लड़की की मौत

पुरी जिले में लगभग सात महीने तक कोमा में रहने के बाद कथित रूप से सामूहिक बलात्कार की शिकार 19 वर्षीय दलित लड़की बबीना बेहेरा की गुरुवार को मौत हो गई.
बताया जाता है कि पिछले वर्ष नवंबर में बबीना के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था और उसके बाद उनकी गला घोंटकर हत्या करने की कोशिश की गई. तब से वो कोमा में थीं.
अस्पताल के आपातकालीन अधिकारी बीएन महाराणा ने पत्रकारों को बताया कि कई बीमारियों से जूझ रही बबीना की मौत हृदयगति रुक जाने से हुई.
कड़ी सुरक्षा के बीच और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की उपस्थिति में पोस्ट मार्टम के बाद बबीना का शव गुरुवार शाम उनके परिवार वालों को सौंप दिया गया.
इससे पहले कटक के जिलाधीश गिरीश एसएन ने सरकार की पूर्व घोषणा के अनुसार मृतका के पिता बाबुली बेहेरा को 10 लाख रुपये का चेक दिया.
जांच पर असंतोष
बेहेरा ने चेक तो स्वीकार किया, लेकिन मामले की तहकीकात पर गहरा असंतोष जताया.
उन्होंने कहा, "क्राइम ब्रांच की जांच से मैं बिलकुल संतुष्ट नहीं हूं. मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए और अभियुक्तों को मृत्युदंड मिलना चाहिए."
राज्य में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी मामले की सीबीआई जांच की मांग को दोहराया है.
सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच शीघ्र ही अदालत में एक अतिरिक्त आरोपपत्र दायर करेगी, जिसमें अभियुक्तों के खिलाफ धारा 307 (हत्या की कोशिश) के बदले धारा 302 (हत्या) लगाई जाएगी.
क्राइम ब्रांच पहले ही आठ अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दायर कर चुकी है.
पिछले साल 28 नवंबर को पुरी जिले में पिपली के निकट अर्जुनगोदा गांव में बबीना अर्धनग्न, बेहोश और अधमरी हालत में एक खेत के पास मिलीं.
परिस्थितियों से लग रहा था कि किसी ने पहले उनके साथ बलात्कार किया और फिर गला घोंटकर हत्या करने की कोशिश की थी.
लेकिन पिपली थाना के तत्कालीन प्रभारी अमूल्य चम्पतिरय ने कथित रूप से बबीना के पिता की प्राथमिक सूचना रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की.
मामले पर राजनीति
कोमा की हालत में 9 जनवरी को बबीना को भुवनेश्वर के कैपिटल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया.
लेकिन यहाँ उन्हें उचित इलाज नहीं मिला. यह कहकर बबीना को एंटी-वेनोम इंजेक्शन लगाए गए कि उन्हें सांप ने काटा है.
आखिरकार हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें कटक स्थानांतरित किया गया जहां सही मायनों में उनका इलाज शुरू हुआ.
लेकिन तब तक बबीना की हालत काफी बिगड़ चुकी थी.

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नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों की एक टीम ने उनका इलाज किया लेकिन बबीना की हालत में कोई सुधर नहीं आया.
बबीना कांड को लेकर ओडिशा की राजनीति में भी काफी उथलपुथल हुई. अभियुक्तों को कथित रूप से संरक्षण देने के आरोप में तत्कालीन कृषि मंत्री परदीप महारथी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने पिपली थाना के अधिकारी चम्पतिरय को बर्खास्त कर दिया और पुरी के तत्कालीन एसपी अमितेंद्र नाथ सिन्हा का तबादला कर दिया.
राष्ट्रीय मानविक अधिकार आयोग, अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया.
कई संगठनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग क़ी. लेकिन राज्य सरकार ने इस मांग को ठुकराते हुए ओडिशा हाई कोर्ट के एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश से इसकी जांच का आदेश दिया.
































