पौधों की प्रजातियों पर विलुप्त होने का ख़तरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के पौधों की प्रजातियों के पाँचवां हिस्से पर लुप्त होने का ख़तरा है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि ये अब तक पौधों की प्रजातियों पर किया गया अब तक सबसे अहम अध्ययन है.

इस अध्ययन का नेतृत्व लंदन के रॉयल बॉटेनिकल गार्डन के वैज्ञानिकों ने किया है.

अध्ययन के अनुसार दुनिया की लगभग तीन लाख 80 हज़ार पादप प्रजातियों को विलुप्त होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

इसकी मुख्य वजह मानवीय हस्तक्षेप है. बहुत से देशों में जंगलों को खेती के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है.

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ऐसे बहुत से पौधे हैं जिनके खाने अथवा औषधी के रूप में इस्तेमाल की संभावना तलाशने से पहले ही वो विलुप्त हो जाएँगे.

इस संबंध में अगले महीने जापान में एक सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है.

इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र जैवविविधता के संबंध में नए लक्ष्यों को तय किया जाएगा.

इसके पहले इंटरनेशनल यूनियन फ़ॉर द कंज़र्वेशन ऑफ़ नेचर (आइयूसीएन) नामक संस्था ने कहा था कि जीवों के भी लुप्त होने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

आइयूसीएन का कहना था कि दुनिया में पाए जानेवाले जीवों में से एक तिहाई लुप्त होने के कगार पर है और ये ख़तरा हर दिन बढ़ता जा रहा है.

आईयूसीएन ने एक सूची भी जारी की थी और कहा था कि 17,291 जीवों की प्रजातियां गंभीर ख़तरे में हैं.