सऊदी अरब और यूएई अब नहीं रहे 'टैक्स फ्री'

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सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में पहली बार वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लागू किया गया है.

अधिकतर चीज़ों और सेवाओं पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है.

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में बड़ी संख्या में विदेशी श्रमिक हैं और ये देश टैक्स फ्री जीवन का भरोसा देकर अब तक उन्हें आकर्षित करते रहे हैं.

लेकिन तेल कीमतों में कमी का असर अब इन देशों के खजाने पर भी पड़ने लगा है और ये देश इसे भरने के लिए विभिन्न कदम उठा रहे हैं.

राजस्व बढ़ाने के इरादे से उठाया गया ये कदम दोनों ही देशों में एक जनवरी से लागू हो गया है.

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का अनुमान है कि पहले वर्ष में वैट से आय लगभग 12 अरब दिरहाम रहेगी.

अब इन देशों में पेट्रोल-डीज़ल, खाना, कपड़े, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और होटल की बिल पर वैट लगना शुरू हो गया है.

लेकिन मेडिकल उपचार, फाइनेंशियल सर्विस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को टैक्स से बाहर रखा गया है.

नहीं लगेगा आयकर

सऊदी अरब में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा और यूएई में 80 प्रतिशत राजस्व तेल उद्योगों से आता है.

दोनों देशों में सरकारी कोष को बढ़ाने के लिए पहले से कई कदम उठाये जा चुके हैं.

सऊदी अरब में तंबाकू और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर टैक्स लगाया जायेगा, लेकिन स्थानीय लोगों को कुछ सब्सिडी दी जायेगी.

संयुक्त अरब अमीरात में रोड़ टैक्स बढ़ा दिया गया है और टूरिज़्म टैक्स लागू किया गया है.

लेकिन अभी तक आय पर कर लगाने की कोई योजना नहीं है.

गल्फ़ कोऑपरेशन काउंसिल के अन्य सदस्य- बहरीन, कुवैत, ओमान और कतर भी वैट को लागू करने का संकल्प दोहरा चुके हैं. हालांकि कुछ देशों ने इसे फ़िलहाल 2019 तक टाल दिया है.

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