हैकिंग से फ़ेसबुक-ट्विटर प्रभावित

फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का कामकाज हैकिंग के कारण प्रभावित हुआ है.
ट्विटर को दो घंटों से भी ज़्यादा समय के लिए ऑफ़लाइन करना पड़ा जबकि फ़ेसबुक की सेवाओं पर भी कुछ हद तक असर पड़ा.
इन कंपनियों के मुताबिक गुरुवार को हैकरों ने डिनायल ऑफ़ सर्विस एटैक्स प्रक्रिया के ज़रिए उन्हें परेशान किया.
डिनायल ऑफ़ सर्विस(डीओएस) एटैक्स कई तरह के हो सकते हैं. आमतौर पर इसमें कंपनी के सर्वर पर इतना डाटा भेज दिया जाता है कि सर्वर काम करना बंद कर देता है.
सेक्युरिटी फ़र्म एवीजी के मुख्य शोधकर्ता अधिकारी रॉजर थॉम्पसन का कहना है कि हैकिंग की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अकसर प्रदर्शनकारी विरोध जताने के लिए करते हैं, खा़सकर सरकारी वेबसाइटों के ख़िलाफ़.
उनका कहना था, "विश्व मीडिया की नज़र अब हमेशा ट्विटर पर रहती है. हैकिंग करने वाले इन लोगों का मकसद इस ओर ध्यान दिलाना हो सकता है कि ये वेबसाइटें ख़तरे से परे नहीं है."
हैकिंग
ट्विटर के सह संस्थापक बिज़ स्टोन ने कंपनी के ब्लॉग पर लिखा है, "इस तरह के हमले ग़लत इरादे से किए जाते हैं ताकि ऑनलाइन बैंकिंग और ट्विटर जैसी सेवाओं का कामकाज ठप्प किया जा सके."
कुछ देर बंद रहने के बाद ट्विटर की सेवाएँ फिर शुरु कर दी गईं.
फ़ेसबुक की ओर से कहा गया है कि उसने सेवा बंद तो नहीं की पर वो प्रभावित ज़रूर हुआ था.
वेबसाइट के प्रवक्ता ब्रेंडी बार्कर ने एएफ़पी को बताया कि स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और उपभोक्ताओं का डाटा चोरी नहीं हुआ है.
इससे पहले भी हैकरों ने फ़ेसबुक और ट्विटर को निशाना बनाया था.
इस साल जनवरी में ट्विटर ने बताया था कि 33 लोगों के एकाउंट हैक किए गए हैं जिसमें अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और गायिका ब्रिटनी स्पियर्स शामिल हैं.
फ़ेसबुक और ट्विटर के करोड़ों सदस्य हैं. फ़ेसबुक का दावा है कि इसके करीब 25 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं जबकि ट्विटर के करीब चार करोड़ 50 लाख सदस्य हैं.
हाल ही में ईरान में हुए प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आपस में समन्वय बिठाने के लिए इन वेबसाइटों का जमकर इस्तेमाल किया था.
इन प्रदर्शनकारियों का मानना था कि ईरान में हुए राष्ट्रपति चुनावों में धाँधली हुई है.
प्रदर्शनों के दौरान ट्विटर को अपनी वेबसाइट का अपग्रेड करना था लेकिन प्रदर्शनकारियों की सहूलियत के लिए ये काम टाल दिया गया था.
हालांकि बीबीसी से बातचीत में ट्विटर के सह संस्थापक इवान विलियम्स ने इस बात से इनकार किया था कि ऐसा अमरीकी विदेश मंत्रालय के कहने पर किया गया था.
































