कोविड 19 का नया वेरिएन्ट जानिए कितना ख़तरनाक है

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एक अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 का नया वेरिएंट अपने पुराने से ज़्यादा संक्रामक है.

इसमें बताया गया है कि वायरस का ये नया रिप्रोडक्शन (प्रजनन) नंबर या आर नंबर को 0.4 से 0.7 के बीच बढ़ा देता है.

अनुमान है कि ब्रिटेन में आर नंबर 1.1 से 1.3 के बीच है. अगर यहां कोरोना वायरस के मामलों की संख्या घटानी है तो आर नंबर को 1.0 से नीचे लाना होगा.

क्या है आर नंबर

आर नंबर का मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति औसतन और कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है. यानी किसी वायरस में फैलने की कितनी क्षमता है. अगर ये एक नंबर से ज़्यादा है तो महामारी बढ़ेगी.

इम्युनिटी के बिना आबादी में खसरे का आर नंबर 15 है. इसका मतलब है कि खसरे से संक्रमित एक व्यक्ति औसतन 15 लोगों को संक्रमित कर सकता है.

कोरोना वायरस, आधिकारिक तौर पर सार्स कोविड-2, का आर नंबर तीन के क़रीब है, अगर इसे रोकने के कोई उपाय ना अपनाए जाएं.

आर नंबर निकालने के लिए किसी वायरस से मरने वाले, अस्पताल में भर्ती या वायरस से पॉज़िटिव आने वाले लोगों की संख्या का इस्तेमाल होता है और वायरस के फ़ैलने की क्षमता का अनुमान लगाया जाता है.

अगर आर नंबर एक से ज़्यादा है तो इसका मतलब है कि संक्रमण के मामले बढ़ेंगे. यानी कोई संक्रमित व्यक्ति कम से कम एक व्यक्ति में तो संक्रमण फैला रहा है.

लेकिन, अगर आर नंबर एक से कम है तो इसका फैलाव रुक सकता है क्योंकि तब ये किसी भी व्यक्ति में संक्रमित नहीं हो रहा होगा.

लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के प्रोफ़ेसर एक्सल गैंडी कहते हैं कि वायरस के दोनों प्रकार के बीच 'काफ़ी ज़्यादा' अंतर है.

वे कहते हैं, "वायरस का नया प्रकार कितनी आसानी से फैल सकता है, ये एक बड़ा अंतर है. जब से इस महामारी की शुरुआत हुई है तब से सामने आया ये सबसे ज़्यादा गंभीर बदलाव है."

इम्पीरियल कॉलेज का अध्ययन कहता है कि इंग्लैंड के नवंबर के लॉकडाउन में नए प्रकार का संक्रमण तीन गुना हो गया था और पिछले वेरिएंट का संक्रमण घटकर एक तिहाई रह गया था.

दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 के मामले तेज़ी से बढ़ने लगे और गुरुवार को एक दिन में कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या रिकॉर्ड पर पहुंच गई.

सभी उम्र के लोगों में तेज़ संक्रमण

शुरुआती नतीज़ों से पता चला था कि वायरस 20 साल से कम उम्र के लोगों में ज़्यादा तेज़ी से फैलता है. ख़ासतौर पर माध्यमिक स्कूल की उम्र के बच्चों में.

लेकिन, प्रोफ़ेसर गैंडी के मुताबिक ताज़ा डेटा बताता है कि ये सभी उम्र के लोगों में तेज़ी से फैलता है. प्रोफ़ेसर गैंडी शोध करने वाली टीम के सदस्य थे.

प्रोफ़ेसर कहते हैं, "दोनों डेटा में अंतर की वजह ये हो सकती है कि शुरुआती डेटा नवंबर के लॉकडाउन के दौरान इकट्ठा किया गया था जब स्कूल खुले हुए थे और वयस्कों से जुड़े कामकाज़ों पर प्रतिबंध लगे थे. अब हम देख रहे हैं कि नया वायरस हर उम्र के लोगों के बीच फैल रहा है."

