You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चुनाव: क्या-क्या लिख रहे हैं पाकिस्तानी अख़बार? - पाकिस्तान से उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की 53 सीटों वाली विधानसभा के सदस्यों को चुनने के लिए क़रीब 20 लाख मतदाता रविवार 25 जुलाई को वोट डाल रहे हैं.
45 सीटों के लिए सीधे मतदान होते हैं और बाक़ी आठ (जिनमें पाँच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं) सीटों पर लोगों को नामांकित किया जाता है.
1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय कश्मीर एक आज़ाद रियासत थी और उस पर क़ब्ज़े के लिए दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था. 1949 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद सीज़फ़ायर लागू हुआ लेकिन उस समय दोनों देशों के नियंत्रण में जम्मू-कश्मीर का जो इलाक़ा था वही आज भी है. हालांकि दोनों देश पूरे जम्मू-कश्मीर पर अपनी दावेदारी का दावा करते हैं.
पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 257 में कहा गया है कि "जब जम्मू-कश्मीर की जनता पाकिस्तान में मिलने का फ़ैसला करेगी तब जम्मू-कश्मीर राज्य और पाकिस्तान के संबंधों का फ़ैसला राज्य की जनता की इच्छाओं के अनुसार किया जाएगा." लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के सारे फ़ैसले पाकिस्तान की सेना करती है.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के संविधान के अनुसार, कोई भी राजनेता या राजनीतिक पार्टी को इस बात की इजाज़त नहीं है कि वो पाकिस्तान में मिलने के ख़िलाफ़ कोई बात कह सके.
विधानसभा सदस्यों को भी एक हलफ़नामा दायर करना होता है जिसमें उन्हें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के पाकिस्तान में मिलने के समर्थन पर शपथ लेनी होती है.
विधानसभा का चुनाव पाँच साल के लिए होता है और यही सदस्य अपने 'प्रधानमंत्री' और 'राष्ट्रपति' का चुनाव करते हैं.
लेकिन इसके सारे फ़ैसले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कश्मीर काउंसिल करती है. इसमें 14 सदस्य होते हैं. पाकिस्तान की सरकार छह सदस्यों को नामांकित करती है और आठ सदस्य पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर विधानसभा के होते हैं जिनमें पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के 'प्रधानमंत्री' भी शामिल होते हैं.
किसी 'कठपुतली' को कश्मीर का सौदा नहीं करने देंगे: बिलावल भुट्टो
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि वो इमरान ख़ान को कश्मीर का सौदा नहीं करने देंगे.
अख़बार दुनिया के अनुसार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (जिसे पाकिस्तान 'आज़ाद जम्मू-कश्मीर' कहता है) में 25 जुलाई यानी आज होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर हमला करते हुए बिलावल ने कहा, "कश्मीरी जनता फ़ैसला करे उन्हें जनता का प्रधानमंत्री चाहिए या 'कठपुतली' प्रधानमंत्री चाहिए. यह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते हुए मोदी की जीत की दुआ करते हैं. किसी कठपुतली को कश्मीर का सौदा करने की इजाज़त नहीं देंगे. कश्मीर के फ़ैसले कश्मीर की जनता करेगी."
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इससे पहले इमरान ख़ान ने शुक्रवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी सरकार पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में दो जनमत संग्रह करवाएगी. इमरान ने कहा था कि पहले जनमत संग्रह में कश्मीर की जनता भारत या पाकिस्तान के साथ रहने का फ़ैसला करेगी और दूसरे जनमत संग्रह में उन्हें यह फ़ैसला करना होगा कि वो पाकिस्तान के साथ विलय करना चाहते हैं या आज़ाद होकर रहना चाहते हैं.
उनके इस बयान को लेकर पाकिस्तान में काफ़ी चर्चा हो रही है और विपक्ष उन पर हमले कर रहा है.
मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष और संसद में नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा कि इमरान ख़ान की जनमत संग्रह की पेशकश को पाकिस्तान ख़ारिज करता है.
अख़बार डॉन के अनुसार, शहबाज़ शरीफ़ का कहना था, "इमरान ख़ान 'आज़ाद जम्मू-कश्मीर' में जनमत संग्रह की बात करके पाकिस्तान के ऐतिहासिक और संवैधानिक स्थिति को चुनौती दे रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और पाकिस्तान की ऐतिहासिक स्थिति से हटकर कश्मीर समस्या के किसी भी समाधान को पाकिस्तान की क़ौम ख़ारिज करती है."
डासू बांध परियोजना हमला: चीन और पाकिस्तान का मिलकर हमलावरों को बेनक़ाब करने का फ़ैसला
पाकिस्तान और चीन ने सीपेक (चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने और डासू बांध परियोजना घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों को बेनक़ाब करने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास करने का फ़ैसला किया है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से चीन में मुलाक़ात के बाद यह बातें कहीं.
14 जुलाई को पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में एक बस में हुए धमाके में कम से कम 13 लोग मारे गए थे जिनमें नौ चीनी नागरिक थे. ये चीनी नागरिक पाकिस्तान के डासू बांध परियोजना पर काम करने वाले इंजीनियर थे.
पाकिस्तान ने पहले इसे गैस लीकेज की वजह से हुआ धमाका कहा था लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि बस में धमाका एक चरमपंथी कार्रवाई थी.
इस घटना के बाद चीन ने पाकिस्तान पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी और कहा था कि पाकिस्तान इस मामले की जाँच करे और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द कठोर सज़ा दे.
चीन इतना नाराज़ था कि डासू बांध परियोजना पर काम करने वाली चीनी कंपनी ने कुछ दिनों के लिए काम रोक दिया था और पाकिस्तानी कर्मचारियों को निकालने का फ़ैसला कर लिया था.
लेकिन फिर बाद में कंपनी ने नोटिस वापस ले लिया था और परियोजना पर दोबारा काम शुरू करने का फ़ैसला किया था.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने चीनी समकक्ष से फ़ोन पर बात की थी और उन्हें विश्वास दिलाया था कि इस मामले की पूरी जाँच होगी. इमरान ख़ान ने कहा था, ''किसी भी शत्रु ताक़त को पाकिस्तान और चीन के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को नुक़सान पहुँचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.''
लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने चीन का दौरा किया.
इस मौक़े पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान, चीन की वन चाइना पॉलिसी, ताइवान, तिब्बत, हॉन्ग कॉन्ग और दक्षिणी चीन सागर जैसे मुद्दों पर चीन का समर्थन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)