धूम्रपान छोड़ने के लिए मुफ़्त 'किट'

एक शोध के मुताबिक ब्रिटेन में धूम्रपान करने वालों में से लगभग आधे लोग नए साल पर धूम्रपान छोड़ने की इच्छा रखते हैं. इसके मद्देनज़र वहाँ 'क्विट स्मोकिंग किट' जारी की गई है, जो लोगों को मुफ़्त में मिलेगी.
एनएचएस इस स्मोकिंग क्विट किट में तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायक एक खिलौना, कुछ ऑडियो दे रहा है और साथ ही ये भी बता रहा है कि धूम्रपान छोड़ने से धन की कितनी बचत हो सकती है.
शोध के अनुसार धूम्रपान करने वालों में से 54 फ़ीसदी से अधिक लोगों ने नए साल में धूम्रपान छोड़ने की इच्छा जताई है.
हालाँकि धूम्रपान छोड़ो अभियान चलाने वालों को विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है और धूम्रपान करने वाले एक ग्रुप ने विज्ञापन पर किए जा रहे ख़र्च की आलोचना की है और कहा है कि धूम्रपान छोड़ने का फ़ैसला धूम्रपान करने वालों पर छोड़ देना चाहिए.
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एनएचएस ने लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करने के लिए टेलीविज़न पर विज्ञापन दिए हैं. विज्ञापन में बच्चों को गाना गाते हुए दिखाया गया है कि आप क्यों नहीं धूम्रपान छोड़ देते.
एनएचएस की धूम्रपान रोको सेवा का कहना है कि धूम्रपान करने वाले 42 फ़ीसदी लोग नए साल पर निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी एनआरटी आजमाना चाहते हैं.
ब्रिटेन के जनस्वास्थ्य मंत्री गिलिएन मेरन कहते हैं, "धूम्रपान छोड़ना बहुत मुश्किल है. इसके लिए प्रबल इच्छा शक्ति और प्रयासों की ज़रूरत होती है."
उनका मानना है कि धूम्रपान करने वाले 10 लोगों में से तकरीबन सात लोग इससे मुक्ति चाहते हैं. सरकार इसमें उनकी मदद करना चाहती है.
लेकिन धूम्रपान करने वाले संगठन फॉरेस्ट के डायरेक्टर साइमन क्लार्क इस अभियान से नाराज हैं. उनका कहना है, "फिर से एक और अभियान. क्या आप वाकई सोचते हैं कि सरकार धूम्रपान के ख़िलाफ़ है. धूम्रपान छोड़ो अभियान में करदाताओं का कितना धन ख़र्च हुआ है. अगर लोग वाकई धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं तो ये फ़ैसला सिर्फ़ वही कर सकते हैं."
उनका कहना है कि धूम्रपान करने वालों को ये अहसास दिलाना कि उन्होंने कोई अपराध किया है, ये एक तरह की भावनात्मक ब्लैकमेलिंग है और इस अभियान में बच्चों का इस्तेमाल बिल्कुल गलत है.
आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2009 में ब्रिटेन में 7 लाख 70 हज़ार लोगों ने धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लिया था और शोध बताता है कि सिर्फ़ पाँच फ़ीसदी यानी 38,500 लोगों ने एक साल तक धूम्रपान नहीं किया.
शोध से ये भी पता चला कि धूम्रपान छोड़ने वालों में अधिकतर अपने पहले प्रयास में ही धूम्रपान नहीं छोड़ सके.












