इंटरनेट सुरक्षा पर नया प्रस्ताव

माइक्रोसॉफ़्ट के एक वरिष्ठ शोधकर्ता ने सुझाव दिया है कि ऐसी वेबसाइटों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए जिसमें वायरस हो.
शोधकर्ता स्कॉट चार्नी का कहना है कि उन्होंने विभिन्न बीमारियों से होने वाली महामारी से यह सबक सीखा है.
इसके ज़रिए उन साइबर अपराधियों को रोका जा सकेगा जो अक्सर वेबसाइट के संचालकों की जानकारी के बग़ैर उन पर कब्ज़ा कर लेते हैं और उसका कई तरह से दुरुपयोग करते हैं, ख़ासकर स्पैम ईमेल यानी सामूहिक ईमेल भेजने के लिए करते हैं.
इस प्रस्ताव का मतलब यह है कि हर बार जब कंप्यूटर को चालू किया जाएगा तो हर बार कंप्यूटर इस बात की जाँच करेगा कि कहीं उसमें ऐसी कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है.
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस व्यवस्था को लागू करने और चलाने की ज़िम्मेदारी कौन निभाएगा.
घातक

इसके ज़रिए उस समस्या से निपटने का प्रस्ताव किया गया है जिसे बॉटनेट्स कहा जाता है. इसमें साइबर अपराधी कंप्यूटर नेटवर्क पर कब्ज़ा कर लेते हैं.
अक्सर कंप्यूटर चलाने वाले को यह पता ही नहीं होता कि उसकी मशीन पर किसी और ने कब्ज़ा कर लिया है.
ऐसा करने के लिए आमतौर पर ईमेल के ज़रिए भेजे जाने वाले सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया जाता है.ऐसे किसी सॉफ़्टवेयर को डाउनलोड करने से भी ऐसी समस्या आती है जो वैधानिक सॉफ़्टवेयर की तरह ही प्रतीत होता है.
स्कॉट चार्नी का दावा है कि इसका इलाज यह है कि एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था लागू कर दी जाए जिससे कि कंप्यूटरों के स्वास्थ्य की ऑनलाइन ही जाँच हो सके.
उनका कहना है कि कंप्यूटर को जब भी इंटरनेट से जोड़ा जाए तो यह जाँच करना आवश्यक कर दिया जाए कि उसमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम हैं और उसमें एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर ठीक काम कर रहा है.
कंप्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञों के जर्मनी में हो रहे इस सम्मेलन का प्रस्ताव रखा गया है और फिलहाल यह कागज़ो पर ही है.
लेकिन बीबीसी के तकनीकी मामलों के संवाददाता मार्क ग्रेगरी का कहना है कि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोसॉफ़्ट को इस तरह का ज्ञान देने का कोई अधिकार ही नहीं है क्योंकि पूर्व में उसके सॉफ़्टवेयर भी सुरक्षा मामलों में कमज़ोर साबित हुए हैं.
































