सऊदी अरब में संगीत समारोहों पर आख़िर महिलाएं क्यों खड़े कर रही हैं सवाल

आयोजकों का दावा है कि इन समारोहों में 7 लाख से अधिक लोगों ने शि​रक़त की

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इमेज कैप्शन, आयोजकों का दावा है कि इन समारोहों में 7 लाख से अधिक लोगों ने शि​रक़त की
    • Author, सेबेस्टियन अशर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, अरब मामलों के संपादक

सऊदी अरब की राजधानी रियाद के बाहरी इलाक़े में बीते रविवार को चार दिनों तक चले MDLBeast के 'साउंडस्टॉर्म' संगीत समारोह का समापन हो गया.

इस समारोह को मध्य पूर्व का सबसे बड़ा संगीत समारोह बताया जा रहा है.

आयोजकों का दावा है कि इन चार दिनों में कुल सात लाख से अधिक दर्शकों ने इस समारोह में शिरक़त की. इसमें सबसे ज़्यादा भागीदारी युवा पुरुषों और महिलाओं की रही.

इस समारोह के आयोजकों ने दावा किया है कि आयोजन स्थल पर यौन हिंसा सहित अन्य किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय किए गए थे.

हालांकि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानीय और विदेशी महिलाओं ने कैमरे के सामने शिकायत की है कि उनके साथ कार्यक्रम के दौरान उत्पीड़न की घटनाएं हुईं.

मालूम हो कि सऊदी अरब में 2017 से पुरुषों और महिलाओं के एक साथ किसी समारोह में भाग लेने पर लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है. उसके बाद सऊदी अरब में ऐसे समारोह अब अजूबा नहीं रहे. वैसे इस संगीत कार्यक्रम की शुरुआत 2019 से हुई है.

कुछ साल पहले तक इस देश में सार्वजनिक तौर पर गाना बजाना विवाद का विषय था, लेकिन अब यहां लाखों लोग एक साथ तेज़ म्यूज़िक और डीजे पर झूमने लगे हैं.

पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ इन कार्यक्रमों में भाग लिया, जो एक समय सऊदी अरब में नामुमकिन था

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इमेज कैप्शन, पुरुषों और महिलाओं ने एक साथ इन कार्यक्रमों में भाग लिया, जो एक समय में सऊदी अरब में नामुमकिन था

उत्पीड़न के कई वीडियो आए सामने

सऊदी अरब में हुए इस कार्यक्रम में भाग लेने से पहले दुनिया भर के मशहूर कलाकारों को इस देश के मानवाधिकार रिकॉर्ड्स के बारे में सोचना पड़ा. मानवाधिकार कार्यकर्ता कह रहे थे कि इस समारोह में भाग लेने वाले लोग दमनकारी सऊदी सरकार की छवि साफ़ करने में उसकी मदद कर रहे हैं.

लेकिन कार्यक्रम में शामिल होने से पहले कई बार सोचने वालों में केवल कलाकार ही नहीं थे. उनके अलावा महिलाएं भी थीं.

इस समारोह में महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़ी ख़बरें लगातार आती रहीं.

पिछले कुछ सालों में सऊदी अरब के ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें पुरुषों के समूह महिलाओं को छेड़ते और परेशान करते हुए दिखे.

MDLBeast ने इस मामले में ज़ीरो टॉलरेंस का वादा करते हुए 'रेस्पेक्ट एंड रीसेट' नाम का एक अभियान शुरू किया.

इसका मक़सद उनके कार्यक्रमों में महिलाओं की सुरक्षा के उपाय बढ़ाना था. इन कार्यक्रमों में भाग ले चुके कई लोगों ने उसके इन प्रयासों की काफ़ी तारीफ़ भी की.

MDLBeast संगीत समारोह

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इमेज कैप्शन, इसकी आयोजक कंपनी MDLBeast का दावा है कि यह पूरे मध्य पूर्व का सबसे बड़ा संगीत समारोह था

2018 के बाद से सऊदी अरब में महिलाओं के उत्पीड़न को अपराध बनाने के लिए क़दम उठाए गए हैं. अब ऐसा करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ पांच साल तक की जेल की सज़ा का प्रावधान किया गया है.

लेकिन कई सऊदी महिलाओं ने इस बारे में बीबीसी से संपर्क किया.

