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इमरान ख़ान तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान से बैन हटाने पर कैसे हुए तैयार- उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अख़बार दुनिया के मुताबिक़ पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से पाबंदी हटाने की मंज़ूरी दे दी है.
चार नवंबर को पंजाब प्रांत की सरकार ने टीएलपी को प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट से बाहर करने का प्रस्ताव स्वीकार किया था और फिर केंद्र सरकार से भी सिफ़ारिश की थी कि टीएलपी पर लगे सारे प्रतिबंध हटा लिए जाएं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब प्रांत की सरकार की सिफ़ारिश पर क़ानून मंत्रालय से सलाह ली थी. क़ानून मंत्रालय की हरी झंडी के बाद इमरान सरकार ने टीएलपी से सभी प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला किया.
इस साल अप्रैल में टीएलपी ने तीन दिनों तक हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था जिसके बाद सरकार ने उन्हें आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत प्रतिबंधित संगठन क़रार दिया था.
बदले में टीएलपी ने विश्वास दिलाया है कि वो अपने सारे विरोध प्रदर्शन वापस ले रही है. इसके अलावा टीएलपी ने कहा कि वो पाकिस्तान के संविधान और क़ानून का पालन करेगी.
अख़बार डॉन के अनुसार टीएलपी से पाबंदी हटाने का मामला हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया था.
टीएलपी ने अपने संस्थापक ख़ादिम हुसैन रिज़वी के बेटे साद हुसैन रिज़वी की रिहाई के लिए पंजाब सरकार पर दबाव डालने के लिए 20 अक्टूबर को लाहौर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था.
शांति भंग होने की आशंका के चलते पंजाब सरकार ने 12 अप्रैल से साद रिज़वी को अपनी हिरासत में रखा है. 20 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन की शुरुआत करने के बाद 22 अक्टूबर को टीएलपी ने राजधानी इस्लामाबाद की तरफ़ कूच करने का फ़ैसला किया था.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में पाँच पुलिसकर्मी मारे गए थे और दोनों ओर से सैकड़ों लोग घायल हुए थे.
30 अक्टूबर को सरकार और टीएलपी के बीच बातचीत शुरू हुई और इस दौरान टीएलपी कार्यकर्ता राजधानी इस्लामाबाद से थोड़ी दूर वज़ीराबाद में डटे हुए थे. बातचीत के दौरान सरकार ने हिरासत में लिए गए टीएलपी के दो हज़ार से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया और आख़िरकार सरकार ने टीएलपी पर लगी पाबंदी को भी हटाने का फ़ैसला कर लिया.
टीएलपी का गठन
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान की बुनियाद ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने साल 2015 में रखी थी. सुन्नी इस्लाम की बरेलवी विचारधारा के समर्थक ख़ादिम हुसैन रिज़वी पंजाब प्रांत के धार्मिक विभाग के कर्मचारी थे और लाहौर की एक मस्जिद के मौलवी थे.
साल 2011 में जब पंजाब पुलिस के गार्ड मुमताज़ क़ादरी ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की हत्या की तो ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने मुमताज़ क़ादरी का खुलकर समर्थन किया जिसके नतीजे में पंजाब के धार्मिक विभाग की नौकरी से उन्हें निष्कासित कर दिया गया.
इसके बाद ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने मुमताज़ क़ादरी की रिहाई के लिए भी आंदोलन किया था.
मुमताज़ क़ादरी को फांसी दिए जाने के बाद इन्होंने आंदोलन किया लेकिन सरकार से बातचीत के बाद चार दिन के अंदर यह ख़त्म हो गया. इस धरने की समाप्ति पर मौलान ख़ादिम हुसैन रिज़वी ने ऐलान किया था कि वो 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान या रसूल अल्लाह' नाम से धार्मिक पार्टी की बुनियाद रखेंगे. इस तरह उन्होंने साल 2015 में टीएलपी का गठन किया.
इससे पहले टीएलपी 2017 में फ़ैज़ाबाद में धरना देकर अपनी ताक़त दिखा चुकी है. तब सेना की मध्यस्थता से धरना समाप्त हुआ था.
पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ अहमद रशीद ने एक समय कहा था कि टीएलपी को वैश्विक आतंकवादी संगठन कहा जा सकता है.
विपक्ष की सरकार विरोधी मार्च की घोषणा
पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों के समूह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने एक बार फिर सरकार विरोधी मार्च निकालने की घोषणा की है.
शनिवार को पीडीएम की एक वर्चुअल बैठक में इसकी घोषणा की गई.
अख़बार जंग के अनुसार पीडीएम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि 13 नवंबर से प्रांतीय राजधानी में मार्च का सिलसिला शुरू होगा. सबसे पहले 13 नवंबर को कराची में रैली होगी फिर 17 नवंबर को क्वेटा में पीडीएम की रैली होगी. 20 नवंबर को पेशावर में रैली होगी. मौलाना के अनुसार आख़िरी रैली लाहौर में होगी जिसके बाद राजधानी इस्लामाबाद के लिए लॉन्ग मार्च किया जाएगा.
शनिवार को हुई बैठक में पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी को पीडीएम में दोबारा शामिल करने पर विचार किया गया लेकिन फ़िलहाल इस पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका.
सियासी बेरोज़गारों की एक और बैठक: मंत्री फ़वाद चौधरी
पीडीएम की बैठक और इस्लामाबाद मार्च की घोषणा का सरकार ने मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा कि यह मार्च भी पिछले मार्च से अलग नहीं होगा.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी ने कहा कि सरकार किसी भी दबाव में नहीं आएगी.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार फ़व्वाद चौधरी ने पीडीएम की बैठक पर सख़्त हमला करते हुए कहा, "नाकाम और जनता से ठुकराए जा चुके सियासी बेरोज़गारों ने सियासी ऑक्सीजन पाने के लिए एक और बैठक की. यह गिरोह चाहता है कि चुनाव में धांधली के दरवाज़े खुले रहें ताकि उनके बचे रहने की संभावना बची रहे. उनकी बैठक का दूसरा बड़ा फ़ैसला यह है कि चुनाव में पारदर्शिता की कोई भी कोशिश कामयाब नहीं होने देंगे."
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