अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अधिकतर नेटो सहयोगी ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते. ट्रंप ने कहा, "हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है."
सुमंत सिंह, रौनक भैड़ा
अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Roberto Schmidt/Getty Images
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अधिकतर नेटो सहयोगी ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते. ट्रंप ने कहा, "हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है."
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "अमेरिका को ज़्यादातर नेटो साथियों ने बताया है कि वे ईरान के 'आतंकवादी शासन' के ख़िलाफ़ हमारी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होना चाहते. यह तब है जब लगभग हर देश ने माना था कि हम जो कर रहे हैं वह सही है और ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए."
"मुझे उनके फ़ैसले पर हैरानी नहीं है, क्योंकि मैंने हमेशा नेटो को एकतरफ़ा रास्ता माना है. हम इन देशों की सुरक्षा पर हर साल सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करते हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर वे हमारे लिए कुछ नहीं करते."
उन्होंने कहा, "ख़ुशक़िस्मती से हमने ईरान की सेना को तबाह कर दिया है. उनकी नौसेना, वायुसेना ख़त्म हो गई है, उनका एंटी-एयरक्राफ़्ट और रडार सिस्टम ख़त्म हो गया है. सबसे अहम, उनके लगभग हर स्तर के नेता ख़त्म हो गए हैं. अब वे हमें, हमारे मध्य-पूर्वी साथियों या दुनिया को फिर कभी धमकी नहीं दे पाएंगे."
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "हमारी सैन्य सफलता की वजह से अब हमें नेटो देशों की मदद की ज़रूरत नहीं है. हमें कभी थी ही नहीं. यही बात जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया पर भी लागू होती है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर, जो दुनिया का सबसे ताक़तवर देश है, मैं साफ़ कहता हूं- हमें किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है."
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को खुला रखने के लिए कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी.

इमेज स्रोत, Firdous Nazir/NurPhoto via Getty Images
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया है कि एलपीजी बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (ई-केवाईसी) केवल उन ग्राहकों के लिए ज़रूरी है जिन्होंने अब तक वैरिफ़िकेशन नहीं कराया है.
मंत्रालय ने साफ़ किया है कि यह सभी ग्राहकों के लिए नहीं ज़रूरी नहीं है.
मंत्रालय का यह बयान एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स के बाद आया है.
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह कोई 'नया निर्देश नहीं' है.
बयान में कहा गया, "मंत्रालय की हाल की पोस्ट सरकार के उन जारी प्रयासों का हिस्सा है, जिनका मक़सद ज़्यादा से ज़्यादा एलपीजी उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है."

इमेज स्रोत, X/@PetroleumMin
मंत्रालय ने कहा, "ई-केवाईसी केवल उन एलपीजी उपभोक्ताओं को कराना है, जिन्होंने अब तक इसे नहीं किया है. अगर आप ग़ैर-पीएमयूवाई (प्रधानमंत्री उज्जवला योजना) ग्राहक हैं और आपने पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली है, तो आपको इसे दोबारा करने की ज़रूरत नहीं है."
"पीएमयूवाई ग्राहकों को ईकेवाईसी हर वित्त वर्ष में सिर्फ़ एक बार कराना होता है, वह भी सात रिफ़िल के बाद डीबीटी सब्सिडी पाने के लिए 8वीं और 9वीं रिफ़िल पर."

इमेज स्रोत, X/@netanyahu
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को 'ख़त्म कर दिया' गया है.
बिन्यामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक वीडियो बयान जारी किया. उन्होंने कहा, "अली लारिजानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुख़िया थे, जो असल में ईरान चलाने वाला गैंग है. हमने बसीज के कमांडर को भी ख़त्म किया. ये वही लोग हैं जो तेहरान और दूसरे शहरों में लोगों को डराते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "हम इस शासन को कमज़ोर कर रहे हैं ताकि ईरान के लोग इसे हटाने का मौक़ा पा सकें. ये तुरंत नहीं होगा, आसान भी नहीं होगा. लेकिन अगर हम डटे रहे तो उन्हें अपना भविष्य ख़ुद तय करने का मौक़ा मिलेगा."
नेतन्याहू ने कहा, "हम ख़ाड़ी में अपने अमेरिकी दोस्तों की मदद कर रहे हैं. मैंने कल राष्ट्रपति ट्रंप से इस बारे में लंबी बात की. मेरे, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम के बीच तालमेल है. हम अप्रत्यक्ष हमलों से ईरानी शासन पर दबाव डालेंगे और सीधे ऑपरेशन भी करेंगे. अभी और भी कई सरप्राइज़ बाक़ी हैं."
"मैं आपसे कहता हूं कि निराशा फैलाने वाले चैनलों को नज़रअंदाज़ करें. हम ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं. 7 अक्तूबर के बाद हम गहरी मुश्किल में थे, लेकिन अब हम एक ताक़तवर शक्ति बन गए हैं. हमारे साथ एक वैश्विक महाशक्ति दोस्त है, जो कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहा है."
गौरतलब है कि बिन्यामिन नेतन्याहू से पहले इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने अली लारिजानी की मौत का दावा किया था. इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्स ने भी यही कहा था. लेकिन इस पर ईरान की ओर से पुष्टि नहीं हुई है.

