डायनासोर कैसे बना प्रभावी

एक शोध के मुताबिक क़रीब 20 करोड़ वर्ष पहले विशाल ज्वालामुखियों की गतिविधि के कारण डायनासोर काफ़ी प्रभावी हुआ था.
अब तक ये तो सब जानते थे कि एक विशाल उल्का पिंड के पृथ्वी पर गिरने से डायनासोर का अस्तित्व समाप्त हो गया. लेकिन उनके प्रभावशाली बनने के कारणों के बारे में लोग कम जानते है.
पीएनएएस पत्रिका में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि ज्वालामुखियों के फटने से जलवायु परिवर्तित हो गया.
ये ज्वालामुखी इतना विनाशकारी था कि इससे कई जीवों का विनाश हो गया जिसमें डायनासोर के प्रतिस्पर्धी भी शामिल थे.
अमरीका और ताइवान के शोधकर्ताओं ने ज्वालामुखियों से निकले लावा में ऐसे कई साक्ष्य पाए हैं.
डायनासोर के बच जाने के सवाल पर शोधकर्ता कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन डॉक्टर ह्वाइटसाइड कहते हैं कि ये इसका बच जाना महज एक खुशक़िस्मती रही होगी.
विनाशकारी ज्वालामुखी और ट्रियासिक काल में चौपाया जानवारो के विनाश का कोई संबंध है, इस अध्ययन पर पहले कोई नहीं विश्वास नहीं कर रहा था.
लेकिन इससे ये पता चलता है कि बड़े डायनासोर 20 करोड़ साल पहले ट्रियासिक काल के समाप्त होने के तुरंत बाद उभरे.
इस शोध से ये भी अंदाज़ा मिलता है कि धरती से कोई उल्का पिंड टकराया अवश्य था और उसके प्रभाव से डायनासोर के कई प्रतिस्पर्धियों का सफाया हो गया जिससे डायनासोर फल-फूल सके और काफ़ी प्रभावशाली हो गए.












