सांसदों के सामने मर्डोक का बयान

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न्यूज़ कॉर्पोरेशन के प्रमुख रूपर्ट मर्डोक ने ब्रिटेन के फ़ोन हैकिंग विवाद में संसदीय समिति के सामने अपना एक बयान पढ़ा. मर्डोक अपना ये बयान सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू होने के पहले पढ़ना चाहते थे, मगर समिति के अध्यक्ष जॉन विटिंगडेल ने इसकी अनुमति नहीं दी और कहा कि सवाल-जवाब का सिलसिला ख़त्म होने के बाद ही ये बयान पढ़ा जाने दिया जाएगा.
“अध्यक्ष महोदय, सहायक समिति के सदस्यगण, आपकी अनुमति से मैं अपना संक्षिप्त बयान पढ़ना चाहता हूँ.
मैं और मेरा बेटा यहाँ आप सबके लिए, संसद के लिए और ब्रिटेन की उस जनता के लिए बड़े आदर का भाव लेकर आए हैं जिनके आप प्रतिनिधि हैं.
ये मेरी ज़िंदगी का सबसे लाचारी भरा दिन है. जो कुछ भी हुआ, उसे देखते हुए हमारा आज यहाँ जाना ज़रूरी था.
आगे कुछ कहने से पहले, जेम्स और मैं कहना चाहते हैं कि जो कुछ भी हुआ हमें उसपर बेहद अफ़सोस है, विशेष रूप से अपराध का शिकार हुए लोगों के वॉयसमेल सुनने की घटना को लेकर.
मेरी कंपनी में 52,000 कर्मचारी हैं. मैं 57 वर्षों से उनका नेतृत्व कर रहा हूँ और जो ग़लतियाँ हुई हैं उनमें मेरा भी हिस्सा रहा है.
मैं बहुत सारे देशों में रहा हूँ, हज़ारों ईमानदार और कर्मठ पत्रकारों को नौकरियाँ दी हैं, लगभग 200 अख़बारों का मालिक रहा हूँ और दुनिया भर में लोगों और परिवारों के बारे में अनगिनत कहानियाँ सुनता रहा हूँ.
मगर मुझे याद नहीं कि मैं कभी भी इतना दुःखी नहीं हुआ, जितना मैं डाउलर परिवार के ऊपर जो बीता उसे जानकर हुआ हूँ, ना ही मुझे याद है कि मैं कभी भी इतना नाराज़ हुआ हूँ जितना कि ये जानने के बाद हुआ कि न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड ने कैसे उनकी पीड़ा को और बढ़ाया.
मैं डाउलर परिवार को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे उनसे मिलकर व्यक्तिगत रूप से माफ़ी माँगने का मौक़ा दिया.
मैं फ़ोन हैकिंग का शिकार हुए सभी लोगों को बताना चाहता हूँ कि मैं कितना शर्मिंदा हूँ. माफ़ी माँगने से जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता. फिर भी, मैं उनकी निजता के भयानक उल्लंघन के लिए उनसे माफ़ी माँगना चाहता हूँ.
मैं उनका क्षोभ समझता हूँ. और मैं उनसे माफ़ी लेने के लिए अथक प्रयास करना चाहता हूँ.
मैं आज की इस समिति और भविष्य में होनेवाली पूछताछ की प्रक्रियाओं से सहयोग करने के अपने दायित्व को समझता हूँ. हम आपके सवालों का यथासंभव जवाब देंगे और अगर आज कुछ नहीं बता सके तो बाद में उसका जवाब देने का प्रयास करेंगे.
कृपया याद रखें कि अभी भी कुछ तथ्य और जानकारियाँ सामने आनी बाक़ी हैं.
हम अब जानते हैं कि न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड में बहुत गड़़बड़ियाँ हुईं. एक अख़बार जो दूसरों को कटघरे में खड़ा करता था, वो जब अपनी बारी आई तो ऐसा करने में नाकाम रहा. जो हुआ वो उन मान्यताओं के बिल्कुल उलट था जिन्हें मैं मानता हूँ.
इससे ना केवल हमारे पाठकों और मेरे साथ छल हुआ, बल्कि हज़ारों दूसरे पेशेवर लोग भी ठगे गए जो दुनिया भर में हमारे दूसरे विभागों में काम करते हैं.
तो, मैं बिल्कुल साफ़-साफ़ कहना चाहता हूँ – लोगों के वॉयसमेल सुनकर उनकी निजता का उल्लंघन करना ग़लत है. पुलिस अधिकारियों को सूचना के लिए पैसे देना ग़लत है. वो हमारी आचारसंहिता से नहीं मिलते और उस कंपनी में इसकी कोई जगह नहीं है जिसे मैं चलाता हूँ.
मगर केवल माफ़ी माँगना ही पर्याप्त नहीं है. चीज़ों को दुरूस्त भी किया जाना चाहिए. कोई भी बहाना नहीं चलेगा. इसलिए न्यूज़ इंटरनेशनल पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहा है जिसका काम न्याय दिलाना है.
ये हमारा दायित्व है कि हम क़ानूनी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करें. मुझे विश्वास है कि समिति इस बात को समझेगी.
मैं चाहता हूँ कि हम इन समस्याओं को पहले भाँपकर पहले सुलझा पाते. 2007 में जब दो लोगों को जेल भेजा गया था, मुझे लगा कि ये मुद्दा सुलझ गया. पुलिस ने अपनी जाँच पूरी कर ली है और मुझे बताया गया कि न्यूज़ इंटरनेशनल ने आंतरिक समीक्षा कर ली है.
मुझे पूरा विश्वास है कि जेम्स ने जब दोबारा न्यूज़ कॉर्पोरेशन में काम शुरू किया तो उसे लगा कि ये मुद्दा ख़त्म हो चुका है. ये ऐसी बातें हैं जिन्हें आप निःसंदेह आज नहीं उठाना चाहेंगे.
इस देश ने मुझे, मेरी कंपनियों को और हमारे कर्मचारियों को बहुत सारे मौक़े दिए हैं. मैं उनका आभारी हूँ. मुझे आशा है कि एक दिन ब्रिटेन को हमारे योगदान को भी पहचाना जाएगा.
इन सबसे पहले, मुझे उम्मीद है कि आपके सवालों से जो प्रक्रिया आज शुरू हुई है, उससे हम अतीत में की गई ग़लतियों को पहचानेंगें और उन्हें दोबारा होने से रोकेंगे, और आनेवाले वर्षों में, हमारी कंपनी और ब्रिटिश पत्रकारिता में भरोसे को बहाल करेंगे.
मैं इसे साकार करने के लिए जो बन पड़ेगा करूँगा. धन्यवाद."
