इमेज स्रोत, NREGA Sangharsh Morcha
दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सांसदों, अर्थशास्त्रियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मनरेगा मज़दूरों की बैठक हुई. इसमें संयुक्त मंच ने 15 मई 2026 को बड़े पैमाने पर मज़दूरों की हड़ताल का एलान किया है.
संयुक्त मंच ने राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर आंदोलन जारी रखने की बात कही है.
दरअसल, इनकी प्रमुख मांग है कि विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) क़ानून को तुरंत वापस लिया जाए और मनरेगा को फिर से लागू किया जाए.
वीबी-जी राम जी को वापस लेने के अलावा इनकी ये मांगें भी हैं-
- हर ग्रामीण परिवार को कम से कम 200 दिन का रोज़गार मिले और न्यूनतम मज़दूरी ₹700 प्रति दिन हो, जिसे हर साल महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाए.
- हाज़िरी और मज़दूरी भुगतान के लिए इस्तेमाल हो रही तकनीकी प्रणालियों को हटाया जाए, क्योंकि इनसे मज़दूर बाहर हो जाते हैं.
- ग्राम सभाओं की भूमिका को फिर से बहाल और मज़बूत किया जाए ताकि वे योजना बनाने, लागू करने और निगरानी में मुख्य भागीदार बनें.
राजस्थान और पंजाब से आए मनरेगा मज़दूरों ने कहा, "नया क़ानून राज्यों, पंचायतों और ग्राम सभाओं की भूमिका को कमज़ोर करता है और मनरेगा की लोकतांत्रिक और भागीदारी वाली प्रकृति को नुक़सान पहुंचाता है."
यह बैठक कृषि और ग्रामीण श्रमिक संघों और नरेगा संघर्ष मोर्चा से जुड़े संगठनों के संयुक्त मंच ने बुलाई थी. इस बैठक में इंडियन नेशनल कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (एम), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (एमएल), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया, राष्ट्रीय जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और भारत आदिवासी पार्टी के सांसद मौजूद थे.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त

इमेज स्रोत, ANI
लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से रिहा होने के बाद कहा कि जब वह जेल में थे तो उनकी 'पत्नी का पीछा किया गया.'
सोनम वांगचुक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "मुझे परिवार या वकीलों से बात करने का मौक़ा दिए बग़ैर अचानक घर से उठाकर जेल में डाल दिया गया. भारी सुरक्षा के बीच मेरी पत्नी पत्रकारों से भी नहीं मिल पाई. फिर वो कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने दिल्ली आईं और दो-तीन हफ़्तों तक दिल्ली की सड़कों पर उनका गाड़ियों और मोटरसाइकिलों से पीछा किया गया. ये सब किसी फ़िल्म जैसा था."
उन्होंने खुद की रिहाई पर कहा, "मैं थोड़ा लालची इंसान हूं. सिर्फ जीत मेरे लिए काफ़ी नहीं थी. अगर सिर्फ सोनम वांगचुक जीतता है तो क्या ही फ़ायदा, जब तक लद्दाख, हिमालय और जिन मुद्दों के लिए मैं खड़ा हूं वो न जीतें. इसलिए हम मुद्दों की जीत चाहते थे."
"अब सरकार ने भरोसा बनाने और सार्थक बातचीत शुरू करने के लिए हाथ बढ़ाया है, ये बहुत अच्छी बात है. इससे लद्दाख भी जीतेगा और हमारा मुद्दा भी जीतेगा."
सोनम वांगचुक ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) का ज़िक्र करते हुए कहा, "अगर कोर्ट भी इस मामले में फ़ैसला दर्ज करता है, तो भविष्य में अफ़सरों और नीति बनाने वालों को ये सीख मिलेगी कि एनएसए जैसे क़ानूनों का इस्तेमाल कैसे करना है और ख़ासकर कैसे नहीं करना है."
गौरतलब है कि वांगचुक को लद्दाख में हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था. हालांकि, केंद्र ने 14 मार्च 2026 को सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्योरिटी एक्ट हटा दिया. इसके बाद वो रिहा कर दिए गए.

