बिना उपवास कराएं कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट

खून की जाँच

एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज़ों को अब कॉलेस्ट्रॉ़ल टेस्ट करवाने से पहले उपवास रखने की ज़रूरत नहीं है.

कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन के लिए तीन लाख लोगों के कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट नतीज़ों का परीक्षण किया.

उन्होंने पाया कि खाना खाने के बाद भी लोगों के कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट उतने ही सटीक नतीजे दे रहे हैं जितना कि उपवास के बाद होने वाले परीक्षणों में.

दरअसल, कई दशकों से यह धारणा चली आ रही है कि कॉलेस्ट्रॉल के परीक्षण से 12 घंटे पहले मरीज़ को कुछ भी खाना बंद कर देना चाहिए.

कॉलेस्ट्रॉल का टेस्ट दिल के मरीजों के लिए ज़रूरी होता है ताकि उनको संभावित ख़तरे का अंदाज़ा लगाया जा सके.

ऐसे में होता यह था कि अगर मरीज ने सुबह नाश्ता कर लिया है तो उस इस टेस्ट से इनकार कर दिया जाता था और 12 घंटे बाद बिना कुछ खाए आने को कहा जाता था.

इसके पीछे तर्क यह होता था कि ‘बैड’ कॉलेस्ट्रॉल कहे जाने वाले एलडीएल यानी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन की खून में जाँच करने के लिए ज़रूरी है कि खाने को पचने के लिए और खून से वसा के कणों को साफ़ होने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए.

इसी तर्क के आधार पर लोगों को करीब 12 घंटे का उपवास रखकर कॉलेस्ट्रॉल परीक्षण के लिए आने को कहा जाता था.

लेकिन 21 देशों में किए गए 68 सर्वेक्षणों के बाद अब यह तर्क ग़लत साबित होता नज़र आ रहा है.

रुधिर प्रोटीन पर विवाद

पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर भी विवाद छिड़ा हुआ है कि क्या दिल की बीमारी के ख़तरे का अंदाज़ा लगाने के लिए कॉलेस्ट्रॉल परीक्षण से कहीं ज़्यादा कारगर तरीका रक्त प्रोटीन, एपोलिपो-प्रोटीन का परीक्षण करना है.

इस ताज़े शोध ने इस विवाद को भी हल करने वाले तथ्य उजागर किए हैं.

शोधकर्ताओं के मुताबिक एलडीएल का गुड कॉलेस्ट्रॉल कहे जाने वाले हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी एचडीएल के साथ परीक्षण करने पर उतनी जानकारी मिल जाती है जितनी कि एपोलिपो-प्रोटीन ए-1 और बी का परीक्षण करने पर मिलती है.

माना जा रहा है कि ताज़ा शोध के बाद ब्रिटेन में चिकित्सकों को नए दिशा निर्देश जारी किए जा सकते हैं.

इस शोध को अमरीकी मेडिकल एसोसिएशन की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है.