पृथ्वी का दूसरा चांद भी था!

ऐसे हुआ होगा टकराव

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इमेज कैप्शन, नासा के अभियान अगले एक वर्ष में वैज्ञानिकों के आकलन को या तो सही साबित करेंगे या ख़ारिज कर देंगे

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर परिकल्पना की है कि संभवत: चार अरब साल पहले पृथ्वी का एक दूसरा चांद था जो धीमी गति से बड़े चांद के साथ टकराया और नष्ट हो गया.

इस परिकल्पना का विस्तृत ब्यौरा नेचर पत्रिकार में छपा है.

शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि दूसरा छोटा चांद नष्ट होने से पहले लाखों साल तक अस्तित्व में रहा.

वैज्ञानिकों का मानना है कि धीमी गति से छोटे चांद के बड़े चांद से टकराने के कारण ही संभवत: चांद की पृथ्वी से नज़र आने वाली सतह पर कई खाइयाँ है (जिन्हें साहित्यकार चांद में दाग़ बताते हैं).

लेकिन चांद का जो भाग पृथ्वी से नज़र नहीं आता है, उस ओर इस टकराव की वजह से लगभग 3000 मीटर ऊँचे पहाड़ पैदा हो गए.

मात्र 2.4 किलोमीटर प्रति सैकेंड का टकराव

वैज्ञानिकों का आकलन है कि लगभग चार अरब साल पहले पृथ्वी से मंगल ग्रह जैसा कोई ग्रह टकराया लेकिन इस टकराव के मलबे से एक चांद पैदा होने की जगह दो चांद पैदा हुए.

दूसरा चांद पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी और बड़े चांद के बीच में फँस गया.

लाखों साल इसी स्थिति में रहने के बाद वह धीरे-धीरे चांद की ओर आकर्षित हुआ और लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सैकेंड की गति से उससे टकराया और वैज्ञानिकों के अनुसार इसी कारण से बड़े चांद पर 3000 मीटर ऊँचे पहाड़ पैदा हो गए.

इस अध्ययन से जुड़े स्विट्ज़रलैंड के बर्न विश्वविद्यालय के एक डॉक्टर मार्टिन जुत्ज़ी का कहना है, "ये टकराव बहुत ही धीमी गति से हुआ था, लगभग 2.4 किलोमीटर प्रति सैकेंड की गति से - ये महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका मतलब है कि न कोई बड़ा झटका लगा और न ही बड़ी मात्रा में कुछ पिघला."

दशकों से वैज्ञानिक बड़े चांद पर खाइयों और पहाड़ों के होने के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अब उन्हें उम्मीद है कि नासा के अभियान एक साल के भीतर इस नई परिकल्पना को या तो सही ठहराएँगे या फिर इसे ख़ारिज कर दिया जाएगा.