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जब सुनील ग्रोवर के बारे में सलमान ख़ान बोले, 'उन्हें देख लगता है कि मैं कितना नाक़ाबिल हूं'
- Author, कल्पना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
"जब हम उन्हें (सुनील ग्रोवर को) देख रहे थे, तो मुझे लगा कि मैं कितना नाक़ाबिल हूं. वह कॉमेडी करने की कोशिश नहीं करते हैं बल्कि किरदार निभाते हैं", सलमान ख़ान ने यह बात साल 2017 में कही थी.
क़रीब नौ साल बाद ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स पर आने वाले 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' के एक एपिसोड में जब स्टेज पर 'फ़ादर खान' नाम के किरदार की एंट्री होती है, तो उस एपिसोड के मेहमान फ़िल्मकार डेविड धवन यह कहते दिखते हैं कि 'भाईजान की याद दिला दी'.
अचंभित सिर्फ़ डेविड धवन ही नहीं थे, उनके बेटे वरुण धवन, स्टेज की दूसरी तरफ़ बैठी अर्चना पूरन सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू भी फटी आँखों से फ़ादर खान के इस एक्ट को देख रहे थे.
फिर स्टूडियो में मौजूद दर्शकों की तालियां तो बता ही रही थीं कि स्टेज पर उन्हें कैसा जादू दिख रहा है.
एक बार फिर सुनील ग्रोवर ने कुछ ऐसा कर दिया है, जिसे सिर्फ़ मिमिक्री कहना उनकी प्रतिभा के लिए मुनासिब शब्द नहीं लगता.
मरहूम एक्टर कादर ख़ान के किरदार को ग्रोवर ने जिस तरह निभाया, उसके बाद यह एक्ट सोशल मीडिया पर ख़ूब वायरल हुआ.
अभिनेता गजराज राव ने अपनी एक पोस्ट में लिखा, "सुनील ग्रोवर सिर्फ़ मिमिक नहीं करते, वह उस व्यक्ति की आत्मा में प्रवेश कर जाते हैं. उनके बोलने, उनके लहज़े, उनके हावभाव को अपना लेते हैं. उनकी कला दिव्य है, वह अनोखे हैं."
किरदार में घुस जाते हैं... लेकिन कैसे?
नेटफ़्लिक्स पर आने वाले इस शो में ही सुनील ग्रोवर ने आमिर ख़ान का रूप भी धरा. आमिर इस तरह हैरान हुए जैसे वह किसी आइने के सामने खड़े हों.
सुनील की तारीफ़ में आमिर ने कहा था, "वह सिर्फ़ आपकी आवाज़ या हावभाव की नकल नहीं करते हैं, बल्कि उससे आगे जाते हैं, वह आपकी सोच को समझते हैं."
इसके बाद आमिर ख़ान प्रोडक्शन की फ़िल्म 'हैप्पी पटेल' के लिए सुनील ग्रोवर और आमिर ख़ान, फ़िल्म के को डायरेक्टर और एक्टर वीर दास के साथ फ़िल्म को प्रमोट करते दिखे.
कपिल शर्मा शो में सुनील ग्रोवर ने बड़ी बारीकी से सलमान ख़ान की बॉडी लैंग्वेज पकड़ी, उनके बोलने के एक विशेष तरीक़े को पकड़ा.
यह एक्ट भी दर्शकों के बीच ख़ूब चर्चा का विषय बना था.
कुछ साल पहले सलमान ने कहा था, "वह कॉमेडी करने की कोशिश नहीं करते हैं बल्कि किरदार निभाते हैं. जब मैं और सोहेल उन्हें देख रहे थे तो मुझे लगा मैं कितना नाक़ाबिल हूं."
इसी शो के दौरान गुत्थी का चरित्र भी सुनील ग्रोवर ने वर्षों पहले निभाया था. इसके सुपरहिट होने के बाद उन्होंने अमिताभ बच्चन से लेकर अजय देवगन तक के चरित्र को निभाया.
मशहूर गीतकार गुलज़ार की जगह उनका इस शो में 'फुलज़ार' बनकर आना शो में आए लोगों को चकित कर गया.
सुनील ग्रोवर को देखकर कुछ ऐसा लगता है कि वह किसी किरदार को ओढ़ते नहीं हैं, उसमें प्रवेश कर जाते हैं. लेकिन ग्रोवर यह कर कैसे लेते हैं.
अलग-अलग इंटरव्यू में उनके दिए जवाब का सार बताता है कि सुनील ग्रोवर किरदारों को न सिर्फ़ बारीकी से देखते हैं, उन्हें महसूस करते हैं, बल्कि उस चरित्र में इस तरह ढल जाते हैं कि लोग अचंभित हो जाते हैं.
हां यह अलग बात है कि कपिल शर्मा शो ने सुनील ग्रोवर को जो मुक़ाम दिया, वह उन्हें किसी और शो ने नहीं दिया. एकाध बार सुनील ग्रोवर ने कपिल शर्मा की टीम से अलग होकर अपने दम पर कुछ नया करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
कपिल शर्मा से मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुनील ग्रोवर लंबे समय तक इस कॉमेडी शो से दूर भी रहे.
इस दौरान उन्होंने फ़िल्मों में भी हाथ आज़माया. लेकिन उन्हें असली जगह कपिल शर्मा शो ने दिलाई.
प्रिय लेखक शरद जोशी
हरियाणा के मंडी डबवाली में जन्मे सुनील ग्रोवर के लिए काम के दरवाज़े तब खुले, जब वे चंडीगढ़ में जीजीडीएसडी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे.