इन महिलाओं ने बताया कि उन्हें भरोसा नहीं है कि उनका उत्पीड़न रोकने के लिए प्रशासन बहुत ठोस क़दम उठा रहा है.

इन महिलाओं ने अपनी पहचान ज़ाहिर करने से इनकार किया है.

इन महिलाओं का कहना है कि उन्होंने या तो ख़ुद ही मनोरंजन के इन सामूहिक जगहों पर ऐसे उत्पीड़न का सामना किया या वो वैसी महिलाओं को जानती हैं जिनके साथ ऐसी घटनाएं हुईं.

एक महिला ने बताया कि इंटरनेट पर मौजूद ऐसे वीडियो पर जो कॉमेंट्स आते हैं, उनमें अक्सर महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब के क़ानून में महिला पीड़ितों को भी अपराधियों की तरह सज़ा दी जा सकती है.

वीडियो कैप्शन, सऊदी अरब में सत्ता संघर्ष का मतलब

एक दूसरी महिला ने बताया कि अधिकारी तभी गंभीर हुए, जब ऐसी घटना किसी विदेशी महिला के साथ घटी.

उनके अनुसार, एक सऊदी महिला का जब उत्पीड़न हुआ तो उस ओर उतनी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन ऐसी ही घटना जब एक विदेशी महिला के साथ हुई तो उस पर बड़ा शोर हुआ और दंड भी कड़ा था.

वहीं एक तीसरी महिला ने कहा कि वास्तव में स्थानीय महिलाओं को कोई ख़ास सुरक्षा नहीं मिल पाई है. यदि किसी महिला ने शिक़ायत भी की तो उन्हें अपने ही परिवार और समाज में आलोचनाएं झेलनी पड़ीं.

उनका यह भी आरोप है कि मनोरंजन वाली जगहों पर मोबाइल से वीडियो बनाने को लेकर जो हाल में चेतावनी आई है, उसका असल उद्देश्य कुछ और है. उनके अनुसार, इस चेतावनी का मक़सद इन जगहों पर होने वाले उत्पीड़न की घटनाओं को रिकॉर्ड करने से रोकना था.

सऊदी अरब, महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाज़त

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इमेज कैप्शन, 2017 में सऊदी अरब ने कई सुधारों का एलान किया था. इसके तहत महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाज़त दी गई

'सतही परिवर्तन'

देश के असल शासक माने जाने वाले क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और उनके क़रीबी इन घटनाओं का बचाव करते हुए मिलते हैं. उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं बदलाव के दौर से गुज़र रहे देश में न टाले जा सकने वाले दर्द जैसी हैं.

उनके अनुसार, देश पहले इस्लाम की कट्टरपंथी व्याख्या से चल रहा था जिसके तहत सड़कों पर हर जगह 'नैतिक पुलिस' होती थी. वहीं अब इनके हटने और समाज को पहले से अधिक खुला बनाने के दौरान ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं.

प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपने देश को आगे ले जाने के लिए विज़न 2030 प्रोजेक्ट का एलान किया है. इसे तेज़ करने के लिए उन्होंने कई बदलावों की शुरुआत की है.

इसके तहत, तेल पर अर्थव्यवस्था की निर्भरता ख़त्म करके देश को बदलने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है. वहीं युवाओं की उम्मीदों के अनुसार समाज को नया रूप देने की भी कोशिश हो रही है.

प्रिंस के समर्थकों का कहना है कि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इसके पूरा होने तक धैर्य रखने की ज़रूरत है.

हालां​कि बीबीसी से संपर्क करने वाली सऊदी महिलाओं ने इस योजना को समावेशी नहीं बताते हुए कई सवाल खड़े किए. इनके अनुसार, देश में महिलाओं की अपेक्षाओं और उनकी चिंताओं का समाधान करने की कोशिश अभी भी सतही है.

इन लोगों के अनुसार महिलाओं के उत्पीड़न का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. आख़िर उत्पीड़न के भय के चलते कई महिलाओं ने इन कार्यक्रमों में शिरक़त नहीं की. हालांकि इन कार्यक्रमों के आयोजन का मक़सद सऊदी अरब को खोलना रहा है.

वीडियो कैप्शन, क्यों बदल रहा है सऊदी अरब

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