You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ब्लॉग: 'योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो मैं क्यूं नहीं?'
- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पिछले दो दिन से सलीमुल्लाह हर किसी से मुस्कुरा-मुस्कुरा के मिल रहा है. क्यूं? ये मैं थोड़ी देर में बताउंगा.
मैं और सलीमुल्लाह स्कूल फ़ेलो रह चुके हैं मगर मैट्रिक के बाद सलीमुल्लाह ने पढ़ाई छोड़ दी. उनके पिता मौलवी नसीबुल्लाह हमारे मोहल्ले की मस्जिद में इमाम थे.
उनकी सभी इज़्ज़त करते थे क्योंकि वो मुसलमानों के दरम्यान कोई भेदभाव नहीं रखते थे.
सबको कहते थे कि तुम भले ही शिया हो या कि सुन्नी- अल्लाह को इससे कोई मतलब नहीं, बस नमाज़ पढ़ा करो, भले ही जैसे भी पढ़ो और किसी भी ग़ैर मुस्लिम के अक़ीदे को बुरा मत कहो, वो भी अल्लाह का बंदा है. और अगर वो तुम्हें कोई दुख नहीं पहुंचा रहा तो तुम भी उसे कोई दुख न पहुंचाओ.
कोई दस बरस पहले मौलवी नसीबुल्लाह साहब अल्लाह को प्यारे हो गए और उनकी जगह उनके बेटे सलीमुल्लाह ने संभाली. मगर सलीमुल्लाह में शायद अपने वालिद का कोई भी गुण नहीं.
हिंदुओं का हिंदुस्तान
वो हर जुमे को मेंबर पर बैठकर बिना हिचकिचाहट कहता है कि पाकिस्तान सिर्फ़ और सिर्फ़ मुसलमानों के लिए बना है, हिंदुओं के लिए हिंदुस्तान है.
सलीमुल्लाह का कहना है कि अगर निर्णायक अल्पसंख्यकों को अगर इस धरती से इतनी ही मोहब्बत है तो उन्हें मुसलमान हो जाना चाहिए ताकि हम उन्हें इज़्ज़त और एहतेराम दे सकें - पाकिस्तान का मतलब पाक लोगों की ज़मीन है.
सलीमुल्लाह ने पिछले सात वर्ष में शहर के दो खाली मंदिरों को मस्जिदों में तब्दील करने का कामयाब आंदोलन चलाया.
उसने शहर के नौजवानों को ये दलील देकर जमा किया कि जब इन मंदिरों को पिछले साठ वर्षों से ताला लगा हुआ है तो क्यूं ना इस जगह को पवित्र बना दिया जाए.
मस्जिद और मंदिर
शहर के हिंदू ट्रस्ट ने सलीमुल्लाह की इस हरकत को अदालत में चैलेंज कर रखा है मगर सलीमुल्लाह कहता है किस माई के लाल में हिम्मत है कि इन मस्जिदों को अब मंदिर कह सके और इनका कब्ज़ा ले सके.
पिछले वर्ष सलीमुल्लाह की वाह-वाह हो गई जब एक क्रिश्चियन लड़की को चार हथियारबंद लोग ये कहकर उसके पास लाए कि वह अपना धर्म बदलना चाहती है.
सलीमुल्लाह ने उसका कलमा कराया और एक हथियारबंद के साथ उसका निकाह भी पढ़वा दिया.
लड़की के ख़ानदान ने गुहार लगा दी कि इसका धर्म ज़बरदस्ती बदलवाया गया है, लेकिन सलीमुल्लाह का कहना है कि कोई ज़बरदस्ती नहीं की गई.
राज्य विधानसभा
लड़की बीस साल की है और अपनी मर्ज़ी से मुसलमान हुई है. अब आप पूछेंगे कि सलीमुल्लाह को इतनी ढील क्यों मिली हुई है.
तो इसका जवाब मुझसे नहीं उन लोगों से लीजिए जिन्होंने पिछले चुनाव में उसकी धुआंधार तकरीरों और देश को तमाम काफ़िराना रिवाज़ों से पाक करने, ज़िंदगी लगा देने के वादे पर वोट दे कर उसे पहली बार सूबाई असेंबली में पहुंचाया.
सलीमुल्लाह को बहुत कम लोगों ने हंसते हुए देखा है. हर शख़्स मारे डर के उसकी इज़्ज़त करता है भले पीठ पीछे कोई कुछ भी कहता रहे.
मगर पिछले दो दिन से सलीमुल्लाह में ये तब्दीली आई है कि वो हर किसी से मुस्कुरा-मुस्कुरा के मिल रहा है.
मैंने कान में पूछा, ''ख़ैरियत तो है सलीम भाई! कहने लगा कि पूरी तैयारी कर ली है. पाकिस्तान प्योर मुस्लिम पार्टी ने कहा है कि अगर मैं उन्हें ज्वाइन कर लूं तो अगले चुनाव में मैं उनकी तरफ़ से चीफ़ मिनिस्ट्री का उम्मीदवार होऊंगा.''
मैंने कहा सलीम,'' क्या अब दिन में भी सपने देखने लगे हो!''
कहने लगा, ''क्यूं, तुम क्या अख़बार नहीं पढ़ते. अगर पड़ोसी देश के सबसे बड़े सूबे की चीफ़ मिनिस्ट्री योगी आदित्यनाथ को मिल सकती है तो यहां मौलवी सलीमुल्लाह क्यों चीफ़ मिनिस्ट्री का उम्मीदवार नहीं बन सकता?''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)