यूट्यूब चैनल जिस्ट को दिए एक इंटरव्यू में ग्रोवर बताते हैं कि किस तरह कॉमेडी से उनकी मुलाक़ात जसपाल भट्टी के शो फुल टेंशन से हुई.
1995 में आए इस व्यंग्य शो के लिए भट्टी कुछ कलाकार ढूंढ रहे थे और ग्रोवर को जब यह बात पता चली तो उनके शब्दों में कहें तो 'वह मुंह उठाकर ऐसे ही चले गए.'
उन्हें शो के लिए चुन भी लिया गया लेकिन ग्रोवर बताते हैं कि काफ़ी वक्त बाद भट्टी से ही उन्हें पता चला कि पहले दिन उन्हें देखकर यह तय किया गया था कि उन्हें 'क्लर्क टाइप' के रोल के लिए लिया जाएगा.
इसी शो में पहली बार ग्रोवर टीवी स्क्रीन पर दिखे थे, जिसके लिए उनका पूरा परिवार टीवी के सामने बैठा था.
और ग्रोवर का डायलॉग था- डाकू आ गए, डाकू आ गए, डाकू आ गए. चंद सेकंड्स के लिए टीवी पर आए ग्रोवर की यह पहली एंट्री उनके परिवार के कुछ सदस्य देख ही नहीं पाए, क्योंकि वे उस वक़्त बाथरूम या किचन या घर के किसी और हिस्से में थे.
29 साल बाद एक यूट्यूब शो में ग्रोवर मुंबई के अपने ख़ूबसूरत घर के अलग-अलग कोनों को दिखा रहे हैं. इसी दौरान उनकी हास्य कला का एक राज़ भी खुलता है, जब वह बताते हैं कि उन्हें किताबों से कितना प्रेम है.
उनके शेल्फ पर रखी अंग्रेज़ी-हिंदी किताबों में आपको श्रीलाल शुक्ल का लिखा कालजयी उपन्यास 'राग दरबारी' भी दिख जाता है.
ग्रोवर ने इस शो में कहते हैं कि व्यंग्यकार शरद जोशी उनके पसंदीदा लेखक हैं, जिनके लिखे 100 व्यंग्य के संकलन वाली किताब, संभवतः उनकी प्रिय किताबों में से एक है.
यह जानकारी ज़्यादा कुछ नहीं पर यह तो बताती ही है कि शरद जोशी की तरह ग्रोवर की हास्य-भाषा में भी समाज की नब्ज़ पकड़ने का जादू है.
फ़र्क बस यह है कि जोशी व्यंग्य करते थे और ग्रोवर ऑबज़र्वेशन्ल कॉमेडी, जिनका निशाना कोई भी हो सकता है, हिंदुस्तान के बड़े फिल्म स्टार आमिर ख़ान और सलमान ख़ान भी और जमना पार के नंबर छह ऑर्केस्ट्रा चकचक धूम के प्रोपराइटर डायमंड राजा भी और शायद आप और हम भी.
माइक्रो ऑब्ज़र्वेशन का जादू
सुनील ग्रोवर की नज़र आम लोगों पर भी रहती है और वह किस तरह उनके एक्ट का निशाना बन सकते हैं, यह पता चलता है 2008 के उस रेडियो शो से जिसमें वह सुदर्शन उर्फ सुड नाम के एक किरदार को निभाते थे और कॉलेज के स्टूडेंट्स के बीच बेहद लोकप्रिय थे.
एक इंटरव्यू में ग्रोवर बताते हैं कि रेडियो मिर्ची पर उनके निभाए सुड के किरदार ने ही उन्हें पहली बार पहचान दिलाई थी.
वह बताते हैं कि किस तरह एक काल्पनिक चुटकुले की किताब 'हंसी के फव्वारे' से बहुत ही फ्लैट आवाज़ में जोक पढ़ते सुड का किरदार उन्हीं का गढ़ा हुआ था.
उस वक़्त रेडियो मिर्ची के नेशनल क्रिएटिव हेड रहे रंजीत मडगावकर ने ग्रोवर के साथ मिलकर इस आइडिया को अमली जामा पहनाने का काम किया था.
बीबीसी से बातचीत में मडगावकर बताते हैं कि किस तरह ग्रोवर की ख़ास बात उनका 'माइक्रो ऑब्ज़र्वेशन' है.
हर गुरुवार चाय की टपरी पर 'सुड' की स्क्रिप्ट पर बात करने के दौरान मडगावकर पाते थे कि किस तरह ग्रोवर किसी व्यक्ति के बारीक़ से बारीक़ हावभाव को भी गौर से देखते थे, वह कैसे चाय ऑर्डर करते हैं, वह कैसे घड़ी देखते हैं, कैसे अपने घर-परिवार की बात करते हैं, कुछ भी उनकी नज़र से छूटता नहीं था और फिर मानो एक स्विच ऑन करने की देर होती थी और ग्रोवर, ग्रोवर न रहकर वह किरदार हो जाते थे.
ग्रोवर के शुरुआती दिनों से अब तक के उनके सफ़र को क़रीब से देखने वाले मडगावकर कहते हैं कि "कहीं न कहीं वह जानते थे कि उनका यह साथी यही करेगा क्योंकि लोगों के अंदर छिपे किरदारों को बाहर निकालना ग्रोवर को स्वाभाविक रूप से आता है."
शायद इसलिए सुनील ग्रोवर का इंस्टाग्राम आईडी है @whosunilgrover यानी कौन सुनील ग्रोवर?
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.