इमेज स्रोत, Morteza Nikoubazl/NurPhoto via Getty Images
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी तास के मुताबिक़, रूस में ईरान के राजदूत काज़ेम जलाली ने 'मोजतबा ख़ामेनेई के मॉस्को में इलाज कराने' की ख़बर को ग़लत बताया है.
दरअसल, इससे पहले कुवैत के अख़बार अल-जरीदा ने लिखा था, "ईरान के सर्वोच्च नेता मोज़तबा ख़ामेनेई को इलाज के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निजी निमंत्रण पर मॉस्को ले जाया गया है."
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, साइप्रस में ईरान के राजदूत अलीरेज़ा सालारियन ने ब्रिटिश अख़बार द गार्डियन को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने सुना है कि उनके (मोजतबा ख़ामेनेई) पैर, हाथ और बाज़ू में चोट हैं. मुझे लगता है कि वो अस्पताल में हैं क्योंकि वो घायल हैं."
ईरानी टीवी ने भी मोजतबा ख़ामेनेई के नेता चुने जाने की खबर के बाद कहा था कि वो घायल हैं, लेकिन ज़्यादा जानकारी नहीं दी थी.
हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने दो दिन पहले कहा था कि मोजतबा ख़ामेनेई "पूरी तरह से स्वस्थ" हैं.

इमेज स्रोत, FABRICE COFFRINI/AFP via Getty Images
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अफ़ग़ान तालिबान और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को कम करने की अपील की है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इससे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर ख़तरा बढ़ा रहा है.
डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, "अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ी हुई झड़पों के कारण फ़रवरी के अंत से अब तक अफ़ग़ानिस्तान में कम से कम 6 स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए हैं."
"इसके अलावा, काबुल में गृह मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ओमिद नशा मुक्ति केंद्र पर रात में हुए हमले में 400 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और कम से कम 250 लोग घायल हुए. ये लोग नशे की समस्या के इलाज के लिए भर्ती थे."

इमेज स्रोत, X/@DrTedros
डब्ल्यूएचओ ने आगे कहा, "विश्व स्वास्थ्य संगठन इन घटनाओं की जांच कर रहा है. लेकिन बढ़ता संघर्ष स्वास्थ्य व्यवस्था पर और दबाव डाल रहा है. कमज़ोर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर ख़तरा बढ़ा रहा है."
"सभी पक्षों से अपील की जाती है कि तनाव कम करें और शांति व स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें. शांति सबसे अच्छी दवा है."
गौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान शासन का आरोप है कि पाकिस्तान ने राजधानी काबुल में "एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हमले" किए हैं. इसमें "सैकड़ों लोग मारे गए" हैं.
जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसकी सेना ने काबुल और नंगरहार में अफ़ग़ान तालिबान शासन के 'आतंकवाद को समर्थन देने वाले सैन्य ठिकानों' पर हमले किए हैं.

इमेज स्रोत, Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बोर्ड, निगमों और आयोगों के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकारों से 'कैबिनेट रैंक' का दर्जा तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है.
यह फ़ैसला बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले लिया गया है. राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने और ख़र्च पर नियंत्रण के प्रयासों के तहत लिया गया है.
इस फ़ैसले के दायरे में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह बाली, राज्य नियोजन बोर्ड के उपाध्यक्ष बिजवानी पठानिया, प्रदेश के सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं विधायक नंद लाल और वन निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची जैसे पदाधिकारी शामिल हैं.
इन पदाधिकारियों के वेतन और मासिक भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर 2026 तक स्थगित (रोका) रहेगा. हालांकि, अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इसे किसी कटौती के रूप में नहीं माना जाएगा, बल्कि यह अस्थायी स्थगन है.
जानकारों का मानना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह क़दम महत्वपूर्ण है.


इमेज स्रोत, Santosh Kumar/Hindustan Times via Getty Images
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है.
पीटीआई के मुताबिक़, केसी त्यागी कहा कि वे जल्द ही अपने अगले क़दम का फ़ैसला करेंगे. केसी त्यागी जेडीयू से तब से जुड़े हुए थे, जब यह अक्तूबर 2003 में समता पार्टी और जनता दल के विलय से बनी थी.
उन्होंने जेडीयू में कई ज़िम्मेदारियां निभाईं, जिनमें चीफ़ जनरल सेक्रेटरी, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं.
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को ही राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं, वो जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे सकते हैं.

इमेज स्रोत, Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का एलान कर दिया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भबानीपुर से चुनाव लड़ेंगी.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उम्मीदवारों के नामों का एलान हुआ. इस दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को पिछली बार से भी कम सीटें मिलेंगी.
ममता बनर्जी का मुक़ाबला बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी से होगा. सोमवार को जारी हुई बीजेपी की लिस्ट के मुताबिक़, शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की दो सीटों से उम्मीदवार बनाया गया है. अधिकारी भबानीपुर के अलावा नंदीग्राम से भी चुनाव लड़ेंगे.
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को साल 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से चुनाव हराया था.

