वीगर मुस्लिम पर इंटरपोल के फ़ैसले से चीन ख़फ़ा

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इंटरपोल ने निर्वासित वीगर मुसलमान नेता से वॉन्टेड का अलर्ट वापस ले लिया है. चीन ने इंटरपोल के इस फ़ैसले पर अंसतोष जताया है.
चीन का कहना है कि इंटरपोल ने जिस व्यक्ति से वॉन्टेड का अलर्ट वापस लिया है वो आतंकवादी है. वीगर समुदाय में ज़्यादातर लोग मुस्लिम हैं और ये चीन के पश्चिमी इलाक़े शिन्जियांग में रहते हैं.
पिछले कुछ सालों में सैकड़ों वीगर मुसलमानों की मौत हुई है. एक करोड़ वीगर और बहुसंख्यक हान चीनियों के बीच संघर्ष वर्षों से चल रहा है और इसी संघर्ष में ज़्यादातर वीगर मुसलमान मारे गए हैं.
चीन इस अशांति के लिए अलगाववादी इस्लामिक चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराता है.
मानवाधिकार समूहों और निर्वासितों का कहना है कि धर्म और संस्कृति पर चीनी नियंत्रण के कारण लोगों में ग़ुस्सा है. लंदन स्थित मानवाधिकार समूह फेयर ट्रायल्स का कहना है कि म्यूनिख स्थित वर्ल्ड वीगर कांग्रेस के प्रमुख डोल्कम ईसा पर इंटरपोल का जारी वॉन्टेड अलर्ट वापस ले लिया गया है.
इंटरपोल का रेड नोटिस वांछित व्यक्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय अलर्ट होता है. हालांकि यह अंतरराष्ट्रीय अरेस्ट वॉरंट नहीं होता है.
चीन नाराज़
चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में इस फ़ैसले पर अंसतोष जताया है. चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, ''डोल्कम ईसा आंतकवादी हैं और उन्हें चीनी सरकार ने चिह्नित किया है.''

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चीन का कहना है कि इंटरपोल की तरफ़ से रेड नोटिस जारी किए जाने के पक्ष में उसके पास पक्के सबूत हैं. चीन ने कहा कि वो इस मामले में इटंरपोल से बातचीत करेगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से इंटरपोल ने कहा है कि वो किसी ख़ास केस में टिप्पणी नहीं कर सकता. फेयर ट्रायल्स का कहना है कि ईसा 2006 से जर्मन नागरिक हैं
वर्ल्ड वीगर कांग्रेस के प्रवक्ता दिल्श्यात रैक्शिट का कहना है कि ईसा पर आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि चीन ईसा के ख़िलाफ़ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा है.
रैक्शिट ने कहा कि ईसा शिन्जियांग के पूर्व छात्र नेता रहे हैं और वो हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं.
रॉयटर्स के अनुसार राजनयिक सूत्रों का कहना है कि चीन लगातार यूरोपीय देशों पर ईसा को गिरफ़्तार करने का दबाव बनाता रहा है, लेकिन उसने ईसा के ख़िलाफ़ कभी सबूत मुहैया नहीं कराए.












