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रख़ाइन में लोगों को वापस बसाया जाएः भारत
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बांग्लादेश के दौरे पर हैं. वो दोनों देशों के संयुक्त परामर्श आयोग की चौथी बैठक में शिरकत करने बांग्लादेश पहुंची हैं.
बैठक के बाद सुषमा ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं के बीच चरमपंथ और म्यांमार के रख़ाइन प्रांत से हो रहे पलायन के संबंध में बात हुई.
मुलाक़ात के बाद सुषमा स्वराज ने कहा, "दोनों देश नफ़रत फैलाने वाले विचारों और हिंसा से अपने नागरिकों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और चरमपंथ के ख़िलाफ़ 'ज़ीरो टोलरेंस' की नीति अपनाते हैं. हम हर स्तर पर हिंसा, चरमपंथ और उग्रवाद से लड़ने के लिए व्यापक दृष्टिकोण रखते हैं."
बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि वो रख़ाइन से जारी पलायन का कोई शंतिपूर्ण हल निकालने के लिए म्यांमार पर दबाव बनाए.
'रख़ाइन के विकास में भागीदारी करेगा भारत'
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रख़ाइन प्रांत से पलायन कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों का नाम लिए बिना कहा कि "स्थिति सामान्य तभी होगी जब रख़ाइन से पलायन कर गए लोगों को वापस वहां बसाया जाएगा."
उन्होंने स्पष्ट किया कि रख़ाइन प्रांत में विकास कार्य शुरू करने के लिए भारत आर्थिक और तकनीकी मदद देने के लिए तैयार है.
इससे पहले भारत ने सितंबर में 'ऑपरेशन इंसानियत' के तहत बांग्लादेश आ रहे रोहिंग्या मुसलमानों के लिए मदद भेजी थी.
तीस्ता पानी बंटवारे पर भी हुई बात
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के साथ बैठक के दौरान तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे के बारे में भी बात की.
तीस्ता नदी पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश की ओर बहती है. दोनों देशों के बीच हुए समझौते में ख़राब मौसम में 50-50 प्रतिशत जल बंटवारे की बात है.
लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मानना है कि इस समझौते से उनके राज्य को नुक़सान पहुंचेगा और वो इसका विरोध कर रही हैं.
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