ख़ाशोज्जी हत्या मामला: तुर्की ने दिए सऊदी अरब, अमरीका को 'टेप'

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तुर्की ने जानकारी दी है कि उसने पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या से जुड़ी रिकॉर्डिंग अमरीका, ब्रिटेन और सऊदी अरब के साथ साझा की है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने एक बार फिर दावा किया है कि सऊदी अरब को जानकारी है कि ख़ाशोज्जी की हत्या किसने की थी.
पत्रकार ख़ाशोज्जी को सऊदी शासन का, ख़ासतौर पर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का आलोचक माना जाता था. 2 अक्टूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्यिक दूतावास में उनकी हत्या हो गई थी.

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सऊदी अरब ने इस बात की पुष्टि तो की कि ख़ाशोज्जी की वहां हत्या की गई थी लेकिन शाही परिवार की किसी भी भूमिका के दावे को ग़लत बताया था.
इसके पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि ख़ाशोज्जी दूतावास से सुरक्षित बाहर चले गए थे.
तुर्की ने ख़ाशोज्जी की हत्या के लिए सार्वजनिक तौर पर सऊदी अरब को दोषी नहीं ठहराया है.
तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने शनिवार को टीवी पर प्रसारित भाषण में कहा, " हमने सऊदी अरब, वाशिंगटन, जर्मनी, फ्रांस और इंग्लैंड को रिकॉर्डिंग दे दी है."

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उन्होंने कहा, "उन्होंने वो वार्तालाप सुना जो यहां हुआ, वो ये जानते हैं."
हालांकि किसी और देश ने अब तक ये नहीं कहा है कि उन्होंने रिकॉर्डिंग सुनी है.
बीबीसी ने जब शनिवार को ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय से जानकारी मांगी तो उन्होंने टेप मिलने की न तो पुष्टि की और न ही इनक़ार किया.
ख़ाशोज्जी की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़ ने दुनिया के नेताओं से अपील की है कि 'दोषियों को न्याय की परिधि में लाया जाए'.

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ख़ाशोज्जी की हत्या के बारे में अब तक क्या पता है?
ख़ाशोज्जी की मौत कैसे हुई, इसे लेकर अब तक एक राय नहीं बन सकी है. वो अपनी शादी से जुड़े काग़जात के सिलसिले में वाणिज्यिक दूतावास गए थे.
शुरुआत में तुर्की मीडिया ने एक सूत्र के हवाले से दावा किया था कि तुर्की के पास ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग है जिससे साबित होता है कि हत्या के पहले ख़ाशोज्जी को टार्चर किया गया था.
हालांकि, बीते हफ़्ते तुर्की ने दावा किया कि ख़ाशोज्जी के दूतावास में दाख़िल होते ही उनकी गला दबाकर हत्या कर दी गई और उनका शव 'पहले से तैयार योजना के तहत' ठिकाने लगा दिया गया.
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ख़ाशोज्जी का शव नहीं मिला और तुर्की के अधिकारियों का दावा है कि इसे गला दिया गया.
ख़ाशोज्जी के साथ क्या हुआ, इस सवाल पर सऊदी अरब का जवाब बदलता रहा है.
शुरुआत में जब उनके लापता होने की ख़बर आई तो सऊदी अरब ने कहा कि ख़ाशोज्जी दूतावास के बाहर ज़िंदा गए थे. बाद में सऊदी अरब ने माना कि उनकी हत्या कर दी गई थी.
सऊदी अरब ने बताया कि उसने 18 संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार किया और उन पर सऊदी में मुक़दमा चलाया जाएगा. तुर्की संदिग्धों को प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है.
जमाल ख़ाशोज्जी कौन थे?
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ख़ाशोज्जी पत्रकार और लेखक थे. वो दशकों तक सऊदी अरब के शाही परिवार के क़रीब थे और सरकार के सलाहकार भी रह चुके थे.
शाही परिवार से दूरी होने के बाद वो बीते साल अमरीका चले गए थे और निर्वासित जीवन बिता रहे थे. वो वॉशिंगटन पोस्ट में मासिक कॉलम लिखते थे. इस कॉलम में वो सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की नीतियों की आलोचना करते थे.
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