सबसे बुज़ुर्ग और युवा एक ही टीम में

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इस विश्व कप के सबसे बुज़ुर्ग खिलाड़ी कनाडा के ऑलराउंडर जॉन डेविसन जब सोमवार को ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ क्रीज़ पर उतरेंगे तो उनके पास अपनी उम्र को अहसास कर पाने के पर्याप्त कारण होंगे.
कनाडा की कमज़ोर बल्लेबाज़ी को मज़बूत किए जाने की ज़रूरत के कारण हो सकता है कि 40 वर्षीय डेविसन के टूर्नामेंट के सबसे युवा खिलाड़ी 16 वर्षीय नीतीश कुमार के साथ मैदान पर उतरना पड़े.
नीतीश ने पहला एक दिवसीय मैच 15 वर्ष की आयु में खेला था और अब उन्हें ज़िम्बाब्वे के त्रिकोणीय स्पिन अटैक का सामना करने के लिए टीम में उतारा जा सकता है.
डेविसन का कहना है, "मैं भाग्यशाली हूँ कि दस साल पहले मैं पहली बार कनाडा गया था. उस समय नीतीश छह साल के थे और मैं कह सकता हूँ कि तब तक वह एक अच्छे क्रिकेटर बन चुके थे. उनके पिता हमारे साथ क्लब क्रिकेट खेला करते थे. वह न सिर्फ़ उन्हें गेंद किया करते थे बल्कि पुल शॉट भी लगाया करते थे."
नीतीश को मौका

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ऑस्ट्रेलिया में जन्मे डेविसन 2003 में टूर्नामेंट का सबसे तेज़ शतक लगाकर अपने नए देश के लिए अपना महत्व सिद्ध कर चुके हैं.
नीतीश को भी अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ अपना पहला मैच खेलने के एक साल बाद फिर से चमकने का मौक़ा मिल सकता है.
कनाडा के कप्तान आशिष बगई का कहना है, "हो सकता है कि यह दोनों ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ पारी की शुरुआत करें. टीम के बारे में अंतिम फ़ैसला हम शाम को लेंगे. टॉप ऑडर को रन बनाने में अब तक दिक़्कत हुई है इसलिए थोड़ा बहुत फेरबदल तो होना ही है."
बगई जानते हैं कि श्रीलंका के ख़िलाफ़ पहले मैच में 210 रनों से हारने के बाद उनकी टीम को कुछ विशेष ही करना होगा.
टेस्ट मैच खेलने वाले देशों के ख़िलाफ़ मुकाबले काफ़ी कठिन होंगे. उनके जीतने के सबसे अच्छे मौके ज़िम्बाब्वे और कीनिया के ही ख़िलाफ़ होंगे.
कनाडा की सबसे ज़्यादा उम्मीदें डेविसन से होंगी जो श्रीलंका के ख़िलाफ़ शून्य बनाने की भरपाई दो विकेट लेकर कर चुके हैं.
कना़डा के ठीक-ठाक स्कोर बनाने का पूरा दारोमदार उन्हीं पर होगा. बड़ी टीमों के ख़िलाफ़ उनके अनुभव और आत्म विश्वास को देखते हुए यह नहीं लगता कि दूसरे छोर पर इतनी कम उम्र के खिलाड़ी का होना उन्हें विचलित करेगा.
































