ईरान में सामूहिक बलात्कारों से विवाद

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ईरान में महिलाओं पर कट्टरपंथियों के बढ़ते यौन आक्रमणों से देश में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है.
ईरान के इस्फ़हान शहर में पिछले महीने एक निजी पार्टी पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया और महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया.
इस घटना के एक सप्ताह बाद धार्मिक महत्व के शहर मशद में कुछ अज्ञात हमलावरों ने एक छात्रा के ऊपर हमला कर उसके साथ बलात्कार किया. ये घटना एक विश्वविद्यालय परिसर में घटी जहाँ काफ़ी पहरा रहा करता है.
दोनो ही घटनाओं में अधिकारियों ने पीड़ित महिलाओं पर दोषारोपण किया. उन्होंने कहा कि महिलाएं ग़ैर इस्लामी तरीक़े से व्यवहार कर रही थीं और उन्होंने ठीक ढंग से हिजाब नहीं पहना था.
इन चर्चित मामलों में अधिकारियों के महिलाओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों से महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले बेहद नाराज़ हैं.
ये घटनाएँ पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई हैं. हर तरफ़ लोग इस तरह की घटनाओं के कारण और निदान के सही तरीकों पर बहस कर रहे है.
‘पीड़ित ही ज़िम्मेदार’
24 मई को ख़ोमैनी शहर के एक इलाके में दो परिवारों ने कुछ मित्रों को दावत पर बुलाया. दावत उनके बगीचे में थी और बगीचा ऊँची दीवारों से घिरा हुआ था. कुल मिला कर 14 दोस्त उस दावत में शामिल हुए.
ऐसी ख़बरें हैं कि क़रीब एक दर्जन हथियारबंद लोग लंबे चाकुओं के साथ आ धमके और उन्होंने वहाँ मौजूद पुरुषों में से कुछ को कमरों में बंद कर दिया और कुछ को पेड़ों से बाँध दिया. मेहमानों में शामिल महिलाओं को नज़दीक की एक जगह पर ले जा कर सामूहिक रुप बलात्कार किया गया. पीड़ित महिलाओं में से एक गर्भावस्था के अंतिम चरण में थी.
एक मेहमान ने किसी तरह से पुलिस को फ़ोन किया पर जब तक पुलिस आई तब तक ज़्यादातर हमलावर भाग चुके थे.
ख़ौमेनी शहर में ये ख़बर आग की तरह फैल गई पर पुलिस की तरफ़ से कोई हफ़्ते भर तक कोई बयान नहीं आया.
लोगों में नाराज़गी बढ़ती गई और एसएमएस के ज़रिए अदालत के बाहर एक प्रदर्शन आयोजित किया गया. आख़िरकार जब पुलिस का बयान आया तो उसने आग में घी का काम किया.

ख़ौमेनी शहर के इमाम मूसा सलेमी ने जुमे की नमाज के बाद अपने भाषण में कहा,"जिनके साथ बलात्कार हुआ वो कोई तारीफ़ के काबिल नहीं थीं...जो लोग वहाँ जमा थे उनमें से केवल दो रिश्तेदार थे. बाक़ी लोग बाहरी थे, वे शराब पी रहे थे और नाच रहे थे."
शहर के पुलिस अधीक्षक कर्नल हुसैन यारदोस्ती ने भी इसी तरह की बात की. कर्नल यारदोस्ती ने कहा,"मुझे लगता है कि उनके परिवार वाले ज़िम्मेदार हैं. अगर उन्होंने ढंग के कपड़े पहने होते और संगीत इतना तेज़ नहीं होता तो बलात्कारियों के ज़हन में ये ख़याल ही नहीं आता कि ये एक गिरे हुए लोगों का जमावड़ा है."
ऐसी ख़बरें हैं कि अधिकारी पीड़ितों के खिलाफ़ ही कदम उठाने के बारे में विचार कर रहे हैं.
‘बुरे परिणाम होंगे’
महिला संगठनों को सरकारी प्रतिक्रिया ख़तरनाक लग रही है. बीबीसी फ़ारसी सेवा को दिए गए एक इंटरव्यू में एक वकील और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता शादी सद्र ने कहा कि अगर महिलाओं की वेशभूषा को बलात्कार का जायज़ कारण बताया जाता रहा तो समाज को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
ईरानी सुरक्षा एजेंसियों के ऊपर वर्ष 2009 के प्रदर्शनों के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं को यंत्रणा देने और उनके साथ बलात्कार करने के आरोप लगे थे.
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते यौन अपराध युवाओं के ज़्यादातर अलग-अलग रहने के कारण हो रहे हैं.
तमाम हंगामे के बीच तीन लोगों को ख़ोमैनी शहर और मशहद में बलात्कार के अलग-अलग मामलों में फाँसी की सज़ा दी गई.
इनमें से दो लोगों को सार्वजनिक रुप से फाँसी दी गई. अधिकारियों का मानना है कि सार्वजनिक फाँसी से इस तरह की घटनाओं पर रोक लगेगी.
































