'जलवायु पर नेता बच्चों की बात सुनें'

भारत की तेरह वर्षीय छात्रा युगरत्ना श्रीवास्तव संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में भाषण देंगी. वे जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुददे पर विश्व भर के नेताओं के समक्ष भारतीय समयानुसार मंगलवार शाम को बोलेंगी.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 64वें अधिवेशन से एक दिन पहले मंगलवार को इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है जिसमें दिसंबर में कोपेहेगन में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में उठाए जाने वाले कुछ मुद्दों पर चर्चा होगी.
इसमें विश्व भर के एक सौ से ज़्यादा देशों के राजाध्यक्ष या उनके प्रतिनिधि शामिल होंगे.
इन नेताओं में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी शामिल हैं.
विश्व के बड़े बड़े नेताओं को संबोधित करने का अनोखा मौका पाकर जोश से भरी युगरत्ना बहुत खुश हैं. वे कहती हैं, “मेरे लिए यह बहुत गर्व की बात है कि मैं इतने बड़े मंच पर, एक अहम मुद्दे पर दुनिया भर के नेताओं के सामने अपना भाषण देने जा रही हूं.”
भारत के लखनउ शहर के एक स्कूल की नवीं की छात्रा युगरत्ना बताती हैं कि वह जब छठीं कक्षा मे थीं तभी से पर्यावरण से संबंधित मुद्दों में दिलचस्पी बढ़ी और तब से उन्होंने कई स्वयंसेवी संस्थाओं में काम भी किया है.
उन्होंने पेड़ लगाने के अभियान में भाग लिया, पेड़ों को काटने से रोकने में भी वह शामिल रही हैं.
वैसे उनके पिता भी बॉटनी के प्रोफ़ेसर हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सम्मेलन में भाग लेने के लिए युगरत्ना अपनी मां डॉक्टर रोशनी श्रीवास्तव के साथ आई हैं.
ओबामा से मिलने की इच्छा
पिछले साल युगरत्ना ने नॉर्वे में पर्यावरण से जुड़े एक युवा सम्मेलन में भी भाग लिया था. वहां वह जूनियर बोर्ड की सदस्य भी थीं.
युगरत्ना दुनिया भर के बच्चों की ओर से अपील करती हैं, “मैं चाहती हूं कि दुनिया भर के यह बड़े-बड़े नेता हम बच्चों की बातें सुनें. और हमारी सिफ़ारिशों को वह अपने फ़ैसलों में शामिल करें. क्यूँकि हम बच्चे ही अपने बड़ों से अगले 70 सालों के लिए धरती विरासत में लेंगे इसलिए हम चाहते हैं कि वह हमारी बातें सुनें और पर्यावरण को बचाकर हमें धरती अच्छी हालत में दें.”
अब 13 साल की उम्र में युगरत्ना एक कुशल पर्यावरण कार्यकर्ता की तरह विश्व के अलग अलग देशों के बड़े बड़े मंचों पर भाषण देती हैं.
उनका कहना है कि विश्व भर के नेताओं को बच्चों की बातें सुननी होंगी क्यूँकि भविष्य तो बच्चो का ही है. और वह ऐसी ही गुज़ारिश अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलकर भी करना चाहती हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति से मिलने का शौक रखने वाली युगरत्ना कहती हैं, “मैं राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मिलना चाहती हूं और उनसे भी विनती करना चाहती हूं कि धरती को बचाने के लिए हम बच्चे इस मामले में नेताओं के साथ हैं औऱ अब वह हमारी बातें सुनें औऱ जब नीतियां बनाएं तो हम बच्चों का ख्याल रखें. हम उन्हे यह एहसास दिलाना चाहते हैं कि यह मुद्दा कितना अहम है और हम बच्चों का भविष्य इससे जुड़ा है.”
वह इस बात पर ज़ोर देती हैं कि विश्व भर के नेताओं को चाहिए कि जब वह कोपेनहेगन में पर्यावरण के मुद्दे पर मिलें तो किसी प्रकार की संधि को आखिरी रूप ज़रूर दें.
युगरत्ना का कहना है कि पर्यावरण के मामलें में अब तक जो कोताहियां हुईं सो हुईं लेकिन अब वो वक़्त गुज़र गया और अब सबको अपने मौजूदा दौर और भविष्य के बारे में सोचना होगा.
दिसंबर में कोपेहेगन में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने पर महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जाएंगे.
































