शावर में है ख़तरा

शावर से नहाना यानी फ़ुहारा स्नान ख़तरे से ख़ाली नहीं है. यह कहना है अमरीकी वैज्ञानिकों का.
अमरीका में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि शावर लेने से आप बीमार हो सकते हैं, ख़ासतौर पर तब जब आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो.
युनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोरादो के वैज्ञानिकों का कहना है कि शावर की जांच के बाद पता चला कि कोई एक तिहाई शावर रोग पैदा करने वाले जीवाणुओं से संक्रमित थे.
अमरीका की नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस के एक जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि संक्रमित शावरों की भीतरी सतह में माइकोबैक्टीरियम एवियम नामक जीवाणुओं की एक सतह बैठ जाती है जो कि पानी के आपके सर व शरीर पर गिरते समय हवा में फैल जाती है.
यह आपके फैफड़ों के भीतर घुस कर आपको गंभीर रुप से संक्रमित कर सकती है.
इसकी चपेट में बुज़ुर्ग लोगों के आने की संभावना ज़्यादा रहती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है. ये बैक्टीरिया प्लास्टिक के शावरों में ज़्यादा पाए जाते हैं.
इसलिए इन वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि लोग धातु के शावरों का प्रयोग ज़्यादा से ज़्यादा करने की कोशिश करें.
धातु का शावर
इस शोध के शीर्ष वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर नॉरमन पेस का कहना है, "प्लास्टिक के शावरों में माइकोबैक्टीरियम एवियम की बायोफ़िल्म के जमने की ज़्यादा संभावना रहती है जबकि धातु के शावर अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं."
इस अध्ययन मे यह भी पाया गया है कि दरअसल संक्रमित शावर निमोनिया व छाती के कई संक्रमण के स्रोत हो सकते हैं.
इस तरह के संक्रमण स्पा पूल्स या गर्म टब से भी फैलते हैं.
ये बैक्टीरिया टीबी (क्षय रोग) की ही तरह ही पानी के स्थलों में पाया जाता है. आमतौर पर स्वस्थ लोग इसके शिकार नहीं होते.
तो आपको चाहिए कि आप अपने बाथरूम के शावर की जांच करें और धातु का शावर लगवा लें. अगर आम भारतीयों की तरह आप बाल्टी से नहाते हैं तो आप अपेक्षाकृत सुरक्षित रहेंगे.