इमेज स्रोत, SUJIT JAISWAL/AFP via Getty Images
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी की ओर से दायर मानहानि केस में रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी को समन जारी किया.
यह केस गोस्वामी के उस दावे पर है जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस पार्टी का ऑफ़िस तुर्की में है.
बार एंड बेंच के मुताबिक़, जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कोई अंतरिम आदेश पास करने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ़ समन जारी करूंगी. प्रसारण मई 2025 का है."
कोर्ट ने आदेश दिया, "सभी तरीक़ों से प्रतिवादियों को समन भेजा जाए. अंतरिम रोक की अर्ज़ी पर नोटिस जारी करें और चार हफ़्तों में जवाब दाख़िल करें."
दरअसल, मई 2025 में अर्नब गोस्वामी ने दावा किया था, 'कांग्रेस पार्टी तुर्की में ऑफिस चलाती है.' यह दावा रिपब्लिक टीवी पर प्रसारित हुआ और सोशल मीडिया पर फैलाया गया, जिसमें इस्तांबुल की एक इमारत को कांग्रेस का ऑफिस बताया गया.
यह दावा उस समय किया गया था जब बीते साल मई में भारत और पाकिस्तान के सैन्य संघर्ष के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था.
लाइव लॉ के मुताबिक़, अब यह मामला 19 मई को सुना जाएगा.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त

इमेज स्रोत, NAKKAS / AFP via Getty Images
इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने दावा किया है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी की मौत हो गई है.
एक बयान में काट्ज़ ने बताया कि उन्हें अभी-अभी ईरान के बड़े सुरक्षा अधिकारी की मौत की जानकारी मिली है.
जबकि ईरानी मीडिया के दो चैनलों 'तस्नीम' और 'मेहर' न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि अली लारिजानी जल्द ही एक संदेश जारी करेंगे.
अली लारिजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रभावशाली सचिव हैं.
उन्हें अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने काउंसिल का सचिव और ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया था.

इमेज स्रोत, COURTNEY BONNEAU/Middle East Images/AFP via Getty Images
एक इसराइली सेना अधिकारी ने बताया है कि इसराइल डिफेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी को निशाना बनाया है.
यह साफ़ नहीं है कि वह मारे गए हैं या घायल हुए हैं.
इससे पहले सोमवार देर शाम को अली लारिजानी ने एक पत्र जारी किया, जिसमें इस्लामी देशों की सरकारों की आलोचना की.
अली लारिजानी ने इस पत्र में 'दुनिया के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों' को संबोधित करते हुए लिखा, "क्या आप जानते हैं कि कुछ गिने-चुने मामलों को छोड़कर, किसी भी इस्लामी सरकार ने ईरानी जनता की मदद नहीं की?"
लारिजानी ने इन देशों को लिखा था, "ईरान आपका मददगार है और आप पर हावी होने का कोई इरादा नहीं रखता, लेकिन आप किस तरफ़ हैं?"

इमेज स्रोत, Dhiraj Singh/Bloomberg via Getty
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिकी यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कई यूज़र्स को किसी भी तरह से ऐसे कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से भी रोका है.
हिमायनी पुरी की ओर से दायर मामले की सुनवाई कर रहीं जज ने स्पष्ट किया कि अगर सोशल मीडिया यूज़र्स पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो प्लेटफ़ॉर्म इस तरह की सामग्री को हटाने या उस तक पहुंच ब्लॉक करने के लिए बाध्य होंगे.
लाइव लॉ के मुताबिक़, जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने एक्स, गूगल, यूट्यूब, मेटा और लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स और अन्य अज्ञात संस्थानों को हिमायनी पुरी को जेफ़री एपस्टीन से जोड़ने वाले कंटेंट को हटाने का आदेश दिया है.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

बीबीसी गुजराती सेवा के मुताबिक़, गुजरात की एक स्थानीय अदालत ने ऊना में दलित युवकों की पिटाई के मामले में नौ साल बाद सज़ा सुनाई.
ऊना में मौजूद बीबीसी संवाददाता गोपाल कटेशिया के मुताबिक़, सभी पांच दोषियों को पांच साल की कैद की सज़ा और पांच हज़ार रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया है.
अदालत ने 16 मार्च को अपने फ़ैसले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था और 35 लोगों को बरी किया था.
2016 में कथित गौरक्षकों ने ऊना के मोटा समढियाला में एक मृत गाय ले जा रहे दलित युवकों की पिटाई की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुआ था.
इस घटना की गूंज न केवल गुजरात में बल्कि देश और विदेश में भी सुनाई दी थी. इसकी वजह से गुजरात और देश के अन्य हिस्सों में दलितों की स्थिति पर बहस छिड़ गई थी.