कनाडा पर विज्ञान संबंधी जानकारियाँ दबाने का आरोप

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- Author, पल्लब घोष
- पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
कनाडा में विज्ञान पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कनाडा सरकार पर चिकित्सा और पर्यावरण से जुड़ी जानकारियों को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगा है.
कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक चिकित्सा और पर्यावरण जैसे विषयों पर होने वाले जो शोध सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ थे, उन्हें सरकार की ओर से दबाने की कोशिश की गई.
विक्टोरिया विश्वविद्यालय में विज्ञान के वरिष्ठ प्रोफेसर थॉमस पीडरसेन के मुताबिक ऐसा अक्सर जलवायु परिवर्तन संबंधी अनुसंधानों को लेकर किया गया है और संभवत: इसका कारण राजनीतिक है.
उन्होंने कहा, ''कनाडा के प्रधानमंत्री संचार पर नियंत्रण रखने में विश्वास रखते हैं. मुझे लगता है कि वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उनकी सरकार की पर्यावरण संबंधी नीतियों से मेल न खाने वाले शोध से शर्मिंदगी न हो.''
हालांकि कनाडा सरकार ने बीबीसी से हुई बातचीत में इस बात से इंकार करते हुए कहा कि सरकार के लिए विज्ञान संबंधी संचार हर रुप में बेहद महत्वपूर्ण है.
बातचीत पर नियंत्रण
हाल ही में कनाडा सरकार ने कार्बन उत्सर्जन पर रोक लगाने संबंधी 'क्योटो प्रोटोकॉल' से अपना नाम वापस ले लिया था.
प्रोफेसर थॉमस के मुताबिक, ''मुझे शक है कि सरकार चाहती है कि वैज्ञानिक उन अनुसंधानों पर चर्चा और विमर्श न करे जो ये कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है.''
वैज्ञानिकों के मुताबिक यही वजह है कि कनाडा सरकार ने वर्ष 2008 में एक ऐसा नियम लागू किया जिसके तहत सरकार के तहत काम कर रहे वैज्ञानिकों से साक्षात्कार और बातचीत के लिए सरकारी अनुमति लेना ज़रूरी हो गया.
बैठक में वैज्ञानिकों का 'मुंह बंद करने की कोशिश' पर चर्चा आयोजित करनेवाली विज्ञान पत्रकार बिन आन वू वान ने कहा कि पत्रकारों को वैज्ञानिकों से बातचीत करने में बहुत दिक्कतें पेश आ रही हैं.
विक्टोरिया विश्वविद्दालय के पर्यावरण वैज्ञानिक एंड्रियु वीवर के मुताबिक सरकार की ओर से शोध-संबंधी सूचनाएं इस कदर नियंत्रित की जाती हैं कि जनता अक्सर अंधेरे में रहती है और उस तक सही जानकारी नहीं पहुंचती.
एंड्रियु वीवर ने कहा कि जीवन के लिए महत्वपूर्ण मसलों जैसे जलवायु, तेल और पर्यारण पर तब तक बहस मुमकिन नहीं जब तक सही जानकारी न उपलब्ध हो. उनके मुताबिक जनसंचार के ज़रिए बातचीत का एक ढर्रा तय कर दिया जाता है और अब यह विज्ञान के साथ हो रहा है.