कड़े प्रतिबंधों की ज़रूरत

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर जिम नाएस्मिथ कहते हैं कि उन्हें लगता है कि नई जानकारियों को देखते हुए जल्द ही कड़े प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत होगी.

वो कहते हैं, "इम्पीरियल का डेटा आज तक का सबसे बेहतरीन विश्लेषण है जो संकेत करता है कि अब तक हमने जो उपाय अपनाए हैं वो वायरस के नए प्रकार के सामने आर नंबर को एक से नीचे लाने में कामयाब नहीं होंगे."

प्रोफ़ेसर नाएस्मिथ के मुताबिक, "आसान शब्दों में कहें तो जब तक हम कुछ अलग नहीं करते हैं तब तक वायरस का नया प्रकार फैलता रहेगा, ज़्यादा संक्रमण होंगे, ज़्यादा लोग अस्पताल में भर्ती होंगे और ज़्यादा मौतें होंगी."

बीबीसी के विज्ञान संवाददाता, पल्लब घोष का विश्लेषण

इस शोध की सबसे डरावनी बात ये है कि इंग्लैंड में नवंबर में जो लॉकडाउन लगाया गया था, भले ही वो कई लोगों के लिए सख़्त हो लेकिन वो कोरोना वायरस के नए प्रकार को फैलने से नहीं रोकेगा.

उन प्रतिबंधों में जहाँ पुराने वायरस के मामले घटकर एक तिहाई हो गए वहीं नए प्रकार के मामले तीन गुने हो गए. यही वजह है कि देश में अचानक नए प्रतिबंध क्यों लगाए गए हैं.

ये साफ़ नहीं है कि मौजूदा प्रतिबंध क्या वायरस के नए प्रकार को नियंत्रित कर पाएंगे. ये देखते हुए कि वायरस के पुराने प्रकार को रोकने के लिए दो लॉकडाउन की ज़रूरत पड़ी थी. कई वैज्ञानिकों को डर है कि नए प्रकार के लिए और सख़्ती की ज़रूरत होगी.

पर्याप्त लोगों को वैक्सीन मिलने पर संक्रमण का स्तर कम होना शुरू हो जाएगा लेकिन तब तक लोगों के लिए पहले से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है कि वो सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों का पालन करें, मास्क पहनें और अपने हाथ धोते रहें.

क्या वैक्सीन होगी प्रभावी

नया साल अगले कुछ महीनों में जीवन सामान्य होने की उम्मीद लेकर आया है लेकिन वायरस के इस नए प्रकार से हमें आने वाले दिनों और हफ़्तों में लड़ना होगा.

वॉरविक यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर लॉरेंस योंग कहते हैं कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि वायरस के इस प्रकार पर वैक्सीन प्रभावी होगी.

वह कहते हैं, "वायरस के प्रकार महामारी की शुरुआत से ही रहे हैं और ये प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें वायरस विकसित होता है और अपने मेज़बान शरीर के अनुकूल बनता है."

"वायरस में हुए अधिकतर बदलावों का उसी प्रकृति पर कोई असर नहीं पड़ता है लेकिन कभी-कभी ये बदलाव संक्रमित करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से लड़ने की वायरस की क्षमता को बढ़ा देते हैं."

यह समझने के लिए और शोध की ज़रूरत है कि वायरस का नया प्रकार इतनी तेज़ी से क्यों फैल रहा है. लेकिन शुरुआती संकेत हैं कि वैक्सीन इस पर प्रभावी होनी चाहिए.

कोविड-19 का ये नया प्रकार नवंबर में सामने आया था और माना जा रहा है कि इसकी शुरुआत दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड में सितंबर में हुई थी.

इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि ये ज़्यादा घातक है लेकिन ये मामलों की संख्या को बढ़ाएगा जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा.

वायरस का ये नया प्रकार उत्तरी आयरलैंड के अलावा पूरे ब्रिटेन में पाया गया है लेकिन लंदन, दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी इंग्लैंड में इसका ज़्यादा प्रभाव है.

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