प्रिंटर से निकलेंगे गुर्दे जैसे कई अंग

प्रयोगशाला में अंग विकसित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयोग के रुप में एक प्रिंटर के ज़रिए गुर्दे जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रिंट किए गए हैं.
पुनरुत्पादक दवाओं पर अनुंसधान से जुड़े 'वेक फॉर्स्ट इंस्टिट्यूट' के डॉक्टर एंथोनी जे अटाला का मानना है कि इस दिशा में और कामयाबी मिलने पर अंगदान की समस्या हल हो पाएगी.
डॉक्टर अटाला और उनके दल के सदस्यों ने कैलिफोर्निया में एक कॉंन्फ्रेंस के दौरान थ्री-डी प्रिंटर के ज़रिए यह दिखाने की कोशिश की कि किस तरह गुर्दे जैसे कई अंग प्रयोगशाला में बनाए जा सकते हैं.
उन्होंने बताया कि यह मशीन और इसकी तकनीक ठीक उसी तरह काम करती है जिस तरह एक आम प्रिंटर काम करता है.
स्याही की जगह जीवित कोशिकाएं
फर्क यह है कि इस प्रिंटर में कार्ट्रिज यानि स्याही की जगह जीवित कोशिकाओं का इस्तेमाल किया गया है.
अंगों को प्रिंट करने की प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए डॉक्टर अटाला ने कहा इस प्रिंटर में इस्तेमाल की जा रही कोशिकाएं नमूने के तौर पर मानव शरीर से ली गई हैं. यह ज़रूरी है क्योंकि मानव शरीर के लिए अपने ही कोशिकीए ढांचे पर आधारित अंग को स्वीकार करना आसान होगा है.
इस कॉंन्फ्रेंस में प्रयोग के तौर पर डॉक्टर अटाला ने जो गुर्दा तैयार किया उसका प्रिंट तैयार होने में करीब सात घंटे का समय लगा और यह एक गुलाबी झिल्ली की तरह दिखाई दे रहा था.
डॉक्टर अटाला का कहना है कि ये प्रयोग अभी बेहद शुरुआती दौर में हैं और इस तरह तैयार किए गए गुर्दों को फिलहाल मरीज़ों में प्रत्यारोपित नहीं किया जा सकता.
हालांकि यह दल प्रयोगशाला में मूत्राशय बना चुका है और यह अंग लगभग दस साल तक मरीज़ों के शरीर में बखूबी काम करते हैं.
































