पक्षियों के कलरव में तनाव

कुंजों में रहने वाले बोअर पक्षियों में आवाज़ों की नक़ल के चलन की एक बड़ी वजह तनाव हो सकती है.
जंगल या बाग़ में समूह बनाकर रहने वाले इन पक्षियों के कलरव का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने यह नतीजे निकाले हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि ख़तरे का आभास होने पर पक्षियों में तनाव पैदा होता है और वह अपने बचाव के लिए विशेष आवाज़ें निकालते हैं.
हालांकि इससे पहले यह माना जाता था कि वह आवाज़ें धमकी भरी होती हैं.
लेकिन ताज़ा अध्ययन में यह पाया गया कि बोअर पक्षी जब कभी शिकारियों से या जंगली जानवरों से ख़तरा महसूस करते हैं तो उनकी आवाज़ में डर के कारण तनाव आ जाता है
अन्य पक्षी भी उसी तनाव में वैसी ही आवाज़े निकालने लगते हैं.
वैज्ञानिकों ने पाया कि तनाव के समय बोअर पक्षियों की एक जैसी आवाजों में डर होता है धमकी नहीं.
धमकी नहीं डर
इससे पहले पक्षियों के अंडे एकत्र करने वाले लोगों के अनुभवों के आधार पर वैज्ञानिकों ने अलग नतीजे निकाले थे.
उनका यह अनुमान था कि यह पक्षी ख़तरा देख कर अपने कुंज के बचाव के लिए पक्षी एक जैसी आक्रामक आवाज़ें निकालते हैं.
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डॉ लौरा कैली का कहना था, " हमने समूह में रहने वाले बोअर पक्षियों की आवाज़ों के अध्ययन में हमने यह पाया कि तनाव ग्रस्त होने पर नर पक्षियों की आवाज़ में शिकारी की सी धमकी नहीं थी बल्कि शिकार की सी दीनता थी"
उन्होंने बताया कि पक्षी तनावपूर्ण स्थितियों में जो सुर निकालते हैं उन्हें याद कर लेते हैं और आगे कोई वैसी ही तनावपूर्ण स्थिति आने पर वही सुर लगाने लगते हैं.
लौरा कैली का ये कहना था कि इन पक्षियों की आवाज़ों की रिकॉर्डिंग्स ये भी पता चला कि ये आवाज़ें कई तरह की होती हैं.
कभी कभी एक दूसरे को परेशान करने के लिए, कभी किसी साथी पक्षी से ख़तरा महसूस होने पर, और कभी बाहरी ख़तरा देखते हुए अलार्म के तौर पर पक्षियों के ऐसे सुर सुने गए.
लेकिन ध्यान देने की बात ये है कि बोअर पक्षी केवल तनाव पूर्ण स्थितियों में ही आवाज़ की नक़ल कर पाते हैं.
उनका कहना था कि तनाव पूर्ण माहौल में पक्षियों के एक दूसरे की नक़ल करते हुए आवाज़ें निकालने पर यह पहला अध्ययन हुआ है.
































